{"_id":"61f819b4a19b441e1b2717de","slug":"mirzapur-mandi-parishad-case-inspector-replaced-supervisor-high-court-canceled-director-s-order","type":"story","status":"publish","title_hn":"मिर्जापुर मंडी परिषद का मामला : पर्यवेक्षक की जगह बना दिया निरीक्षक, हाईकोर्ट ने रद्द किया निदेशक का आदेश","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मिर्जापुर मंडी परिषद का मामला : पर्यवेक्षक की जगह बना दिया निरीक्षक, हाईकोर्ट ने रद्द किया निदेशक का आदेश
Tue, 01 Feb 2022 01:48 AM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Tue, 01 Feb 2022 01:48 AM IST
सार
याची के अधिवक्ता राहुल अग्रवाल ने तर्क दिया कि याची को मंडी समिति मिर्जापुर में अनुकंपा नियुक्ति के तहत निरीक्षक के पद पर नियुक्ति का आदेश जारी कर दिया गया, जबकि उनकी नियुक्ति पर्यवेक्षक के पद पर प्रस्तावित थी।
विज्ञापन
allahabad high court
- फोटो : social media
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने याची को मिर्जापुर मंडी परिषद में पर्यवेक्षक की जगह निरीक्षक के पद पर तैनात किए जाने के मंडी परिषद के निदेशक के आदेश को रद्द कर दिया है। कोर्ट ने कहा है कि मंडी परिषद के निदेशक मामले में नए सिरे से विचार कर दो महीने में उचित निर्णय लें। यह आदेश अजीत कुमार ने धीरेंद्र कुमार गुप्ता की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है।
विज्ञापन
याची के अधिवक्ता राहुल अग्रवाल ने तर्क दिया कि याची को मंडी समिति मिर्जापुर में अनुकंपा नियुक्ति के तहत निरीक्षक के पद पर नियुक्ति का आदेश जारी कर दिया गया, जबकि उनकी नियुक्ति पर्यवेक्षक के पद पर प्रस्तावित थी। उन्हें प्रस्तावित पद के मुकाबले नीचे के पद पर नियुक्ति का आदेश जारी किया गया है।
विज्ञापन
पर्यवेक्षक के पद पर नियुक्ति के लिए मंडी समिति के उपनिदेशक की ओर से भी कोई आपत्ति नहीं की गई थी। निदेशक के निर्देश पर ही मंडी समिति के उप निदेशक ने पर्यवेक्षक के पद पर नियुक्ति का प्रस्ताव भी भेजा था। इसके बावजूद उन्हें निरीक्षक के पद पर तैनात करने का आदेश जारी कर दिया गया।
विज्ञापन
कोर्ट ने कहा कि मंडी परिषद के निदेशक ने निरीक्षक के पद पर तैनाती के लिए आदेश पारित करते समय कोई वजह नहीं बताई है। कोर्ट ने इस वजह से निदेशक के आदेश को रद्द कर दिया और मामले में फिर से विचार कर उचित निर्णय लिए जाने का आदेश दिया।