Mahakumbh Stampede: अपनों का हाल जानने के लिए बेताब हो गए लोग, हादसे की जानकारी होते ही घनघनाने लगे फोन
हादसे की सूचना पर देश, विदेश से आए लोगों के परिवार वाले परेशान हो उठे। उनके फोन घनघनाने लगे। नेटवर्क की वजह से जिनकी बात नहीं हो पाई वह अनहोनी की आशंका में परेशान हो उठे।
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हादसे की सूचना पर देश, विदेश से आए लोगों के परिवार वाले परेशान हो उठे। उनके फोन घनघनाने लगे। नेटवर्क की वजह से जिनकी बात नहीं हो पाई वह अनहोनी की आशंका में परेशान हो उठे। हादसा संगम नोज पर एक हिस्से में हुआ। वहां मौजूद अधिकांश लोगों को इसकी जानकारी नहीं हो पाई।
रात तीन बजे के बाद यह खबर धीरे-धीरे सोशल मीडिया पर चलने लगी। सुबह तक स्नान करने आए लोगों के परिवार वाले परेशान हो गए। बंगलूरू से आईं आरती ने बताया कि उनका मोबाइल चार्ज नहीं होने से ऑफ हो गया था। ऐसे में उनके परिवार वाले परेशान हो गए। साथ आए लोगों के पास फोन से बात हुई तो उनकी चिंता दूर हुई।
कुशीनगर के उमेश सिंह का कहना है कि वह संगम स्नान कर रहे थे, उसी दौरान उनके पिता ने पांच बार फोन किया। जब उन्होंने फोन किया तो घर वालों की चिंता दूर हुई। उनके साथ आए तीन लोगों के बारे में कोई जानकारी नहीं मिल पा रही है। मऊ की मीना देवी ने कहा कि उनके साथ आए कई लोगों का पता नहीं लग पा रहा है। जौनपुर, मुंबई सहित कई स्थानों के श्रद्धालुओं के साथ आए लोग उनकी तलाश में जुटे हैं।
एक गांव के चार लोगों ने गंवाई जान
बलिया जिले के नगरा के चचया गांव से 13 लोग स्नान करने आए थे। इसमें दो महिलाएं रिंकी सिंह पत्नी छोटू सिंह और मीरा सिंह पत्नी बलजीत सिंह की मौत हो गई। जबकि, बलजीत सिंह व संजय सिंह घायल हो गए। छोटू सिंह ने घटना की सूचना गांव के लाल बहादुर को दी। इसके अलावा फेफना थाना के नसीराबाद गांव निवासी रीना देवी उनकी बेटी रोशनी पटेल की दबने से मौत हो गई। रीना के पति दिनेश पटेल ने गांव के लोगों को जानकारी दी तो पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई।
बांधे एक-दूसरे का हाथ ताकि न छूटे साथ
संगम की रेती पर साथ आए लोग बिछड़ न हो जाएं, इसलिए दूरदराज के गांवों से आए श्रद्धालु भीड़ के बीच छड़ी, पेड़ की टहनी, लकड़ी में बोतल बांधकर या लाल कपड़े के निशान लहराते हुए चल रहे थे। इसके अलावा साथ बनाए रखने के लिए किसी ने एक-दूसरे का हाथ रस्सी से बांध लिया था तो कोई कपड़ों में गांठ बांध कर चल रहा था। मौनी अमावस्या पर राजस्थान से आईं सीता देवी एक लकड़ी के डंडे में बोतल बांध के चल रही थीं।
उन्होंने बताया, गांव से 18 लोग के एक साथ आए हैं। इसमें महिलाएं और बुजुर्ग भी हैं। दिल्ली से आईं मुस्कान यादव और सुनीता यादव ने रस्सी से एक-दूसरे का हाथ बांधा था। बताया कि पिछली बार मेले में बिछड़ गई थी। काफी देर के बाद खोया-पाया केंद्र पर मिली थी। इस बार तय किया कि एक-दूसरे का हाथ नहीं छोड़ेंगे। खचाखच भरे रास्तों पर चलने वालों में ऐसे नजारे आम थे।