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मंत्रालय को झटका, नाम बदलने को तैयार नहीं कार्य परिषद

Tue, 12 May 2020 12:33 AM IST
Allahabad Bureau इलाहाबाद ब्यूरो
Updated Tue, 12 May 2020 12:33 AM IST
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ministry shoked work council not ready to change name
इलाहाबाद विश्वविद्यालय (इविवि) का नाम बदलकर ‘प्रयागराज विश्वविद्यालय’ किए जाने की मंत्रालय की कोशिश को इविवि की कार्य परिषद ने झटका दे दिया है। कार्य परिषद के सदस्यों ने नाम बदले जाने के प्रस्ताव पर अपना विरोध दर्ज कराते हुए इविवि के वर्तमान नाम को ही बरकरार रखने पर सहमति जताई है। सदस्यों की ओर से इस मसले पर प्रतिक्रिया मिलने के बाद इविवि प्रशासन ने सभी तथ्यों के साथ प्रस्ताव मंत्रालय को भेज दिया है।
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इविवि प्रशासन को केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय की ओर से तीन दिन पहले एक पत्र जारी किया गया था, जिसमें इविवि का नाम बदले जाने से संबंधित प्रस्ताव मांगा गया था और कहा गया था कि इस मसले पर कार्य परिषद के सभी सदस्यों की राय लेकर प्रस्ताव भेजा जाएगा। इसके बाद इविवि प्रशासन ने कार्य परिषद के सभी 15 सदस्यों को ईमेल के माध्यम से पत्र भेजकर उनकी राय मांगी थी। इस बीच प्रस्ताव को लेकर विश्वविद्यालय के छात्रों और शिक्षकों ने पुरजोर विरोध शुरू कर दिया। छात्रसंघ के पूर्व पदाधिकारियों और पुरा छात्रों ने भी अपना विरोध दर्ज कराया। ऑटा और ऑक्टा भी इस प्रस्ताव के खिलाफ मोर्चा खोल दिया।
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उधर, कार्य परिषद के 15 में से 12 सदस्यों ने अपनी राय इविवि प्रशासन को भेज दी। कार्य परिषद के सभी 12 सदस्यों ने इविवि के वर्तमान नाम को ही बरकरार रखने पर सहमति जताई। इविवि के पीआरओ डॉ. शैलेंद्र कुमार मिश्र का कहना है कि जिन सदस्यों ने अपनी राय भेजी है, उनमें से कोई भी विश्वविद्यालय का नाम बदलने के प्रस्ताव से सहमत नहीं है। उनकी राय के आधार पर एक प्रस्ताव तैयार कर मंत्रालय को भेज दिया गया है। गौरतलब है कि इविवि का नाम बदले जाने का प्रस्ताव कार्य परिषद की बैठक के एजेंडे में भी शामिल किया गया था लेकिन मार्च में प्रस्तावित यह बैठक कोविड-19 के कारण अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई थी। कार्य परिषद के सदस्यों की ओर से इस प्रस्ताव पर अपना विरोध दर्ज कराने के बाद मंत्रालय के लिए अब इविवि का नाम बदलना आसान नहीं होगा।
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चलाया हस्ताक्षर अभियान, पांच हजार लोगों का समर्थन
इलाहाबाद विश्वविद्यालय का नाम बदले जाने के प्रस्ताव के विरोध में ऑनलाइन हस्ताक्षर अभियान चलाया गया है, जिसमें छात्रों और शिक्षकों का जबर्दस्त समर्थन मिल रहा है। इलाहाबाद हेरिटेज सोसाइटी के संस्थापक अक्षत लाल की ओर से चलाए गए इस ऑनलाइन अभियान में अब तक पांच हजार लोग शामिल हो चुके हैं। इविवि के पूर्व शिक्षक प्रो. आरसी त्रिपाठी, प्रो. एके श्रीवास्तव समेत बड़ी संख्या में शिक्षकों एवं छात्रों ने इस अभियान में शामिल होकर प्रस्ताव का विरोध किया है। उनका कहना है कि इविवि में इस वक्त कोई स्थायी कुलपति नहीं है। मंत्रालय को इसकी कोई फिक्र नहीं है। लॉक डाउन में इविवि का नाम बदलने की कवायद हो रही है, जो हास्यास्पद है।
एनएसयूआई के राष्ट्रीय नेतृत्व ने संभाली कमान
इविवि नाम बचाने की मुहिम में एनएसयूआई का राष्ट्रीय नेतृत्व भी मुहिम में शामिल हो गया है। एनएसयूआई के ऑनलाइन हस्ताक्षर अभियान को 12 हजार लोगों का समर्थन प्राप्त हुआ है। राष्ट्रीय सचिव लोकेश चुग का कहना है कि मंत्रालय बेवजह नाम परिवर्तन और व्याकुलता को रोके। बेहतर होगा कि कोरोना से लड़ें और शिक्षा की गुणवत्ता को सुधारें। वहीं, इविवि छात्रसंघ के निवर्तमान उपाध्यक्ष अखिलेश यादव ने केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री को पत्र लिखकर मांग की है कि इविवि का नाम न बदला जाए, बल्कि इविवि में पढ़ाई की गुणवत्ता एवं रैंकिंग को बदलने का प्रयास किया जाए।

छात्रों ने राष्ट्रपति को खून से लिखा पत्र
इलाहाबाद विश्वविद्यालय के छात्रों और समाजवादी छात्रसभा के सदस्यों ने अपने खून से राष्ट्रपति को पत्र लिखकर इविवि का नाम बदले जाने के प्रस्ताव पर विरोध दर्ज कराया है। पत्र लिखने वालों में शोध छात्रा नेहा यादव, समाजवादी छात्रसभा के अध्यक्ष अखिलेश गुप्ता गुड्डू, पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष अवनीश यादव, निवर्तमान अध्यक्ष उदय प्रकाश यादव, पूर्व उपाध्यक्ष अदील हमजा, राघवेंद्र यादव, अविनाश विद्यार्थी, पंकज, आयुष प्रियदर्शी, अनीश कुमार आदि शामिल हैं।
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