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प्रयागराज में लाखों लोगों को तीसरे दिन भी नहीं मिला पानी
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Millions of people did not get water on the third day in Prayagraj
- फोटो : CITY DESK
टंकियां खाली, नल सूखे, भटके लोग
0 शिकायतों पर ध्यान नहीं, अफसर छिपाते रहे मुंह
प्रयागराज। शहर के साठ फीसदी आबादी शुक्रवार को तीसरे दिन भी जलापूर्ति ठप रहने से परेशान रहे। पुराने शहर में शहर दक्षिणी और उत्तरी के दर्जनों मोहल्लों और सिविल लाइंस इलाके में पानी के लिए हाहाकार मचा रहा। लोगों ने बताया घरों के नल सूखे हैं। लोग पीने और हाथ धोने के लिए पानी की व्यवस्था करने को भटकते रहे। परेशान लोगों ने जलकल अफसरों से बात की तो उन्होंने बिजली गुल होने को कारण बताकर पल्ला झाड़ लिया। वहीं विद्युत अधिकारी मुंह छिपाते घूमते रहे।
लूकरगंज के रहने वाले रेलकर्मी इंद्रजीत गुप्ता, आटा मिल के पास रहने वाले पुनीत अग्रहरि, राधेश्याम, रविंद्र आदि ने बताया कि शिकायत सुनने वाला कोई नहीं है। बेनीगंज के मुलायम सिंह बिसेन, मीरापुर की रश्मि, आरती, विवेक और शास्त्रीनगर के संजय ने बताया कि आठ बार अनुरोध के बाद भी पानी का टैंकर तक नहीं भेजा गया। लोगों को दूर-दूर से पानी ढोकर लाना पड़ा। जिन इलाकों में किसी तरह पानी के टैंकर पहुंचे वहां मारामारी मची रही। लोग पहले पानी भरने की होड़ में आपस में उलझ गए।
इन में बनी रही परेशानी, भटके लोग
जलापूर्ति बाधित रहने से पुराने शहर के चौक, शाहगंज, ऊंचामंडी, मुट्ठीगंज, बहादुरगंज, दरियाबाद, बांस मंडी, मालवीय नगर, मीरापुर, शास्त्रीनगर, करेली, करेलाबाग, हिम्मतगंज, भावापुर, कालाडांडा, भुसौली टोला, पुरुषोत्तम नगर, खुल्दाबाद, गाड़ीवान टोला, लूकरगंज का अधिकांश इलाका, सिविल लाइंस में क्लाइव रोड, एल्गिन रोड, लोहिया मार्ग, लाल बहादुर शास्त्री मार्ग, एमजी मार्ग, सरदार पटेल मार्ग, नवाब यूसुफ रोड, पीडी पार्क, पंचशील कॉलोनी के आसपास, कानपुर रोड, हाईकोर्ट कॉलोनी, मेयोहाल, कटरा, मम्मफोर्डगंज समेत दर्जनों मोहल्लों के घरों में टंकियां खाली और नल सूखे रहे। बाल्टी डिब्बा लेकर भटके लोगों की हैंडपंपों पर लाइन लगी रही। सिविल लाइंस और लूकरगंज जैसे उन मोहल्लों में थोड़ी राहत रही जहां अपार्टमेंट में खुद की बोरिंग है। निजी बोरिंग कराने वाले भी लोगों को बिजली न रहने से पानी नहीं दे सके।
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प्रभावित इलाकों में भेजे पानी के 35 टैंकर
जलकल विभाग ने प्रभावित इलाकों में पानी के 42 टैंकर भेजे। शुक्रवार को कई मोहल्लों में दो से तीन बार जगह बदलकर टैंकर खड़े कराए गए। शास्त्रीनगर, मीरापुर, शाहगंज, बेनीगंज, खुल्दाबाद समेत कई ऐसे प्रभावित इलाके रहे जहां कई बार अनुरोध के बाद भी पानी के टैंकर नहीं भेजे गए। महापौर अभिलाषा गुप्ता नंदी ने शास्त्रीनगर के लोगों की शिकायत पर वहां बृहस्पतिवार को ही पानी का टैंकर भेजने का निर्देश दिया था, लेकिन अफसरों ने अनसुनी कर लोगों को उनके हाल पर छोड़ दिया।
बोतल बंद आरओ वाटर के लिए मारामारी
जलापूर्ति ठप होने से परेशान इलाकों में आरओ वाटर की बीस लीटर की बोतल खरीदने के लिए मारामारी मची रही। लोगों को आरओ प्लांट के बाहर पानी के लिए इंतजार करना पड़ा। प्रभावित इलाकों में आरओ प्लांट चलाने वालों ने दैनिक ग्राहकों के साथ सिर्फ उन्हीं लोगों को पानी दिया, जिन्होंने बोतल के लिए 300 रुपये जमानत राशि जमा कराई। आमतौर पर 20 रुपये में 20 लीटर में मिलने वाले आरओ वाटर के लिए 30 से 50 रुपये तक वसूले गए। इसके लिए भी लोगों को मिन्नतें करनी पड़ीं।
48 घंटे बाद आई बिजली, चूहा घुसने से करेलाबाग फीडर जला
नगर आयुक्त डॉ. उज्ज्वल कुमार को जीएम जलकल रतन लाल ने जानकारी दी कि शुक्रवार रात नौ बजे करेलाबाग वाटर वर्क्स की बिजली आपूर्ति बहाल हो गई है। अफसरों की यह खुशी ज्यादा देर तक नही टिक सकी। पंप चलाने के आधे घंटे बाद ही बिजली फिर गुल हो गई। परेशान अफसरों ने पता किया तो बताया गया कि चूहा घुसने के कारण करेलाबाग फीडर जल गया। हालांकि तकनीकी खामी को दूर कर फीडर शुरू किए जाने के प्रयास देर रात तक जारी थे।
बिजली मिली तो होगी जलापूर्ति
विद्युत अधिकारियों के मुताबिक नैनी के मोहब्बतगंज में केबल फाल्ट खोजकर दुरुस्त कर लिया गया है। अब विद्युत आपूर्ति सामान्य हो जाएगी। वहीं जीएम जलकल के मुताबिक जलापूर्ति व्यवस्था बिजली पर टिकी है। रात भर बिजली मिली तो कच्चा पानी भरा जाएगा। उसे शोधित कर खुसरोबाग से मुख्य लाइन के जरिए नलकूपों तक पहुंचाया जाएगा। जलकल विभाग के अफसर और कर्मचारी तैनात हैं। बिजली मिली तो शनिवार सुबह जलापूर्ति सामान्य करने के प्रयास किए जाएंगे।
वैकल्पिक व्यवस्था करते
तो न बिगड़ते हालात
विद्युत विभाग के अफसर संसाधनों के बाद भी शहर की बिजली आपूर्ति बहाल नहीं कर पा रहे हैं। कभी लोकल फाल्ट तो कभी केबल में खराबी का बहाना बनाकर वे उपकेंद्रों और दफ्तर से गायब रहते हैं। बताया जाता है कि फील्ड में गए हैं। कभी कनेक्शन काटने तो कभी बकाया वसूलने जाने की बात कही जाती है। प्रभावित लोगों को गुस्सा इसलिए भड़का कि बिजली के साथ पानी भी नहीं मिला। जलकल अफसरों का कहना है कि विद्युत अधिकारी यदि वैकल्पिक व्यवस्था कर देते तो स्थिति इतनी खराब न होती। ज्यादा नहीं सिर्फ लाइन पलटकर करेलाबाग की लाइन कल्याणी या अन्य किसी उपकेंद्र से जोड़ देते तो वाटर वर्क्स में कच्चे पानी के टैंक भर लिए जाते।
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0 शिकायतों पर ध्यान नहीं, अफसर छिपाते रहे मुंह
प्रयागराज। शहर के साठ फीसदी आबादी शुक्रवार को तीसरे दिन भी जलापूर्ति ठप रहने से परेशान रहे। पुराने शहर में शहर दक्षिणी और उत्तरी के दर्जनों मोहल्लों और सिविल लाइंस इलाके में पानी के लिए हाहाकार मचा रहा। लोगों ने बताया घरों के नल सूखे हैं। लोग पीने और हाथ धोने के लिए पानी की व्यवस्था करने को भटकते रहे। परेशान लोगों ने जलकल अफसरों से बात की तो उन्होंने बिजली गुल होने को कारण बताकर पल्ला झाड़ लिया। वहीं विद्युत अधिकारी मुंह छिपाते घूमते रहे।
लूकरगंज के रहने वाले रेलकर्मी इंद्रजीत गुप्ता, आटा मिल के पास रहने वाले पुनीत अग्रहरि, राधेश्याम, रविंद्र आदि ने बताया कि शिकायत सुनने वाला कोई नहीं है। बेनीगंज के मुलायम सिंह बिसेन, मीरापुर की रश्मि, आरती, विवेक और शास्त्रीनगर के संजय ने बताया कि आठ बार अनुरोध के बाद भी पानी का टैंकर तक नहीं भेजा गया। लोगों को दूर-दूर से पानी ढोकर लाना पड़ा। जिन इलाकों में किसी तरह पानी के टैंकर पहुंचे वहां मारामारी मची रही। लोग पहले पानी भरने की होड़ में आपस में उलझ गए।
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जलापूर्ति बाधित रहने से पुराने शहर के चौक, शाहगंज, ऊंचामंडी, मुट्ठीगंज, बहादुरगंज, दरियाबाद, बांस मंडी, मालवीय नगर, मीरापुर, शास्त्रीनगर, करेली, करेलाबाग, हिम्मतगंज, भावापुर, कालाडांडा, भुसौली टोला, पुरुषोत्तम नगर, खुल्दाबाद, गाड़ीवान टोला, लूकरगंज का अधिकांश इलाका, सिविल लाइंस में क्लाइव रोड, एल्गिन रोड, लोहिया मार्ग, लाल बहादुर शास्त्री मार्ग, एमजी मार्ग, सरदार पटेल मार्ग, नवाब यूसुफ रोड, पीडी पार्क, पंचशील कॉलोनी के आसपास, कानपुर रोड, हाईकोर्ट कॉलोनी, मेयोहाल, कटरा, मम्मफोर्डगंज समेत दर्जनों मोहल्लों के घरों में टंकियां खाली और नल सूखे रहे। बाल्टी डिब्बा लेकर भटके लोगों की हैंडपंपों पर लाइन लगी रही। सिविल लाइंस और लूकरगंज जैसे उन मोहल्लों में थोड़ी राहत रही जहां अपार्टमेंट में खुद की बोरिंग है। निजी बोरिंग कराने वाले भी लोगों को बिजली न रहने से पानी नहीं दे सके।
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प्रभावित इलाकों में भेजे पानी के 35 टैंकर
जलकल विभाग ने प्रभावित इलाकों में पानी के 42 टैंकर भेजे। शुक्रवार को कई मोहल्लों में दो से तीन बार जगह बदलकर टैंकर खड़े कराए गए। शास्त्रीनगर, मीरापुर, शाहगंज, बेनीगंज, खुल्दाबाद समेत कई ऐसे प्रभावित इलाके रहे जहां कई बार अनुरोध के बाद भी पानी के टैंकर नहीं भेजे गए। महापौर अभिलाषा गुप्ता नंदी ने शास्त्रीनगर के लोगों की शिकायत पर वहां बृहस्पतिवार को ही पानी का टैंकर भेजने का निर्देश दिया था, लेकिन अफसरों ने अनसुनी कर लोगों को उनके हाल पर छोड़ दिया।
बोतल बंद आरओ वाटर के लिए मारामारी
जलापूर्ति ठप होने से परेशान इलाकों में आरओ वाटर की बीस लीटर की बोतल खरीदने के लिए मारामारी मची रही। लोगों को आरओ प्लांट के बाहर पानी के लिए इंतजार करना पड़ा। प्रभावित इलाकों में आरओ प्लांट चलाने वालों ने दैनिक ग्राहकों के साथ सिर्फ उन्हीं लोगों को पानी दिया, जिन्होंने बोतल के लिए 300 रुपये जमानत राशि जमा कराई। आमतौर पर 20 रुपये में 20 लीटर में मिलने वाले आरओ वाटर के लिए 30 से 50 रुपये तक वसूले गए। इसके लिए भी लोगों को मिन्नतें करनी पड़ीं।
48 घंटे बाद आई बिजली, चूहा घुसने से करेलाबाग फीडर जला
नगर आयुक्त डॉ. उज्ज्वल कुमार को जीएम जलकल रतन लाल ने जानकारी दी कि शुक्रवार रात नौ बजे करेलाबाग वाटर वर्क्स की बिजली आपूर्ति बहाल हो गई है। अफसरों की यह खुशी ज्यादा देर तक नही टिक सकी। पंप चलाने के आधे घंटे बाद ही बिजली फिर गुल हो गई। परेशान अफसरों ने पता किया तो बताया गया कि चूहा घुसने के कारण करेलाबाग फीडर जल गया। हालांकि तकनीकी खामी को दूर कर फीडर शुरू किए जाने के प्रयास देर रात तक जारी थे।
बिजली मिली तो होगी जलापूर्ति
विद्युत अधिकारियों के मुताबिक नैनी के मोहब्बतगंज में केबल फाल्ट खोजकर दुरुस्त कर लिया गया है। अब विद्युत आपूर्ति सामान्य हो जाएगी। वहीं जीएम जलकल के मुताबिक जलापूर्ति व्यवस्था बिजली पर टिकी है। रात भर बिजली मिली तो कच्चा पानी भरा जाएगा। उसे शोधित कर खुसरोबाग से मुख्य लाइन के जरिए नलकूपों तक पहुंचाया जाएगा। जलकल विभाग के अफसर और कर्मचारी तैनात हैं। बिजली मिली तो शनिवार सुबह जलापूर्ति सामान्य करने के प्रयास किए जाएंगे।
वैकल्पिक व्यवस्था करते
तो न बिगड़ते हालात
विद्युत विभाग के अफसर संसाधनों के बाद भी शहर की बिजली आपूर्ति बहाल नहीं कर पा रहे हैं। कभी लोकल फाल्ट तो कभी केबल में खराबी का बहाना बनाकर वे उपकेंद्रों और दफ्तर से गायब रहते हैं। बताया जाता है कि फील्ड में गए हैं। कभी कनेक्शन काटने तो कभी बकाया वसूलने जाने की बात कही जाती है। प्रभावित लोगों को गुस्सा इसलिए भड़का कि बिजली के साथ पानी भी नहीं मिला। जलकल अफसरों का कहना है कि विद्युत अधिकारी यदि वैकल्पिक व्यवस्था कर देते तो स्थिति इतनी खराब न होती। ज्यादा नहीं सिर्फ लाइन पलटकर करेलाबाग की लाइन कल्याणी या अन्य किसी उपकेंद्र से जोड़ देते तो वाटर वर्क्स में कच्चे पानी के टैंक भर लिए जाते।

Millions of people did not get water on the third day in Prayagraj- फोटो : CITY DESK