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कुलपति के खिलाफ किया सामूहिक उपवास

Wed, 03 Oct 2018 01:01 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद Updated Wed, 03 Oct 2018 01:01 AM IST
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Mass fasting against Vice Chancellor
इलाहाबाद
विवादों में घिरे इविवि कुलपति प्रो. रतन लाल हांगलू के खिलाफ जारी आंदोलन तेजी पकड़ता जा रहा है। मंगलवार को गांधी जयंती पर छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्षों ने कुलपति के खिलाफ सामूहिक उपवास किया और इसमें न केवल छात्र, बल्कि सामाजिक और कर्मचारी संगठन के लोग भी शामिल हुए। अधिवक्ताओं ने भी इस आंदोलन को समर्थन देने की घोषणा की। सामूहिक उपवास इस संकल्प के साथ समाप्त हुआ कि कुलपति को किसी भी कीमत पर विश्वविद्यालय में प्रवेश नहीं करने दिया जाएगा।
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वायरल व्हाट्सएप चैट और कॉल रिकार्डिंग के विवाद में घिरे कुलपति पर भ्रष्टाचार एवं पद के दुरुपयोग के भी कई आरोप लगे हैं। छात्रों की ओर से शुरू किए गए इस आंदोलन में अब कई संगठन भी शामिल हो गए हैं। गांधी जयंती पर छात्रों के क्रमिक अनशन स्थल पर पहुंचकर छात्रसंघ के पूर्व पदाधिकारियों, निवर्तमान पदाधिकारियों समेत कर्मचारियों, सामाजिक संगठनों के लोगों ने सामूहिक उपवास में भागीदारी की। इसमें पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष विनोद चंद्र दुबे, कृष्णमूर्ति सिंह यादव, इंदू प्रकाश सिंह, दिनेश यादव, ऋचा सिंह, रोहित मिश्र, निवर्तमान अध्यक्ष अवनीश यादव, महामंत्री निर्भय द्विवेदी, पूर्व उपाध्यक्ष आरपीएन सिंह, विक्रांत सिंह, डॉ. पद्मा सिंह, रेनू कुमारी, ऑटा के पूर्व पदाधिकारी हौसला प्रसाद तिवारी, आरके सिंह, छात्र नेता नीरज प्रताप सिंह, रजनीश सिंह रिशू आदि मौजूद रहे। इस मौक पर संकल्प लिया गया कि कुलपति को विश्वविद्यालय से वापस भेजेंगे और उनकी बर्खास्तगी तक आंदोलन जारी रहेगा।
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ऑटा के पूर्व पदाधिकारियों ने भेजा समर्थन पत्र
कुलपति के खिलाफ सामूहिक उपवास पर बैठे छात्रसंघ के पूर्व पदाधिकारियों को ऑटा के पूर्व पदाधिकारियों की ओर से समर्थन पत्र भेजा गया। पूर्व अध्यक्ष ऋचा सिंह ने बताया कि ऑटा के पूर्व पदाधिकारियों ने आंदोलन को अपना समर्थन दिया है और इससे आंदोलन को मजबूती मिलेगी।
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पुराछात्र अधिवक्ताओं ने भी किया कुलपति का विरोध
इविवि के पुराछात्र जो अब अधिवक्ता हैं, उन्होंने भी कुलपति के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। अधिवक्ताओं का कहना है कि कुलपति का पद गरिमा का पद है। पुराछात्र होने के नाते हम किसी भी कीमत पर इविवि को दूषित नहीं होने देंगे। अधिवक्ताओं ने मांग की है कि इस मुद्दे पर कुलपति को सीधे सामने आकर अपना स्पष्टीकरण देना चाहिए। अगर 48 घंटे में उनका बयान नहीं आता है तो पुराछात्र अपना मत बनाने के लिए स्वतंत्र होंगे। बैठक की अध्यक्षता हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के ज्वाइंट सेक्रेटरी (प्रेस) संतोष कुमार सिंह ‘बब्लू’ ने की। इसमें आरपीएन सिंह, बृजेश कुमार सिंह, रमेश चंद्र यादव, मनोज कुमार, ओम प्रकाश गुप्ता, विकास चंद्र श्रीवास्तव, अनुराग सिंह, आनंद विक्रम परिहार, प्रमोद कुमार मौर्या, शारदा गुरु, पंकज सिंह, राघवेंद्र तिवारी आदि उपस्थित रहे।
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