High Court : थीसिस के अंकों पर 85 फीसदी कैपिंग का मामला हाईकोर्ट पहुंचा, रज्जूभैया विश्वविद्यालय से मांगा जवाब
प्रोफेसर राजेन्द्र सिंह (रज्जू भैया) विश्वविद्यालय से संबद्ध एवं निजी महाविद्यालयों के विद्यार्थियों के मूल्यांकन में अपनाई गई कथित 85 प्रतिशत कैपिंग प्रणाली को इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है।
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प्रोफेसर राजेन्द्र सिंह (रज्जू भैया) विश्वविद्यालय से संबद्ध एवं निजी महाविद्यालयों के विद्यार्थियों के मूल्यांकन में अपनाई गई कथित 85 प्रतिशत कैपिंग प्रणाली को इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। आरोप है कि इस व्यवस्था के कारण विद्यार्थियों के वास्तविक प्राप्तांक, ग्रेड प्वाइंट और सीजीपीए प्रभावित हो रहे हैं। हाईकोर्ट ने प्रथमदृष्टया मामले को विचारणीय मानते हुए विश्वविद्यालय से इस नीति का औचित्य स्पष्ट करने को कहा है। यह आदेश न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर की एकल पीठ ने सहर्ष सिंह की याचिका पर दिया।
याची की ओर से अधिवक्ता ने दलील दी कि सहर्ष सिंह को थीसिस मूल्यांकन में 97 अंक प्राप्त हुए थे। लेकिन विश्वविद्यालय के ऑनलाइन सिस्टम में 85 प्रतिशत से अधिक अंक दर्ज करने की सुविधा नहीं होने के कारण उसके वास्तविक अंक अपलोड नहीं किए गए। इससे उसके 36 ग्रेड प्वाइंट कम हो गए जिसके कारण एसजीपीए और सीजीपीए भी प्रभावित हुए।
विश्वविद्यालय की ओर से अधिवक्ता ने दलील दी गई कि संबद्ध महाविद्यालयों में थीसिस के लिए 85 प्रतिशत से अधिक अंक देने की अनुमति नहीं है। इस पर याची के अधिवक्ता ने दलील दी कि यह व्यवस्था केवल संबद्ध महाविद्यालयों के विद्यार्थियों पर लागू हो सकती है। जबकि वह विश्वविद्यालय का प्रत्यक्ष छात्र है। इसलिए उस पर यह सीमा लागू नहीं होनी चाहिए।
कोर्ट ने विश्वविद्यालय के अधिवक्ता को निर्देश दिया कि अगली सुनवाई पर उस एकेडमिक काउंसिल की बैठक की कार्यवाही (मिनट्स) प्रस्तुत की जाए, जिसमें यह निर्णय लिया गया था। साथ ही परिषद के सदस्यों की संख्या, उनकी योग्यता और अनुभव का विवरण भी रिकॉर्ड पर रखने का निर्देश दिया गया है। मामले की अगली सुनवाई 21 जुलाई 2026 को दोपहर 2 बजे निर्धारित की गई है।