फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   Matter regarding 85% cap on thesis marks reaches High Court response sought from Rajju Bhaiya University.

High Court : थीसिस के अंकों पर 85 फीसदी कैपिंग का मामला हाईकोर्ट पहुंचा, रज्जूभैया विश्वविद्यालय से मांगा जवाब

Sun, 19 Jul 2026 03:49 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sun, 19 Jul 2026 03:49 PM IST
सार

प्रोफेसर राजेन्द्र सिंह (रज्जू भैया) विश्वविद्यालय से संबद्ध एवं निजी महाविद्यालयों के विद्यार्थियों के मूल्यांकन में अपनाई गई कथित 85 प्रतिशत कैपिंग प्रणाली को इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है।

विज्ञापन
Matter regarding 85% cap on thesis marks reaches High Court response sought from Rajju Bhaiya University.
अदालत का फैसला। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

प्रोफेसर राजेन्द्र सिंह (रज्जू भैया) विश्वविद्यालय से संबद्ध एवं निजी महाविद्यालयों के विद्यार्थियों के मूल्यांकन में अपनाई गई कथित 85 प्रतिशत कैपिंग प्रणाली को इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। आरोप है कि इस व्यवस्था के कारण विद्यार्थियों के वास्तविक प्राप्तांक, ग्रेड प्वाइंट और सीजीपीए प्रभावित हो रहे हैं। हाईकोर्ट ने प्रथमदृष्टया मामले को विचारणीय मानते हुए विश्वविद्यालय से इस नीति का औचित्य स्पष्ट करने को कहा है। यह आदेश न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर की एकल पीठ ने सहर्ष सिंह की याचिका पर दिया।

विज्ञापन


याची की ओर से अधिवक्ता ने दलील दी कि सहर्ष सिंह को थीसिस मूल्यांकन में 97 अंक प्राप्त हुए थे। लेकिन विश्वविद्यालय के ऑनलाइन सिस्टम में 85 प्रतिशत से अधिक अंक दर्ज करने की सुविधा नहीं होने के कारण उसके वास्तविक अंक अपलोड नहीं किए गए। इससे उसके 36 ग्रेड प्वाइंट कम हो गए जिसके कारण एसजीपीए और सीजीपीए भी प्रभावित हुए।
विज्ञापन


विश्वविद्यालय की ओर से अधिवक्ता ने दलील दी गई कि संबद्ध महाविद्यालयों में थीसिस के लिए 85 प्रतिशत से अधिक अंक देने की अनुमति नहीं है। इस पर याची के अधिवक्ता ने दलील दी कि यह व्यवस्था केवल संबद्ध महाविद्यालयों के विद्यार्थियों पर लागू हो सकती है। जबकि वह विश्वविद्यालय का प्रत्यक्ष छात्र है। इसलिए उस पर यह सीमा लागू नहीं होनी चाहिए।
विज्ञापन
विज्ञापन


कोर्ट ने विश्वविद्यालय के अधिवक्ता को निर्देश दिया कि अगली सुनवाई पर उस एकेडमिक काउंसिल की बैठक की कार्यवाही (मिनट्स) प्रस्तुत की जाए, जिसमें यह निर्णय लिया गया था। साथ ही परिषद के सदस्यों की संख्या, उनकी योग्यता और अनुभव का विवरण भी रिकॉर्ड पर रखने का निर्देश दिया गया है। मामले की अगली सुनवाई 21 जुलाई 2026 को दोपहर 2 बजे निर्धारित की गई है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed