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Prayagraj News: देवी मंदिरों में गूंजेंगे मंत्र, सजेगा मां का दरबार
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मां ललिता देवी
- फोटो : shiv tripathi
शारदीय नवरात्र पर संगमनगरी नौ दिनों तक शक्ति की आराधना में डूब जाएगी। 11 अक्तूबर से मां कल्याणी देवी, मां ललिता देवी, अलोपी देवी, कटरा कालीथान और कालीबाड़ी मुठ्ठीगंज समेत प्रमुख देवी मंदिरों में विशेष अनुष्ठान शुरू होंगे। मंदिरों में साफ-सफाई, रंगाई-पुताई और विद्युत सजावट का काम अंतिम चरण में है। मंदिरों में दर्शन-पूजन की तैयारी भी की जा रही है।
पंडित श्याम जी पाठक के अनुसार, शक्तिपीठ मां कल्याणी देवी मंदिर में 11 अक्तूबर को चित्रा नक्षत्र में सुबह 6:13 बजे के बाद घटस्थापना होगी। नित्य सुबह 5:15 बजे मंगला आरती के बाद दोपहर दो बजे तक दर्शन होंगे। शाम छह बजे से रात 12 बजे तक शृंगार दर्शन होंगे। सुबह आठ से 11 और शाम चार से सात बजे तक शतचंडी पाठ, अखंड ज्योति, नवर्ण मंत्र जाप, हवन व अभिषेक होगा। मां के नौ स्वरूपों के विशेष दर्शन भी होंगे।
वहीं, मां ललिता देवी मंदिर के अध्यक्ष हरिमोहन वर्मा के अनुसार, 11 ब्राह्मण दुर्गा सप्तशती का पाठ करेंगे। रात में 21 ब्राह्मणों के सानिध्य में शतचंडी महायज्ञ कराया जाएगा। मीडिया प्रभारी सुमित श्रीवास्तव के अनुसार, मंदिर के चांदी के दरबार की सफाई वाराणसी से आए कारीगर कर रहे हैं।
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ऐसे करें घटस्थापना
शिवकुटी के पंडित हेमंत शुक्ला बताते हैं कि पूजा स्थल की सफाई कर गंगाजल छिड़कें। मिट्टी के पात्र में जौ बोएं। कलश में जल, गंगाजल, सुपारी, सिक्का और अक्षत डालकर मौली बांधें और स्वास्तिक बनाएं। आम के पत्ते लगाकर ऊपर लाल कपड़े में लिपटा नारियल रखें। गणेश पूजन के बाद मां दुर्गा का आह्वान कर दीप प्रज्ज्वलित करें और दुर्गा सप्तशती, चालीसा अथवा मंत्र जाप करें। नौ दिनों तक सात्विकता और संयम के साथ आराधना के बाद अष्टमी-नवमी पर कन्या पूजन किया जाएगा। नौ दिन तक व्रत रहने वाले दसवीं के दिन पारण करेंगे।
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पंडित श्याम जी पाठक के अनुसार, शक्तिपीठ मां कल्याणी देवी मंदिर में 11 अक्तूबर को चित्रा नक्षत्र में सुबह 6:13 बजे के बाद घटस्थापना होगी। नित्य सुबह 5:15 बजे मंगला आरती के बाद दोपहर दो बजे तक दर्शन होंगे। शाम छह बजे से रात 12 बजे तक शृंगार दर्शन होंगे। सुबह आठ से 11 और शाम चार से सात बजे तक शतचंडी पाठ, अखंड ज्योति, नवर्ण मंत्र जाप, हवन व अभिषेक होगा। मां के नौ स्वरूपों के विशेष दर्शन भी होंगे।
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वहीं, मां ललिता देवी मंदिर के अध्यक्ष हरिमोहन वर्मा के अनुसार, 11 ब्राह्मण दुर्गा सप्तशती का पाठ करेंगे। रात में 21 ब्राह्मणों के सानिध्य में शतचंडी महायज्ञ कराया जाएगा। मीडिया प्रभारी सुमित श्रीवास्तव के अनुसार, मंदिर के चांदी के दरबार की सफाई वाराणसी से आए कारीगर कर रहे हैं।
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ऐसे करें घटस्थापना
शिवकुटी के पंडित हेमंत शुक्ला बताते हैं कि पूजा स्थल की सफाई कर गंगाजल छिड़कें। मिट्टी के पात्र में जौ बोएं। कलश में जल, गंगाजल, सुपारी, सिक्का और अक्षत डालकर मौली बांधें और स्वास्तिक बनाएं। आम के पत्ते लगाकर ऊपर लाल कपड़े में लिपटा नारियल रखें। गणेश पूजन के बाद मां दुर्गा का आह्वान कर दीप प्रज्ज्वलित करें और दुर्गा सप्तशती, चालीसा अथवा मंत्र जाप करें। नौ दिनों तक सात्विकता और संयम के साथ आराधना के बाद अष्टमी-नवमी पर कन्या पूजन किया जाएगा। नौ दिन तक व्रत रहने वाले दसवीं के दिन पारण करेंगे।

मां ललिता देवी- फोटो : shiv tripathi