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सीएमपी ने तय की परास्नातक पाठ्यक्रमों की फीस
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Wed, 03 Aug 2016 02:17 AM IST
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इलाहाबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय की परास्नातक प्रवेश परीक्षा (पीजीएटी) का परिणाम घोषित होने के साथ संघटक कालेजों में भी दाखिले की प्रक्रिया शुरू हो गई है। सीएमपी डिग्री कालेज में परास्नातक पाठ्यक्रमों की फीस भी निर्धारित कर दी गई है। सबसे कम एमए की चार हजार तथा सबसे अधिक एमएससी की 10 हजार रुपये प्रति सेमेस्टर फीस रखी गई है। हालांकि सभी कालेजों में एक समान फीस रखने की योजना है। इस मकसद से सात अगस्त को सभी कालेजों के गवर्निंग बॉडी के चेयरमैन और प्राचार्यों की बैठक बुलाई गई है। इसमें सीएमपी में तय फीस स्ट्रक्चर को रखा जाएगा।
विश्वविद्यालय की ओर से कालेजाें में इसी साल से परास्नातक पाठ्यक्रम शुरू करने की अनुमति दी गई है, लेकिन इसके लिए कालेजों को खुद संसाधन जुटाने होंगे। यानी, सेल्फ फाइनेंस के अंतर्गत परास्नातक कोर्सेज शुरू होंगे। इस वजह से कालेजों को फीस निर्धारण की छूट दी गई है। इसी के अंतर्गत सीएमपी में इस साल बॉटनी, केमेस्ट्री, जूलॉजी विषयों में एमएससी, एमकॉम तथा प्राचीन इतिहास, शिक्षाशास्त्र, हिन्दी और संस्कृत में एमए कोर्स शुरू करने का निर्णय लिया गया है।
एमए में चार हजार प्रति सेमेस्टर यानी, आठ हजार रुपये हर साल फीस निर्धारित की गई है। एमकॉम में पांच हजार और एलएलएम में छह हजार रुपये प्रति सेमेस्टर फीस तय की गई है। एमएससी में 10 हजार रुपये प्रति सेमेस्टर फीस रखी गई है। यह फीस यूइंग क्रिश्चियन कालेज से काफी कम है। प्राचार्यों की बैठक में सहमति बनी तो यही फीस अन्य कालेजों में भी रखी जाएगी। संघटक कालेज अध्यापक संघ के अध्यक्ष डॉ.सुनील कांत मिश्रा का कहना है कि छात्र-छात्राओं की स्थिति को ध्यान में रखकर सीएमपी में न्यूनतम फीस रखी गई है। अन्य कालेजों को भी इसका ध्यान रखना चाहिए। विश्वविद्यालय के संघटक कालेजों को निजी संस्थानों की तरह अधिक फीस लेने से बचना चाहिए।
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इलाहाबाद विश्वविद्यालय के अलावा संघटक कालेजों में भी परास्नातक प्रवेश परीक्षा (पीजीएटी) के आधार पर प्रवेश होगा। कालेजों को परास्नातक कोर्स की अनुमति देने की बाबत गठित कमेटी ने पहले साल प्रवेश परीक्षा से बाहर जाकर भी दाखिले की छूट देने की संस्तुति की थी, लेकिन विश्वविद्यालय प्रशासन ने इसकी अनुमति नहीं दी। रजिस्ट्रार की ओर से जारी आदेश में स्पष्ट कहा गया है कि पीजीएटी में शामिल विद्यार्थी ही कालेजों में दाखिला पा सकेंगे। हालांकि विश्वविद्यालय प्रशासन के इस आदेश से ईतर कई कालेजों ने पीजीएटी में शामिल विद्यार्थियों के अलावा अलग से भी आवेदन मांगा है।
आर्य कन्या डिग्री कालेज में भी एमए की फीस निर्धारित कर दी गई है। वहां भी चार हजार रुपये प्रति सेमेस्टर फीस ली जाएगी। प्राचार्य डॉ.उर्मिला श्रीवास्तव ने बताया कि कालेज को समाजशास्त्र, संस्कृत, संगीत-गायन और राजनीतिशास्त्र विषय में एमए कोर्स को मंजूरी दी गई है।
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विश्वविद्यालय की ओर से कालेजाें में इसी साल से परास्नातक पाठ्यक्रम शुरू करने की अनुमति दी गई है, लेकिन इसके लिए कालेजों को खुद संसाधन जुटाने होंगे। यानी, सेल्फ फाइनेंस के अंतर्गत परास्नातक कोर्सेज शुरू होंगे। इस वजह से कालेजों को फीस निर्धारण की छूट दी गई है। इसी के अंतर्गत सीएमपी में इस साल बॉटनी, केमेस्ट्री, जूलॉजी विषयों में एमएससी, एमकॉम तथा प्राचीन इतिहास, शिक्षाशास्त्र, हिन्दी और संस्कृत में एमए कोर्स शुरू करने का निर्णय लिया गया है।
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एमए में चार हजार प्रति सेमेस्टर यानी, आठ हजार रुपये हर साल फीस निर्धारित की गई है। एमकॉम में पांच हजार और एलएलएम में छह हजार रुपये प्रति सेमेस्टर फीस तय की गई है। एमएससी में 10 हजार रुपये प्रति सेमेस्टर फीस रखी गई है। यह फीस यूइंग क्रिश्चियन कालेज से काफी कम है। प्राचार्यों की बैठक में सहमति बनी तो यही फीस अन्य कालेजों में भी रखी जाएगी। संघटक कालेज अध्यापक संघ के अध्यक्ष डॉ.सुनील कांत मिश्रा का कहना है कि छात्र-छात्राओं की स्थिति को ध्यान में रखकर सीएमपी में न्यूनतम फीस रखी गई है। अन्य कालेजों को भी इसका ध्यान रखना चाहिए। विश्वविद्यालय के संघटक कालेजों को निजी संस्थानों की तरह अधिक फीस लेने से बचना चाहिए।
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इलाहाबाद विश्वविद्यालय के अलावा संघटक कालेजों में भी परास्नातक प्रवेश परीक्षा (पीजीएटी) के आधार पर प्रवेश होगा। कालेजों को परास्नातक कोर्स की अनुमति देने की बाबत गठित कमेटी ने पहले साल प्रवेश परीक्षा से बाहर जाकर भी दाखिले की छूट देने की संस्तुति की थी, लेकिन विश्वविद्यालय प्रशासन ने इसकी अनुमति नहीं दी। रजिस्ट्रार की ओर से जारी आदेश में स्पष्ट कहा गया है कि पीजीएटी में शामिल विद्यार्थी ही कालेजों में दाखिला पा सकेंगे। हालांकि विश्वविद्यालय प्रशासन के इस आदेश से ईतर कई कालेजों ने पीजीएटी में शामिल विद्यार्थियों के अलावा अलग से भी आवेदन मांगा है।
आर्य कन्या डिग्री कालेज में भी एमए की फीस निर्धारित कर दी गई है। वहां भी चार हजार रुपये प्रति सेमेस्टर फीस ली जाएगी। प्राचार्य डॉ.उर्मिला श्रीवास्तव ने बताया कि कालेज को समाजशास्त्र, संस्कृत, संगीत-गायन और राजनीतिशास्त्र विषय में एमए कोर्स को मंजूरी दी गई है।