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Mahakumbh: त्रिवेणी के संगम पर होगा डेढ़ लाख करोड़ के अर्थ का महाकुंभ, काशी, विंध्याचल, अयोध्या तक होगा प्रवाह

Sun, 26 Jan 2025 05:20 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, महाकुंभ नगर (प्रयागराज)
अमर उजाला नेटवर्क, महाकुंभ नगर (प्रयागराज) Published by: विनोद सिंह Updated Sun, 26 Jan 2025 05:20 AM IST
सार

महाकुंभ आस्था के संगम के साथ ही सांस्कृतिक व धार्मिक अर्थशास्त्र का नया इतिहास लिखेगा। महाकुंभ प्रयागराज के साथ ही पूरे प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई राह दिखाएगा।

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Mahakumbh: Mahakumbh worth Rs 1.5 lakh crore will be held at the confluence of Triveni
महाकुंभ 2025 - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

महाकुंभ आस्था के संगम के साथ ही सांस्कृतिक व धार्मिक अर्थशास्त्र का नया इतिहास लिखेगा। महाकुंभ प्रयागराज के साथ ही पूरे प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई राह दिखाएगा। इससे प्रयागराज और आसपास के क्षेत्रों में साठ हजार करोड़ से डेढ़ लाख करोड़ तक की आर्थिक गतिविधियां होंगी। वहीं सरकार की सात हजार करोड़ खर्च करके 60 हजार करोड़ से अधिक की आय होने की संभावनाएं हैं। प्रयागराज के साथ ही अर्थ का पलट प्रवाह काशी, विंध्याचल और अयोध्या में भी होगा।

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महाकुंभ के दौरान बीएचयू के महाविद्यालय डीएवी पीजी कॉलेज के अर्थशास्त्र विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. अनूप कुमार मिश्र ने महाकुंभ की अर्थव्यवस्था का अध्ययन किया। इस अध्ययन के अनुसार औसतन एक व्यक्ति साढ़े सात से 10 हजार रुपये तक खर्च करता है। इसमें दैनिक खर्च एक हजार से 15 सौ रुपये के बीच है। इसमें से 60-70 फीसदी धार्मिक और आध्यात्मिक कारणों से आते हैं, जबकि एक छोटा हिस्सा सांस्कृतिक अनुभव और पर्यटन के लिए आता है।

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18 से 30 साल के श्रद्धालुओं की संख्या सबसे अधिक

महाकुंभ में आने वाले श्रद्धालुओं में सबसे अधिक संख्या 18-30 वर्ष और 31-50 वर्ष आयु वर्ग के लोग शामिल हैं। आंकड़ों के अनुसार लगभग 40-50 फीसदी लोग बार-बार आने वाले होते हैं। महाकुंभ का स्थानीय व्यवसायों पर सकारात्मक पड़ रहा है। लगभग 70 फीसदी श्रद्धालु धार्मिक वस्तुएं और स्थानीय भोजन खरीदते हैं। स्थानीय विक्रेताओं के अनुसार उनकी कुल आय का 51-75 फीसदी महाकुंभ के दौरान आता है। प्रो. मिश्र ने बताया कि लगभग 40 करोड़ श्रद्धालुओं के आगमन का अनुमान है। इनमें से 20 करोड़ से अधिक लोग औसतन तीन हजार प्रति व्यक्ति खर्च कर सकते हैं। इस अनुमान के अनुसार डेढ़ लाख करोड़ की आर्थिक गतिविधि उत्पन्न होने की संभावना है।

तीन दिनों तक पांच-पांच सौ श्रद्धालुओं से पूछे गए सवाल

तीन दिनों तक रोजाना पांच-पांच सौ श्रद्धालुओं से प्रश्न पूछे गए। प्रश्नावली में जनसांख्यिकी, यात्रा उद्देश्य, खर्च, अनुभव एवं संतुष्टि और सांस्कृतिक एवं धार्मिक विश्वास से जुड़े विषयों को शामिल किया गया। इसको 10 प्रतिभागियों के साथ पायलट परीक्षण के बाद अंतिम रूप दिया गया। इस अध्ययन के लिए मात्रात्मक क्रास सेक्शनल सर्वेक्षण दृष्टिकोण अपनाया गया। तीन आयु वर्ग (18-30 वर्ष, 31-50 वर्ष, 51-70 वर्ष, 71 वर्ष से अधिक) के श्रद्धालुओं का अध्ययन किया गया। एकत्र आंकड़ों का विश्लेषण सरल सांख्यिकीय उपकरणों और आर्थिक मॉडलों का उपयोग करके किया गया।

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राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था पर होगा प्रभाव

महाकुंभ के दौरान अनुमानित साठ हजार करोड़ का धन प्रवाह स्थानीय और राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था पर व्यापक प्रभाव डालेगा। यह धनराशि विभिन्न क्षेत्रों में निवेश और व्यय के माध्यम से रिपल इफेक्ट उत्पन्न करेगी, जिससे आर्थिक गतिविधियां और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। होटल, लॉज, गेस्ट हाउस और अस्थायी आवासों की मांग में जबरदस्त वृद्धि होगी, जिससे राजस्व में बढ़ोतरी होगी। सार्वजनिक (ट्रेन, बसें) और निजी (टैक्सी, ऑटो-रिक्शा) परिवहन सेवाओं का उपयोग बढ़ेगा। लाखों श्रद्धालुओं की उपस्थिति के कारण स्ट्रीट फूड विक्रेताओं, रेस्तरां और पैकेज्ड फूड व्यवसायों को लाभ होगा। धार्मिक वस्तुएं, स्मृति चिन्ह, और परिधान बेचने वाले स्थानीय दुकानदारों को बेहतर लाभ मिलेगा।

अर्थ प्रवाह
 

आतिथ्य क्षेत्र : 18,000 करोड़

परिवहन क्षेत्र : 12,000 करोड़

खाद्य एवं पेय पदार्थ 15,000 करोड़

खुदरा और अन्य क्षेत्र: 15,000 करोड़
 

आध्यात्मिक पर्यटन को मजबूत करेगा महाकुंभ
 

महाकुंभ के दौरान अस्थायी रूप से कार्यरत लोगों की आय में वृद्धि होगी, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था में अधिक नकदी प्रवाह होगा। सड़क, सफाई और सार्वजनिक परिवहन सेवाओं में सुधार दीर्घकालिक रूप से स्थानीय लोगों और पर्यटकों के लिए लाभदायक सिद्ध होगा। आयोजन के दौरान और बाद में संपत्ति और किराए की मांग में वृद्धि हो सकती है।
 

वाराणसी को मिलेगा फ्री राइडर लाभ
 

महाकुंभ के आयोजन का प्रभाव न केवल प्रयागराज तक सीमित है, बल्कि वाराणसी विंध्याचल और अयोध्या जैसे आसपास के धार्मिक स्थलों को भी इससे लाभ होगा। शहर की अर्थव्यवस्था को कोई अतिरिक्त खर्च किए बिना 15 हजार करोड़ तक का आर्थिक लाभ होगा। भारत के आध्यात्मिक पर्यटन को वैश्विक स्तर पर मजबूती मिलेगी जिससे भविष्य में विदेशी निवेश और पर्यटकों की संख्या में वृद्धि होगी।

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