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एनओसी जारी करने में देरी से निगम को लाखों का चूना

Wed, 20 Jan 2016 01:45 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/इलाहाबाद
अमर उजाला ब्यूरो/इलाहाबाद Updated Wed, 20 Jan 2016 01:45 AM IST
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इलाहाबाद (ब्यूरो)। इलाहाबाद विकास प्राधिकरण (एडीए) से किसी भी तरह का नक्शा स्वीकृत करने के पहले नगर निगम से एनओसी लेना अनिवार्य है, लेकिन निगम में इसकी प्रक्रिया काफी लंबी होेने के कारण उसे हर माह लाखों रुपये की चपत लग रही है। यह आर्थिक नुकसान निगम की ओर से एनओसी जारी करने में देरी और उस पर शुद्धीकरण शुल्क न मिल पाने से हो रहा है, क्योंकि एनओसी में देरी होने पर एडीए ज्यादातर नक्शे शपथ पत्र लेकर जारी कर देता है। इसके एवज में निगम को मलबा शुल्क की रकम दे दी जाती है, जबकि निगम एनओसी जारी करने पर शुद्धीकरण शुल्क भी लेता है।

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एडीए से नक्शा स्वीकृति की प्रक्रिया पूरा होने के बाद नगर निगम ने एनओसी प्राप्त करने का नियम है। इसके लिए एडीए नक्शे की एक प्रति निगम को भेजता है। यहां से एनओसी जारी होने में हमेशा विलंब होता है। एडीए ने कई बार निगम प्रशासन को पत्र भी लिखा, लेकिन कोई नतीजा न निकलने पर करीब चार वर्ष पहले एडीए बोर्ड की बैठक में फैसला लिया गया कि नगर निगम नक्शों पर एओसी 15 दिन में नहीं देता है तो शपथ पत्र लेकर नक्शा जारी कर दिया जाएगा। एडीए से माह में तकरीबन दो सौ नक्शे स्वीकृत होते हैं। इसमें व्यावसायिक से लेकर आवासीय हर तरह के नक्शे शामिल होते हैं।

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एडीए से निगम पहुंचने के बाद नक्शा जेई से एक्सईएन और मुख्य अभियंता की टेबिलों के बीच घूमता रहता है। नियम के तहत निगम एनओसी जारी करने के पहले मौके पर जांच पड़ताल करता है। उसके बाद 13.50 रुपये प्रति वर्गमीटर की दर से मलबा शुल्क और 42 रुपये प्रति वर्गमीटर की दर से शुद्धीकरण शुल्क वसूल करता है। रकम जमा होने के बाद ही एनओसी जारी की जाती है, लेकिन यहां नक्शे की फाइल एक से दूसरे अभियंता की टेबिल पर घूमने के कारण काफी विलंब होता है। इसकी वजह से निगम को हर माल करीब आठ से दस लाख रुपये शुद्धीकरण शुल्क से हाथ धोना पड़ रहा है। नगर आयुक्त देवेंद्र कुमार पांडेय का कहना है कि एडीए शुद्धीकरण शुल्क भी अपने पास जमा करा लेता है, जबकि यह रकम नगर निगम को मिलनी चाहिए। इस पर कई बार आपत्ति की जा चुकी है। शुद्धीकरण शुल्क के लिए जल्द एडीए को पत्र लिखा जाएगा।

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