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High Court : कोर्ट की ईमानदारी और गरिमा पर हमला करने वाले को सिर्फ माफी से दोषमुक्त नहीं किया जा सकता
Thu, 13 Nov 2025 01:48 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Thu, 13 Nov 2025 01:48 PM IST
सार
यह आदेश न्यायमूर्ति सिद्धार्थ की पीठ ने मैनपुरी के हरिभान उर्फ मोनू उर्फ रमाकांत की जमानत अर्जी पर दिया। जमानत अर्जी में एक अधिवक्ता शिकायतकर्ता का पक्ष रख रहे थे। वह जमानत अर्जी पर स्थगन की मांग कर रहे थे। कोर्ट ने स्थगन की मांग को अस्वीकार कर दिया।
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अदालत(सांकेतिक)
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि कोर्ट की ईमानदारी और गरिमा पर हमला करने वाले को सिर्फ माफी के आधार पर दोषमुक्त नहीं किया जा सकता है। इस टिप्पणी संग कोर्ट ने एक अधिवक्ता की ओर से न्यायाधीश पर गंभीर आरोप लगाने के बाद आपराधिक अवमानना चलाने के आदेश को वापस लेने की मांग में आवेदन को खारिज कर दिया।
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यह आदेश न्यायमूर्ति सिद्धार्थ की पीठ ने मैनपुरी के हरिभान उर्फ मोनू उर्फ रमाकांत की जमानत अर्जी पर दिया। जमानत अर्जी में एक अधिवक्ता शिकायतकर्ता का पक्ष रख रहे थे। वह जमानत अर्जी पर स्थगन की मांग कर रहे थे। कोर्ट ने स्थगन की मांग को अस्वीकार कर दिया। इस पर उन्होंने अनुमति मांगी कि वह अपनी कानूनी और सांविधानिक दलीलों का लिखित कथन प्रस्तुत करना चाहते हैं। 17 मई 2025 को उन्होंने लिखित कथन दाखिल कर कोर्ट पर गंभीर आरोप लगाए।
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इस पर कोर्ट ने 28 मई 2025 को वकील के खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्यवाही शुरू करने के लिए मामले को खंडपीठ और उनके आचरण पर विचार करने के लिए बार कौंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश को संदर्भित कर दिया था। इसके बाद अधिवक्ता ने एक रिकॉल आवेदन दायर किया। उन्होंने बिना शर्त माफी मांगने के साथ-साथ अपमानजनक लिखित कथन को वापस लेने और अवमानना कार्यवाही को रद्द करने की मांग की।
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कोर्ट ने उनकी माफी को स्वीकार कर लिया पर अवमानना आदेश को वापस लेने से इन्कार कर दिया। कहा कि ऐसा करना एक खराब मिसाल बनेगी, जिससे वकील किसी प्रतिकूल निर्णय से बचने के लिए इस तरह की रणनीति अपना सकते हैं। माफी केवल सजा को कम करने के उद्देश्य से अवमानना न्यायालय के समक्ष विचार के लिए होगी, लेकिन अवमानना की कार्यवाही जारी रहेगी।