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डीएम के गोद लिए गांव में मिले चार अतिकुपोषित, 14 कुपोषित बच्चे
अमर उजाला ब्यूरो, प्रतापगढ़
Updated Thu, 05 Apr 2018 11:08 PM IST
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डीएम के गोद लिए गांव में चार अतिकुपोषित और 14 कुपोषित बच्चे मिले हैं। वहीं स्वास्थ्य विभाग की ओर से गांव में आयरन व नैपकीन का वितरण भी नहीं किया जा रहा था। इससे खफा डीएम ने जहां सीएमओ को जमकर फटकार लगाई, वहीं पंचायत भवन की पेंटिंग और सफाई न होने पर ग्राम पंचायत अधिकारी की क्लास ली।
कुपोषण मुक्त ग्राम योजना के अंतर्गत अपने गोद लिए गांव सदर विकास खंड के बड़नपुर में आरोग्य शिविर लगवाने के लिए डीएम ने सीएमओ को आदेश दिया था। सीएमओ डा. एससीएल द्विवेदी गुरुवार को टीम के साथ सुबह आठ बजे ही बड़नपुर गांव पहुंच गए। शिविर का उद्घाटन जिलाधिकारी ने किया। शिविर में आए 118 बच्चों का वजन कराया गया।
इस दौरान पता चला कि चार बच्चे हिमांशु, रिंकी, दीपिका व प्रिंस अतिकुपोषित हैं। डीएम ने चारों बच्चों को जिला अस्पताल में भर्ती करवाने के लिए सीएमओ को निर्देश दिया। वहीं 14 बच्चे कुपोषित मिले। इनका भी इलाज कराने के साथ ही इनके परिजनों को खानपान पर ध्यान देने के लिए सीएमओ ने कहा। जिलाधिकारी ने शिविर में आए लोगों से आयरन की गोली व नैपकीन वितरण के बारे में जानकारी मांगी तो सबने मिलने से इनकार कर दिया। इतना सुनते ही जिलाधिकारी शंभु कुमार झल्ला गए।
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उन्होंने सीएमओ एससीएल द्विवेदी को फटकार लगानी शुरू कर दी। पंचायत भवन की जांच के दौरान पता चला कि न तो रंगाई-पुताई हुई है और न ही साफ-सफाई की जाती है। इस पर डीएम ने ग्राम पंचायत अधिकारी की क्लास लगानी शुरू कर दी। डीएम के तेवर से वहां मौजूद डीपीएम राजशेखर, ग्राम प्रधान, एएनएम, शाशिकांत पांडेय, जिला कार्यक्रम अधिकारी संतोष कुमार श्रीवास्तव सहमे रहे।
गांव में जांच होती तो खुल जाती विकास की कलई
जिलाधिकारी शंभु कुमार यदि अपने गोद लिए गांव बड़नपुर का एक बार निरीक्षण करते तो तमाम खामियां मिलतीं। ग्रामीणों की तमाम शिकायतें भी उन्हें सुननी पड़तीं। हालांकि डीएम के गांव के निरीक्षण नहीं करने पर अफसरों ने राहत की सांस ली। शिविर में आए लोगों ने बताया कि ज्यादातर लोगों के दरवाजे तक जाने के लिए कोई मार्ग नहीं है। नालियां चोक हो गई हैं। सफाई कर्मचारी नालियों की कभी सफाई नहीं करता है। वह पंचायत भवन व प्राथमिक विद्यालय की सफाई करने के बाद लौट जाता है। वहीं ज्यादातर ग्रामीणों के दरवाजे पर बने शौचालयों में उपली व कंडे रखे हुए हैं। गांव के लोग आज भी खुले में शौच जाते हैं। जबकि गांव को ओडीएफ घोषित कर दिया गया है।
डीएम के सामने मुंह बंद रखने के लिए ने ग्रामीणों को खिलाई मिठाई
डीएम के सामने अपनी पोल खुलने से बचने के लिए अफसरों ने सारे इंतजाम कर रखे थे। ग्रामीणों को मुंह बंद रखने के लिए मिठाई खिलाई गई। बावजूद इसके ग्रामीणों ने डीएम के सामने पोल खोल कर रख दी।
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कुपोषण मुक्त ग्राम योजना के अंतर्गत अपने गोद लिए गांव सदर विकास खंड के बड़नपुर में आरोग्य शिविर लगवाने के लिए डीएम ने सीएमओ को आदेश दिया था। सीएमओ डा. एससीएल द्विवेदी गुरुवार को टीम के साथ सुबह आठ बजे ही बड़नपुर गांव पहुंच गए। शिविर का उद्घाटन जिलाधिकारी ने किया। शिविर में आए 118 बच्चों का वजन कराया गया।
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इस दौरान पता चला कि चार बच्चे हिमांशु, रिंकी, दीपिका व प्रिंस अतिकुपोषित हैं। डीएम ने चारों बच्चों को जिला अस्पताल में भर्ती करवाने के लिए सीएमओ को निर्देश दिया। वहीं 14 बच्चे कुपोषित मिले। इनका भी इलाज कराने के साथ ही इनके परिजनों को खानपान पर ध्यान देने के लिए सीएमओ ने कहा। जिलाधिकारी ने शिविर में आए लोगों से आयरन की गोली व नैपकीन वितरण के बारे में जानकारी मांगी तो सबने मिलने से इनकार कर दिया। इतना सुनते ही जिलाधिकारी शंभु कुमार झल्ला गए।
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उन्होंने सीएमओ एससीएल द्विवेदी को फटकार लगानी शुरू कर दी। पंचायत भवन की जांच के दौरान पता चला कि न तो रंगाई-पुताई हुई है और न ही साफ-सफाई की जाती है। इस पर डीएम ने ग्राम पंचायत अधिकारी की क्लास लगानी शुरू कर दी। डीएम के तेवर से वहां मौजूद डीपीएम राजशेखर, ग्राम प्रधान, एएनएम, शाशिकांत पांडेय, जिला कार्यक्रम अधिकारी संतोष कुमार श्रीवास्तव सहमे रहे।
गांव में जांच होती तो खुल जाती विकास की कलई
जिलाधिकारी शंभु कुमार यदि अपने गोद लिए गांव बड़नपुर का एक बार निरीक्षण करते तो तमाम खामियां मिलतीं। ग्रामीणों की तमाम शिकायतें भी उन्हें सुननी पड़तीं। हालांकि डीएम के गांव के निरीक्षण नहीं करने पर अफसरों ने राहत की सांस ली। शिविर में आए लोगों ने बताया कि ज्यादातर लोगों के दरवाजे तक जाने के लिए कोई मार्ग नहीं है। नालियां चोक हो गई हैं। सफाई कर्मचारी नालियों की कभी सफाई नहीं करता है। वह पंचायत भवन व प्राथमिक विद्यालय की सफाई करने के बाद लौट जाता है। वहीं ज्यादातर ग्रामीणों के दरवाजे पर बने शौचालयों में उपली व कंडे रखे हुए हैं। गांव के लोग आज भी खुले में शौच जाते हैं। जबकि गांव को ओडीएफ घोषित कर दिया गया है।
डीएम के सामने मुंह बंद रखने के लिए ने ग्रामीणों को खिलाई मिठाई
डीएम के सामने अपनी पोल खुलने से बचने के लिए अफसरों ने सारे इंतजाम कर रखे थे। ग्रामीणों को मुंह बंद रखने के लिए मिठाई खिलाई गई। बावजूद इसके ग्रामीणों ने डीएम के सामने पोल खोल कर रख दी।