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High Court : बालिग होने से पहले वैवाहिक रिश्ते गैरकानूनी, नाबालिग मां को पति संग रहने की छूट से इन्कार

Sun, 19 Oct 2025 02:52 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sun, 19 Oct 2025 02:52 PM IST
सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि बालिग होने से पहले वैवाहिक रिश्ते गैरकानूनी हैं। कानून नाबालिग मां को पति संग रहने की इजाजत नहीं दे देता, भले ही उनका विवाह सहमति से हुआ हो।

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Marital relationship before attaining adulthood illegal, minor mother denied permission live with husband
Allahabad High Court - फोटो : एएनआई

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि बालिग होने से पहले वैवाहिक रिश्ते गैरकानूनी हैं। कानून नाबालिग मां को पति संग रहने की इजाजत नहीं दे देता, भले ही उनका विवाह सहमति से हुआ हो।इस टिप्पणी संग न्यायमूर्ति जेजे मुनीर और न्यायमूर्ति संजीव कुमार की खंडपीठ ने कानपुर देहात निवासी नाबालिग की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका रद्द कर दी। लड़की और उसके दो माह के बच्चे को कानपुर नगर स्थित सरकारी आश्रय गृह भेजने का आदेश दिया। कोर्ट ने कहा कि नाबालिग पत्नी बालिग होने तक पति संग नहीं रह सकती। ऐसा करना पॉक्सो के तहत अपराध होगा।

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मामला एक 17 वर्षीय लड़की का है, जिसने युवक से विवाह करने का दावा किया था और वह दो महीने के शिशु की मां है। लड़की मायके नहीं लौटना चाहती थी और पति के साथ रहने की अनुमति मांगी थी। कोर्ट ने यह कहते हुए अनुमति देने से इन्कार कर दिया। कहा कि नाबालिग की इच्छा भले कुछ भी हो, वह तब तक पति के साथ नहीं रह सकती जब तक कि वह 18 वर्ष की न हो जाए।
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कोर्ट ने लड़की, उसके शिशु को सरकारी आश्रय गृह भेजने का आदेश दिया, ताकि उनकी सुरक्षा और स्वास्थ्य का उचित ध्यान रखा जा सके। साथ ही जिला प्रशासन को निर्देश दिया गया कि लड़की को नियमित चिकित्सीय सुविधा, पोषण और शिक्षा उपलब्ध कराई जाए। कोर्ट ने लड़की के ससुराल पक्ष को मुलाकात की सीमित अनुमति दी पर खाने या किसी प्रकार की वस्तु देने पर रोक लगा दी।
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कानून भावनाओं पर नहीं, तथ्यों पर चलता है। जब तक लड़की वयस्क नहीं हो जाती, उसके किसी भी प्रकार के सहवास या विवाह को मान्यता नहीं दी जा सकती। - इलाहाबाद हाईकोर्ट

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