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एलएलएम परीक्षा में जारी रहेगी न्यूनतम अंकों की अर्हता
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Tue, 29 Mar 2016 02:09 AM IST
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एलएलएम प्रवेश परीक्षा में शामिल होने के लिए न्यूनतम अंक की अनिवार्यता जारी रहेगी। इसे लेकर दाखिल याचिका हाईकोर्ट ने खारिज कर दी है। याचिका में एलएलएम प्रवेश परीक्षा में शामिल होने के लिए सामान्य के लिए न्यूनतम 55 प्रतिशत और एससीएसटी के लिए 50 प्रतिशत अंक एलएलबी में अनिवार्यता को चुनौती दी गई। परीक्षा राजीव गांधी विधि विश्वविद्यालय पंजाब द्वारा आयोजित की जा रही है। अमरजीत चौधरी ने इसके विरुद्ध जनहित याचिका दाखिल कर अंकों की अनिवार्यता समाप्त करने की मांग की थी। इसके साथ परीक्षा शुल्क अधिक लिए जाने को भी चुनौती दी गई थी। याचिका पर मुख्य न्यायमूर्ति डॉ. डीवाई चंद्रचूड और न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा की खंडपीठ ने सुनवाई की।
याची का कहना था कि जब एलएलएम में प्रवेश के लिए परीक्षा आयोजित की जा रही है तो सभी विधि स्नातकों को इसमें मौका मिलना चाहिए। 55 और 50 प्रतिशत अंकों की अनिवार्यता से याची के उच्च शिक्षा पाने के मौलिक अधिकार का हनन हो रहा है। विश्वविद्यालय ने प्रवेश शुल्क चार हजार रुपये रखा है, जबकि मेडिकल और इंजीनियरिंग की प्रवेश परीक्षा में शुल्क 1500 रुपये ही है। कोर्ट ने याचिका यह कहते हुए खारिज कर दी कि प्रवेश परीक्षा के लिए न्यूनतम अंक का निर्धारण विश्वविद्यालय का अधिकार है। ऐसा करके उसने कोई मनमाना कार्य नहीं किया है। चूंकि याची न्यूनतम अर्हता नहीं रखता है, इसलिए उसे शुल्क के मामले को भी चुनौती देने का अधिकार नहीं है।
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याची का कहना था कि जब एलएलएम में प्रवेश के लिए परीक्षा आयोजित की जा रही है तो सभी विधि स्नातकों को इसमें मौका मिलना चाहिए। 55 और 50 प्रतिशत अंकों की अनिवार्यता से याची के उच्च शिक्षा पाने के मौलिक अधिकार का हनन हो रहा है। विश्वविद्यालय ने प्रवेश शुल्क चार हजार रुपये रखा है, जबकि मेडिकल और इंजीनियरिंग की प्रवेश परीक्षा में शुल्क 1500 रुपये ही है। कोर्ट ने याचिका यह कहते हुए खारिज कर दी कि प्रवेश परीक्षा के लिए न्यूनतम अंक का निर्धारण विश्वविद्यालय का अधिकार है। ऐसा करके उसने कोई मनमाना कार्य नहीं किया है। चूंकि याची न्यूनतम अर्हता नहीं रखता है, इसलिए उसे शुल्क के मामले को भी चुनौती देने का अधिकार नहीं है।
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