{"_id":"6ab594438c71e7b8ba047725","slug":"meter-installed-bill-arrived-electricity-running-along-a-wooden-pole-allahabad-news-c-407-1-mn11001-20662-2026-09-25","type":"story","status":"publish","title_hn":"Prayagraj News: मीटर लगा, बिल आया...बल्ली पर दौड़ रही बिजली","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Prayagraj News: मीटर लगा, बिल आया...बल्ली पर दौड़ रही बिजली
Fri, 25 Sep 2026 02:51 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, प्रयागराज
संवाद न्यूज एजेंसी, प्रयागराज
Updated Fri, 25 Sep 2026 02:51 AM IST
विज्ञापन
कैप्शन- मांडा के बारीपुर बस्ती में बांस-बल्ली के सहारे लटकता तार।
हाटा बिजली घर से जुड़े बारीपुर बस्ती में विभाग की व्यवस्था का अजब हाल है। घरों में मीटर हैं, बिल भी पहुंच रहे हैं, लेकिन बिजली पहुंचाने के लिए खंभे आज तक नहीं पहुंचे।
सोनबरसा ग्राम पंचायत की इस बस्ती के करीब 20 परिवार 800 मीटर से अधिक दूर लगे ट्रांसफॉर्मर से बांस-बल्ली के सहारे तार खींचकर घर रोशन कर रहे हैं। छह साल से चल रही यह अस्थायी व्यवस्था बारिश और तेज हवा में ग्रामीणों की परेशानी बढ़ा देती है।
हाटा बिजली उपकेंद्र से जुड़ी बस्ती के लोगों के अनुसार, वर्ष 2019 में विभाग से जुड़े कुछ लोग वहां पहुंचे थे। बस्ती में आपूर्ति के लिए नए पोल, तार और ट्रांसफॉर्मर लगाने का भरोसा दिया गया। इसके बाद नंदलाल आदिवासी, कुंतामणि, कमलाशंकर, विदेशी कुशवाहा और मनोज विश्वकर्मा समेत नौ घरों के मुखिया से आधार कार्ड की प्रतियां ली गईं। ग्रामीणों ने इसे बस्ती में बिजली पहुंचने की शुरुआत माना। संबंधित घरों में मीटर भी लगा दिए गए।
विज्ञापन
ग्रामीणों का आरोप है कि ग्राम पंचायत के दूसरे मजरे में ठेकेदार ने खंभे और तार पहुंचा दिए, लेकिन बारीपुर की बारी नहीं आई। कुछ समय बाद दस्तावेज जमा करने वाले परिवारों के घर बिजली के बिल पहुंचने लगे। ग्रामीणों ने तत्कालीन जेई से शिकायत की। इसके बाद दूर लगे ट्रांसफॉर्मर से बांस-बल्ली के सहारे तार खींचकर आपूर्ति शुरू कर दी गई। तब से यही व्यवस्था चल रही है।
लंबी दूरी से तार खींचे जाने के कारण आए दिन आपूर्ति में खराबी आती है। बारिश में बांस-बल्ली गलने और तेज हवा में गिरने से तार नीचे आने का खतरा बना रहता है।
ग्रामीण बालकृष्ण पांडेय ने बताया कि कागजात और मीटर लगने के बाद भी वे अस्थायी सहारे पर निर्भर हैं। ओमप्रकाश पांडेय के अनुसार, हवा और बारिश में अधिक परेशानी होती है। तार खराब होने पर ग्रामीण खुद व्यवस्था संभालते हैं, जिससे बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा पर चिंता रहती है। विदेशी कुशवाहा ने कहा कि उपभोक्ता बनने के बावजूद सुरक्षित आपूर्ति नहीं मिली। बिल समय पर आता है, पर बस्ती की समस्या वर्षों से बनी हुई है। रामकुमार कोल ने बताया कि आसपास के मजरों में बिजली के पोल हैं, पर उनकी बस्ती दूर है। वर्षों से बांस-बल्ली के सहारे आपूर्ति चल रही है, इसलिए अधिकारियों को स्थायी व्यवस्था के लिए पहल करनी चाहिए।
बस्ती की जांच कराई जाएगी। आगामी योजना में इसे शामिल कर पोल और तार लगवाकर विद्युत समस्या का समाधान कराया जाएगा।-अशोक कुमार, एसडीओ
विज्ञापन
सोनबरसा ग्राम पंचायत की इस बस्ती के करीब 20 परिवार 800 मीटर से अधिक दूर लगे ट्रांसफॉर्मर से बांस-बल्ली के सहारे तार खींचकर घर रोशन कर रहे हैं। छह साल से चल रही यह अस्थायी व्यवस्था बारिश और तेज हवा में ग्रामीणों की परेशानी बढ़ा देती है।
विज्ञापन
हाटा बिजली उपकेंद्र से जुड़ी बस्ती के लोगों के अनुसार, वर्ष 2019 में विभाग से जुड़े कुछ लोग वहां पहुंचे थे। बस्ती में आपूर्ति के लिए नए पोल, तार और ट्रांसफॉर्मर लगाने का भरोसा दिया गया। इसके बाद नंदलाल आदिवासी, कुंतामणि, कमलाशंकर, विदेशी कुशवाहा और मनोज विश्वकर्मा समेत नौ घरों के मुखिया से आधार कार्ड की प्रतियां ली गईं। ग्रामीणों ने इसे बस्ती में बिजली पहुंचने की शुरुआत माना। संबंधित घरों में मीटर भी लगा दिए गए।
विज्ञापन
ग्रामीणों का आरोप है कि ग्राम पंचायत के दूसरे मजरे में ठेकेदार ने खंभे और तार पहुंचा दिए, लेकिन बारीपुर की बारी नहीं आई। कुछ समय बाद दस्तावेज जमा करने वाले परिवारों के घर बिजली के बिल पहुंचने लगे। ग्रामीणों ने तत्कालीन जेई से शिकायत की। इसके बाद दूर लगे ट्रांसफॉर्मर से बांस-बल्ली के सहारे तार खींचकर आपूर्ति शुरू कर दी गई। तब से यही व्यवस्था चल रही है।
लंबी दूरी से तार खींचे जाने के कारण आए दिन आपूर्ति में खराबी आती है। बारिश में बांस-बल्ली गलने और तेज हवा में गिरने से तार नीचे आने का खतरा बना रहता है।
ग्रामीण बालकृष्ण पांडेय ने बताया कि कागजात और मीटर लगने के बाद भी वे अस्थायी सहारे पर निर्भर हैं। ओमप्रकाश पांडेय के अनुसार, हवा और बारिश में अधिक परेशानी होती है। तार खराब होने पर ग्रामीण खुद व्यवस्था संभालते हैं, जिससे बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा पर चिंता रहती है। विदेशी कुशवाहा ने कहा कि उपभोक्ता बनने के बावजूद सुरक्षित आपूर्ति नहीं मिली। बिल समय पर आता है, पर बस्ती की समस्या वर्षों से बनी हुई है। रामकुमार कोल ने बताया कि आसपास के मजरों में बिजली के पोल हैं, पर उनकी बस्ती दूर है। वर्षों से बांस-बल्ली के सहारे आपूर्ति चल रही है, इसलिए अधिकारियों को स्थायी व्यवस्था के लिए पहल करनी चाहिए।
बस्ती की जांच कराई जाएगी। आगामी योजना में इसे शामिल कर पोल और तार लगवाकर विद्युत समस्या का समाधान कराया जाएगा।-अशोक कुमार, एसडीओ