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आधी रात जश्न में डूबे प्रत्याशी, समर्थक
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Sat, 06 Oct 2018 01:44 AM IST
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इलाहाबाद
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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इलाहाबाद विश्वविद्यालय छात्रसंघ के लिए शुक्रवार को हुई मतगणना के दौरान और परिणाम की घोषणा के बाद हर तरफ जोश एवं उल्लास का माहौल रहा। केंद्रीय लाइब्रेरी गेट के सामने सुबह से ही छात्रों और समर्थकों का जमावड़ा लगा रहा। परिणाम जानने के लिए हजारों समर्थक गेट के बाहर देर रात तक डटे रहे। कई बार गेट पर तैनात सुरक्षा कर्मियों के साथ उनकी धक्कामुक्की भी हुई। रोक के बावजूद विजयी प्रत्याशियों और उनके समर्थकों ने विश्वविद्यालय के आसपास की सड़कों पर आधी रात को जुलूस निकाला और जमकर नारेबाजी की।
युवाओं की भारी भीड़ के कारण वहां तनाव का माहौल बना रहे। चप्पे-चप्पे पर सुरक्षा कर्मी तैनात रहे और मोर्चा संभाले रहे। मतदान दोपहर दो बजे समाप्त हुआ। इसके बाद मतपेटिकाएं मतगणना स्थल यानी सेंट्रल लाइब्रेरी में लाकर रख दी गईं। शाम पांच बजे से मतगणना शुरू होनी थी। मतगणना स्थल पर केवल अध्यक्ष पद के प्रत्याशियों को प्रवेश की अनुमति थी। कई प्रत्याशी समय से नहीं पहुंचे। इसकी वजह से मतगणना भी निर्धारित समय पर शुरू नहीं कराई जा सकी। सभी प्रत्याशियों के पहुंचने के बाद शाम साढ़े सात बजे मतगणना शुरू कराई गई। समय बीतने के साथ ही लाइब्रेरी गेट के बाहर छात्रों का जमावड़ा लगने लगा।
मतगणना के रुझान को लेकर उनमें काफी उत्सुकता थी। हालांकि इविवि प्रशासन पहले ही यह स्पष्ट कर चुका था कि रुझान नहीं बताया जाएगा, सीधे अंतिम परिणाम घोषित किया जाएगा। इसके बावजूद गेट के बाहर खड़े समर्थक मतगणना में शामिल शिक्षकों, कर्मचारियों और प्रत्याशियों से फोन पर संपर्क साधने की कोशिश में लगे रहे। मतगणना स्थल पर मोबाइल फोन प्रतिबंधित था, इसलिए किसी को कोई जानकारी नहीं मिली। ऐसे में मतगणना में देर होने से समर्थकों की बेचैनी और बढ़ गई। प्रत्याशी माइक की तरफ कान लगाकर परिणाम घोषित होने का इंतजार कर रहे थे।
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दूसरी ओर समर्थकों की नारेबाजी बढ़ती जा रही थी लेकिन परिणाम की घोषणा होते ही पूरे माहौल में सन्नाटा गया। खामोशी से परिणाम सुनने के बाद जश्न और नरेबाजी का दौर शुरू हो गया। विजयी प्रत्याशियों को कंधे पर उठाकर समर्थकों ने जुलूस निकालना शुरू कर दिया। जश्न का यह दौर काफी देर तक जारी रहा। समर्थकों ने मिठाई बांटी और गुलाल उड़ाए। छात्रावासों में तो रात हुई ही नहीं। परिणाम घोषित होने से कुछ देर पहले आरएएफ, पीएसी और फोर्स ने विश्वविद्यालय मार्ग पर फ्लैग मार्च किया। हॉस्टलों के बाहर लगी लाइटें बंद करा दी गईं और हर हॉस्टल के गेट पर बड़ी संख्या में पुलिस फोर्स तैनात कर दी गई।
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युवाओं की भारी भीड़ के कारण वहां तनाव का माहौल बना रहे। चप्पे-चप्पे पर सुरक्षा कर्मी तैनात रहे और मोर्चा संभाले रहे। मतदान दोपहर दो बजे समाप्त हुआ। इसके बाद मतपेटिकाएं मतगणना स्थल यानी सेंट्रल लाइब्रेरी में लाकर रख दी गईं। शाम पांच बजे से मतगणना शुरू होनी थी। मतगणना स्थल पर केवल अध्यक्ष पद के प्रत्याशियों को प्रवेश की अनुमति थी। कई प्रत्याशी समय से नहीं पहुंचे। इसकी वजह से मतगणना भी निर्धारित समय पर शुरू नहीं कराई जा सकी। सभी प्रत्याशियों के पहुंचने के बाद शाम साढ़े सात बजे मतगणना शुरू कराई गई। समय बीतने के साथ ही लाइब्रेरी गेट के बाहर छात्रों का जमावड़ा लगने लगा।
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मतगणना के रुझान को लेकर उनमें काफी उत्सुकता थी। हालांकि इविवि प्रशासन पहले ही यह स्पष्ट कर चुका था कि रुझान नहीं बताया जाएगा, सीधे अंतिम परिणाम घोषित किया जाएगा। इसके बावजूद गेट के बाहर खड़े समर्थक मतगणना में शामिल शिक्षकों, कर्मचारियों और प्रत्याशियों से फोन पर संपर्क साधने की कोशिश में लगे रहे। मतगणना स्थल पर मोबाइल फोन प्रतिबंधित था, इसलिए किसी को कोई जानकारी नहीं मिली। ऐसे में मतगणना में देर होने से समर्थकों की बेचैनी और बढ़ गई। प्रत्याशी माइक की तरफ कान लगाकर परिणाम घोषित होने का इंतजार कर रहे थे।
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दूसरी ओर समर्थकों की नारेबाजी बढ़ती जा रही थी लेकिन परिणाम की घोषणा होते ही पूरे माहौल में सन्नाटा गया। खामोशी से परिणाम सुनने के बाद जश्न और नरेबाजी का दौर शुरू हो गया। विजयी प्रत्याशियों को कंधे पर उठाकर समर्थकों ने जुलूस निकालना शुरू कर दिया। जश्न का यह दौर काफी देर तक जारी रहा। समर्थकों ने मिठाई बांटी और गुलाल उड़ाए। छात्रावासों में तो रात हुई ही नहीं। परिणाम घोषित होने से कुछ देर पहले आरएएफ, पीएसी और फोर्स ने विश्वविद्यालय मार्ग पर फ्लैग मार्च किया। हॉस्टलों के बाहर लगी लाइटें बंद करा दी गईं और हर हॉस्टल के गेट पर बड़ी संख्या में पुलिस फोर्स तैनात कर दी गई।