मेजा हत्याकांड : मुनीम के बेटे को शक, 13 साल पहले जिन्होंने भाई की हत्या की, वही हो सकते हैं पिता के कातिल
शिव बहादुर सिंह सिरसा के दो गिट्टी बालू कारोबारियों के यहां मुनीम थे। उन्हें इसका 40 साल का अनुभव था। सोमवार को बाइक से घर लौटते समय अज्ञात लोगों ने धारदार हथियार से हत्या कर दी थी। इनका शव रामनगर के चुप्पेपुर नहर के पास घर से करीब 500 मीटर की दूरी पर मिला था।
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मेजा में मुनीम शिव बहादुर सिंह के बड़े बेटे अमित सिंह ने शक जताया है कि गांव के जिन लोगों ने 13 साल पहले उसके भाई की हत्या की थी, हो सकता है उन्हीं ने पिता का कत्ल किया हो। उनके मुताबिक, कत्ल में उम्रकैद की सजा पाए दो लोग जमानत पर बाहर हैं। वहीं, एसीपी मेजा विमल किशोर का कहना है कि कुछ लोगों से पूछताछ हो रही है। हत्यारोपी जल्द पकड़े जाएंगे।
शिव बहादुर सिंह सिरसा के दो गिट्टी बालू कारोबारियों के यहां मुनीम थे। उन्हें इसका 40 साल का अनुभव था। सोमवार को बाइक से घर लौटते समय अज्ञात लोगों ने धारदार हथियार से हत्या कर दी थी। इनका शव रामनगर के चुप्पेपुर नहर के पास घर से करीब 500 मीटर की दूरी पर मिला था। मुनीम के चार बेटों में सबसे बड़े अमित सिंह ने पिता की हत्या का संबंध 13 साल पहले भाई के कत्ल से होने का शक जताया है।
बुधवार को मुनीम के शव का वीडियोग्राफी के बीच दो डॉक्टरों के पैनल ने पोस्टमार्टम किया। इसमें चेहरे और गले पर आधा दर्जन घाव मिले हैं। बताते हैं कि जिस तरह के घाव हैं, उससे लगता है कि किसी मोटे धारदार हथियार से हत्या की गई है। इसमें चेहरा इतना विकृत हो गया था कि घरवाले चेहरे से पहचान तक नहीं पाए थे। उसकी पहचान कद काठी और कपड़ों से हुई थी।
भाई के कत्ल के बाद पिता ने अमित को छोटे भाई के पास बंगलुरू भेज दिया था। पिता की हत्या के बाद लौटे अमित सिंह ने शक जताया है कि भाई के कातिल ही पिता की हत्या के पीछे हो सकते हैं। उनके मुताबिक छोटे भाई अनूप सिंह की 21 नवंबर 2010 को खेत में पानी लगाने को लेकर हुए विवाद में पड़ोसी अमर सिंह, उनके बेटे दर्शन सिंह व भतीजे राहुल सिंह ने गोली मारकर हत्या कर दी थी। इसमें तीनों को उम्रकैद हुई है। मगर, राहुल व दर्शन जमानत पर बाहर हैं।
अमित बताते हैं कि भाई की हत्या के समय वह इलाहाबाद विश्वविद्यालय से बीकॉम करके शहर में ही एक कारोबारी के यहां अकांउटेंट का काम कर रहे थे। भाई की हत्या के बाद घर लौट गए। पड़ोसियों से रंजिश के डर से पिता ने उन्हें छोटे भाई संदीप सिंह के पास बंगलुरू भेज दिया। कहा, दोनों वहीं रहकर अपने बच्चाें को पढ़ाओ, गांव आने की जरूरत नहीं है। अमित वहीं पान की दुकान चलाने लगा। छोटा भाई संदीप भी वहीं रहता है।
बेटों को बचा लिया, पर खुद हो गए शिकार
अमित ने बताया कि पिता ने दोनों भाइयों को बचा लिया, लेकिन खुद रंजिश के शिकार हो गए। उनकी मौत के बाद अंधेरा ही अंधेरा है। यह कहते हुए उसकी आंखें नम हो गईं। अमित ने बताया कि उनकी पत्नी अनिता सिंह ने कई बार पिताजी से कहा था कि वह बच्चाें को गांव में रखकर पढ़ाना चाहती हैं, लेकिन वह कहते कि यहां बच्चों का भविष्य खराब हो जाएगा। तुम बच्चों को वहीं अच्छे से पढ़ाओ, घर मैं संभाल लूंगा।