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पुरखिनों का श्राद्ध कर सहेजा आशीष
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Wed, 07 Oct 2015 01:30 AM IST
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इलाहाबाद (ब्यूरो)। अश्विन मास कृष्णपक्ष नवमी मंगलवार को माताओं के श्राद्ध तर्पण को संगम समेत गंगा के विभिन्न तटों पर श्रद्धालुओं का तांता लगा। तीर्थ पुरोहितों की देखरेख में यजमानों द्वारा श्राद्ध के कर्मकांड पूरे किए गए। वहीं जिनकी तिथि नवमी थी, उनका भी श्राद्ध तर्पण किया गया।
ब्रह्ममुहूर्त से संगम सहित गंगा के विभिन्न तटों पर पर भी पिंडदान, तर्पण, श्राद्ध को श्रद्धालु जुटे। तीर्थपुरोहितों की देखरेख में गंगा स्नान किया गया। परंपरागत रीति से पुरखिनों ं के निमित्त पिंडदान, तर्पण और श्राद्धकर्म पूरा किया गया। सामर्थ्य एवं श्रद्धा अनुसार गोदान, वस्त्र अन्न दान किया गया और पुरखिनों का आशीष सहेजा। फूल, माला, दूध, पत्तल, जौ, तिल बेचने वाले भी घूम-घूम का सामान बेचने में व्यस्त रहे।
श्याम जी शर्मा निशान चांदी के नारियल वाले बताते हैं जिनकी माता का देहांत हो चुका है पिता जीवित हैं उनके यहां पुरखिने विदा की गईं, लेकिन जिनके माता-पिता दोनों नहीं हैं वे पितृ विसर्जन को विदाई करेंगे। विशाल शास्त्री निशान महल के अनुसार गया जाने वाले श्रद्धालुओं का प्रयाग आकर तर्पण पूजन करने का क्रम जारी है।
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ब्रह्ममुहूर्त से संगम सहित गंगा के विभिन्न तटों पर पर भी पिंडदान, तर्पण, श्राद्ध को श्रद्धालु जुटे। तीर्थपुरोहितों की देखरेख में गंगा स्नान किया गया। परंपरागत रीति से पुरखिनों ं के निमित्त पिंडदान, तर्पण और श्राद्धकर्म पूरा किया गया। सामर्थ्य एवं श्रद्धा अनुसार गोदान, वस्त्र अन्न दान किया गया और पुरखिनों का आशीष सहेजा। फूल, माला, दूध, पत्तल, जौ, तिल बेचने वाले भी घूम-घूम का सामान बेचने में व्यस्त रहे।
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श्याम जी शर्मा निशान चांदी के नारियल वाले बताते हैं जिनकी माता का देहांत हो चुका है पिता जीवित हैं उनके यहां पुरखिने विदा की गईं, लेकिन जिनके माता-पिता दोनों नहीं हैं वे पितृ विसर्जन को विदाई करेंगे। विशाल शास्त्री निशान महल के अनुसार गया जाने वाले श्रद्धालुओं का प्रयाग आकर तर्पण पूजन करने का क्रम जारी है।
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