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पारे संग नमी का खेल, एसी-कूलर फेल
ब्यूरो/अमर उजाला इलाहाबाद
Updated Wed, 27 May 2015 01:33 AM IST
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इलाहाबाद ब्यूरो। पारे और आर्र्दता की जुगलबंदी ने शरीर की नमी से खेलना शुरू कर दिया है। मंगलवार पूरा दिन लोग पसीना पोछते और मौसम को कोसते नजर आए। पिछले पांच दिनोें से 45 डिग्री से ऊपर बरकरार पारा मंगलवार को बैकफुट पर नजर आया। मौसम विभाग के मुताबिक इस दिन पारा 46.4 डिग्री से घटकर 44.8 डिग्री पर जा पहुंचा। लेकिन पारे में दो डिग्री की गिरावट के बावजूद गर्मी से राहत नहीं मिली, क्योंकि आर्र्दता यानि नमी ने अपना शिकंजा कस दिया। दरअसल प्री मानसून के चलते गंगा के मैदान में पहुंचे हल्के फुल्के बादलों की वजह से बढ़ी हुई आर्द्रता ने उमस को बढ़ा दिया जिससे शहरी दिन भर शहरी बेहाल रहे।
गर्म हवाओं के साथ जबरदस्त उमस ने परेशानियों को दोगुना कर दिया। मौसम विभाग के मुताबिक मंगलवार को अधिकतम तापमान 44.8 व न्यूनतम तापमान 30.2 डिग्री दर्ज किया गया। तापमान में कमी के साथ ही आर्द्रता का स्तर बढ़ गया है। मंगलवार को अधिकतम आर्द्रता 64 फीसदी और न्यूनतम 21 फीसदी दर्ज की गई। जबकि एक दिन पूर्व अधिकतम आर्द्रता 53 और 14 फीसदी पर पहुंच गई थी। आर्द्रता में बढ़ोत्तरी सेे शहरी दिन भर पसीना पोछते और मौसम को कोसते रहे। भारी उसम का असर सुबह से ही दिखायी देने लगा था। उमस के चलते पूरे दिन भर एसी, कूलर, पंखे के नीचे कहीं भी राहत नहीं मिली।
दूसरी ओर मौसम विज्ञानियोें का मानना है कि मौसम का बदला मिजाज प्री मानसून का संकेत हैं। मौसम विज्ञानी डॉ. एसएस ओझा के मुताबिक पिछले पांच दिनों से राजस्थान से आ रही गर्म पछुवा हवाएं बंगाल की खाड़ी तक पहुंच गई हैं। इन्हीं गर्म हवाओं के दबाव ने खाड़ी में सोए मानसून का जगा दिया है। पछुवा हवाओं के दबाव के परिणामस्वरूप बंगाल की खाड़ी से चले हल्के फुल्के बादल भी आसमान में दिखायी देने लगे हैं। डॉ. ओझा का मानना है कि शीघ्र ही प्री मानसून की बूंदाबंादी हो सकती है।
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बंद कमरे का पारा बेहद खतरनाक
तेज धूप और उमस के कारण दोपहर ही नहीं, रात भी जानलेवा हो गई है। बाहरी वातावरण का तापमान पिछले कुछ दिनों से 45 से 47 डिग्री के बीच टिके रहने का नतीजा है कि कमरे के अंदर का तापमान 48 डिग्री तक पहुंच गया है। शहर में ज्यादातर मकानों में कमरे छोटे हैं और उनमें सामान ज्यादा है जिसके कारण तापमान एक डिग्री ऊपर ही है। घनी बस्तियों में तापमान अन्य मोहल्लों के मुकाबले ज्यादा मारक हो गया है। चढ़ते तापमान और बेतहाशा उमस का नतीजा है कि सुबह से ही लू का एहसास होने लगा है। सोमवार आधी रात के बाद बाहर का पारा 30 डिग्री था और गर्म हवाएं चल रही थीं। लगातार गर्मी से शरीर निचुड़ने का नतीजा है कि मंगलवार को कई लोग चक्कर खाकर सरे राह गिर पड़े।
बेजान बादलों से बना ऊष्मा द्वीप
पछुआ की तेजी के कारण ऊपरी वातावरण में बादल बने लेकिन ये बादल बारिश वाले नहीं है। उलटे इन बादलों के कारण मुसीबत बढ़ गई। उबलती धूप और बेजान सफेद बादलों के कारण गंगा पर ऊष्मा द्वीप सा बन गया है। गंगा में पानी कम है और रेत का हिस्सा काफी बढ़ गया है। पिछले एक माह से पारा 40 डिग्री के ऊपर होने के कारण रेत काफी गर्म हो गई। ऊपरी हिस्से में सफेद बादलों की पतली चादर और नीचे गर्म रेत से निकल रही ऊष्मा के कारण ऊपर द्वीप सा बन गया है। मौसम विज्ञानियों का मानना है कि जब तक पूर्व से नम हवाएं नहीं आएंगी, गर्मी का असर कम नहीं होगा।
हीट क्रैंप्स के कारण बीमारों की भीड़
हीट क्रैंप्स यानी पैर की पिंडलियों और पेट की मांसपेशियों में अकड़न। यह स्थिति तब होती है जब शरीर में पानी का अंश काफी कम हो जाता है। तेज गर्मी और भारी उमस की स्थिति में शरीर से पसीने के रूप में काफी पानी निकल जाता है। शरीर को सामान्य तौर पर जितना पानी चाहिए, इन दिनों उससे दोगुना पानी की जरूरत होती है। शरीर का सामान्य तापमान 32 डिग्री के आसपास होता है जबकि बाहरी तापमान इन दिनों 43 से 47 डिग्री के बीच है। इस तापमान से संतुलन बनाए रखने के लिए जरूरी है कि शरीर में नमक की मात्रा कम न हो। पिछले एक महीने से धूप काफी तेज है। धूप में अधिक देर तक रहने से अधिक पसीना होता है जिससे अक्सर पिंडलियों, पेट की मांसपेशियों में खिंचाव, अकड़न (हीट क्रैंप्स)हो जाती है। हीट क्रैंप्स के कारण अस्पतालों में मरीजों की भीड़ दिख रही है।
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गर्म हवाओं के साथ जबरदस्त उमस ने परेशानियों को दोगुना कर दिया। मौसम विभाग के मुताबिक मंगलवार को अधिकतम तापमान 44.8 व न्यूनतम तापमान 30.2 डिग्री दर्ज किया गया। तापमान में कमी के साथ ही आर्द्रता का स्तर बढ़ गया है। मंगलवार को अधिकतम आर्द्रता 64 फीसदी और न्यूनतम 21 फीसदी दर्ज की गई। जबकि एक दिन पूर्व अधिकतम आर्द्रता 53 और 14 फीसदी पर पहुंच गई थी। आर्द्रता में बढ़ोत्तरी सेे शहरी दिन भर पसीना पोछते और मौसम को कोसते रहे। भारी उसम का असर सुबह से ही दिखायी देने लगा था। उमस के चलते पूरे दिन भर एसी, कूलर, पंखे के नीचे कहीं भी राहत नहीं मिली।
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दूसरी ओर मौसम विज्ञानियोें का मानना है कि मौसम का बदला मिजाज प्री मानसून का संकेत हैं। मौसम विज्ञानी डॉ. एसएस ओझा के मुताबिक पिछले पांच दिनों से राजस्थान से आ रही गर्म पछुवा हवाएं बंगाल की खाड़ी तक पहुंच गई हैं। इन्हीं गर्म हवाओं के दबाव ने खाड़ी में सोए मानसून का जगा दिया है। पछुवा हवाओं के दबाव के परिणामस्वरूप बंगाल की खाड़ी से चले हल्के फुल्के बादल भी आसमान में दिखायी देने लगे हैं। डॉ. ओझा का मानना है कि शीघ्र ही प्री मानसून की बूंदाबंादी हो सकती है।
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बंद कमरे का पारा बेहद खतरनाक
तेज धूप और उमस के कारण दोपहर ही नहीं, रात भी जानलेवा हो गई है। बाहरी वातावरण का तापमान पिछले कुछ दिनों से 45 से 47 डिग्री के बीच टिके रहने का नतीजा है कि कमरे के अंदर का तापमान 48 डिग्री तक पहुंच गया है। शहर में ज्यादातर मकानों में कमरे छोटे हैं और उनमें सामान ज्यादा है जिसके कारण तापमान एक डिग्री ऊपर ही है। घनी बस्तियों में तापमान अन्य मोहल्लों के मुकाबले ज्यादा मारक हो गया है। चढ़ते तापमान और बेतहाशा उमस का नतीजा है कि सुबह से ही लू का एहसास होने लगा है। सोमवार आधी रात के बाद बाहर का पारा 30 डिग्री था और गर्म हवाएं चल रही थीं। लगातार गर्मी से शरीर निचुड़ने का नतीजा है कि मंगलवार को कई लोग चक्कर खाकर सरे राह गिर पड़े।
बेजान बादलों से बना ऊष्मा द्वीप
पछुआ की तेजी के कारण ऊपरी वातावरण में बादल बने लेकिन ये बादल बारिश वाले नहीं है। उलटे इन बादलों के कारण मुसीबत बढ़ गई। उबलती धूप और बेजान सफेद बादलों के कारण गंगा पर ऊष्मा द्वीप सा बन गया है। गंगा में पानी कम है और रेत का हिस्सा काफी बढ़ गया है। पिछले एक माह से पारा 40 डिग्री के ऊपर होने के कारण रेत काफी गर्म हो गई। ऊपरी हिस्से में सफेद बादलों की पतली चादर और नीचे गर्म रेत से निकल रही ऊष्मा के कारण ऊपर द्वीप सा बन गया है। मौसम विज्ञानियों का मानना है कि जब तक पूर्व से नम हवाएं नहीं आएंगी, गर्मी का असर कम नहीं होगा।
हीट क्रैंप्स के कारण बीमारों की भीड़
हीट क्रैंप्स यानी पैर की पिंडलियों और पेट की मांसपेशियों में अकड़न। यह स्थिति तब होती है जब शरीर में पानी का अंश काफी कम हो जाता है। तेज गर्मी और भारी उमस की स्थिति में शरीर से पसीने के रूप में काफी पानी निकल जाता है। शरीर को सामान्य तौर पर जितना पानी चाहिए, इन दिनों उससे दोगुना पानी की जरूरत होती है। शरीर का सामान्य तापमान 32 डिग्री के आसपास होता है जबकि बाहरी तापमान इन दिनों 43 से 47 डिग्री के बीच है। इस तापमान से संतुलन बनाए रखने के लिए जरूरी है कि शरीर में नमक की मात्रा कम न हो। पिछले एक महीने से धूप काफी तेज है। धूप में अधिक देर तक रहने से अधिक पसीना होता है जिससे अक्सर पिंडलियों, पेट की मांसपेशियों में खिंचाव, अकड़न (हीट क्रैंप्स)हो जाती है। हीट क्रैंप्स के कारण अस्पतालों में मरीजों की भीड़ दिख रही है।