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High Court : अधिकार क्षेत्र से बाहर कार्य कर रहा अल्पसंख्यक आयोग, एक एनजीओ की याचिका पर कोर्ट ने की टिप्पणी

Wed, 11 Oct 2023 12:52 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Wed, 11 Oct 2023 12:52 PM IST
सार

न्यायमूर्ति महेश चंद्र त्रिपाठी और प्रशांत कुमार की खंडपीठ ने संभल के डिवाइन फेथ फेलोशिप चर्च व अन्य की याचिका को खारिज करते हुए यह टिप्पणी की। कोर्ट ने आयोग के विवादों पर निर्णय के लिए अपनाई जाने वाली प्रथाओं की निंदा की है।

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Minority Commission working outside its jurisdiction, court commented on the petition of an NGO
Court - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग और यूपी अल्पसंख्यक आयोग के फैसलों पर कड़ी नाराजगी जताई है। कहा है, आयोग अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर काम कर रहे हैं। कोर्ट ने राज्य सरकार को सुझाया है कि ऐसा करने वाले सदस्य या अध्यक्ष को पद से हटाया जा सकता है। अदालत ने फैसले की प्रति प्रदेश के मुख्य सचिव सहित अन्य अधिकारियों को भेजने का निर्देश भी दिया है।

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न्यायमूर्ति महेश चंद्र त्रिपाठी और प्रशांत कुमार की खंडपीठ ने संभल के डिवाइन फेथ फेलोशिप चर्च व अन्य की याचिका को खारिज करते हुए यह टिप्पणी की। कोर्ट ने आयोग के विवादों पर निर्णय के लिए अपनाई जाने वाली प्रथाओं की निंदा की है। कहा, आयोग अदालतों जैसा रवैया अपना रहे हैं। अधिकारियों को तलब कर फैसले पारित करने के लिए दबाव डाल रहे हैं।
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कोर्ट ने राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग या उत्तर प्रदेश अल्पसंख्यक आयोग के सदस्यों और अध्यक्षों से अपेक्षा की है कि वे अधिनियम में मिले अधिकारों के अनुरूप काम करें। अदालत ने कहा है कि ऐसे सदस्यों या अध्यक्षों का बने रहना सार्वजनिक हित के लिए हानिकारक होगा। इन्हें पद से हटाया जा सकता है।

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याचियों का कहना है कि चर्च की 17 दुकानों में से एक पर कब्जा हो गया है। इसकी शिकायत करने पर यूपी अल्पसंख्यक आयोग ने नायब तहसीलदार को तलब किया। आयोग ने पाया कि अमित को आवंटित दुकान पर कमल नाम के व्यक्ति ने कब्जा कर लिया है। आयोग ने अमित और कमल दोनों पर कार्रवाई का आदेश दिया, लेकिन सरकार ने कार्रवाई नहीं की।

याची राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग पहुंचे। आयोग ने जिला प्रशासन को दुकान पर कब्जा दिलाने में मदद का आदेश दिया। इसका पालन न होने पर हाईकोर्ट में गुहार लगाई। यहां यूपी सरकार के अधिवक्ता ने कहा कि अल्पसंख्यक आयोग की स्थापना विशेष उद्देश्य के लिए की गई है, लेकिन आयोग अधिकारियों को तलब कर अपने अधिकार क्षेत्र से परे काम करा रहा है।

हाईकोर्ट ने पाया कि 1992 अधिनियम के तहत अल्पसंख्यकों की सुरक्षा के लिए आयोग का गठन किया गया है। वह किसी मुकदमे की सुनवाई कर सकता है, लेकिन संपत्ति विवाद समाधान के लिए बेदखली का निर्देश नहीं दे सकता।

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