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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   Mahakumbh: Construction of a three thousand meter long new channel to balance the flow of Ganga

Mahakumbh : गंगा की धारा में संतुलन के लिए तीन हजार मीटर लंबे नए चैनल का निर्माण, ड्रेजिंग का कार्य जोरों पर

Mon, 01 Jul 2024 12:58 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Mon, 01 Jul 2024 12:58 PM IST
सार

गंगा की मध्य तलहटी में 2700 मीटर लंबे चैनल का निर्माण अंतिम दौर में है। कटान रोकने और धारा में एकरूपता बनाए रखने के लिए गंगा में महीने भर से ड्रेजिंग चल रही है। करीब 25 मीटर चौड़ा चैनल ओल्ड रेल ब्रिज से संगम में मिलाया जाएगा।

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Mahakumbh: Construction of a three thousand meter long new channel to balance the flow of Ganga
संगम पर ड्रेजिंग का कार्य जोरों पर। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

महाकुंभ में संगम की तरफ बसावट के लिए अच्छी भूमि की उपलब्धता और कटान के खतरों से बचाव के लिए गंगा की धारा में एकरूपता लाने की दिशा में प्रयास शुरू कर दिए गए हैं। इसके लिए तलहटी में ड्रेजिंग कराकर सिल्ट हटाई जा रही है। बीच गंगा में 27 सौ मीटर लंबा नया चैनल बनाया जा रहा है। ताकि, आने वाले समय में गंगा का प्रवाह उसी चैनल से होकर संगम में मिल सके। मेला प्रशासन की यह योजना सफल रही तो महाकुंभ में संगम अपर, संगम लोवर और त्रिवेणी, काली मार्गों पर बसावट के लिए पर्याप्त समतल भूमि मिल सकेगी।

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गंगा की मध्य तलहटी में 2700 मीटर लंबे चैनल का निर्माण अंतिम दौर में है। कटान रोकने और धारा में एकरूपता बनाए रखने के लिए गंगा में महीने भर से ड्रेजिंग चल रही है। करीब 25 मीटर चौड़ा चैनल ओल्ड रेल ब्रिज से संगम में मिलाया जाएगा। हाल के वर्षों में देखा गया है कि गंगा के बदलते प्रवाह की वजह से दाहिनी तरफ कटान होती रही है।
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दाहिनी तरफ कटान की वजह से पिछले माघ मेले में त्रिवेणी मार्ग, काली मार्ग के अलावा संगम नोज से सैकड़ों संस्थाओं को विस्थापित होना पड़ था। इसके अलावा रामानुज मार्ग का निर्माण भी नहीं हो सका था। इससे सबक लेते हुए गंगा में ड्रेजिंग कराई जा रही है। ताकि प्रवाह अलग-अलग धाराओं में न बंटने पाए और नए चैनल से गंगा को संगम में मिला दिया जाए, ताकि महाकुंभ की बसावट में दिक्कतें न आने पाएं। यह जिम्मेदारी सिंचाई विभाग को दी गई है।

जेसीबी और पोकलौंड की मदद से नए चैनल के लिए ड्रेजिंग कराई जा रही है। मेला प्रशासन की योजना है कि गंगा में पूर्व दिशा की ओर यानी झूंसी की तरफ खुदाई कर दी जाए तो महाकुंभ के दौरान धारा झूंसी की तरफ खिसक जाएगी। इससे शहर की तरफ संगम नोज और उससे लगे तटों, मार्गों पर मेला बसाने के लिए ज्यादा जगह मिल जाएगी। ड्रेजिंग के लिए पोकलैंड का प्रतिदिन का खर्च दो से तीन लाख रुपये आ रहा है। गंगा से बालू खोदकर वहीं पर भंडारित भी किया जा रहा है। इससे बीच तलहटी में जगह-जगह रेत के टीले बन गए हैं।

बारिश से गंगा में नए चैनल का काम बाधित, खोदी गई बालू बहने से दिक्कत

मानसून सक्रिय होने के साथ ही बारिश शुरू हो गई है। रविवार की शाम संगम क्षेत्र में तेज बारिश की वजह से ड्रेजिंग का काम प्रभावित हो गया। इससे मशीनों को खड़ा करना पड़ा। साथ ही पानी भरने से रेत बहकर चैनल में पटने लगी। कहा जा रहा है कि बाढ़ आने पर बालू फिर नदी में मिल जाएगी। इससे धारा बदलना आसान नहीं होगा।

साथ ही इस पर करोड़ों रुपये खर्च होंगे अलग से। कहा जा रहा है कि हाल में ही शासन स्तर पर गंगा में ड्रेजिंग के लिए मना भी किया था। कहा गया गया था कि बारिश और बाढ़ आने पर बालू बह जाएगी तो इसका कोई फायदा नहीं मिल पाएगा। इसके बावजूद सिंचाई विभाग ड्रेजिंग करवा रहा है। यह भी कहा जा रहा है कि बालू अगर वहां से दूर रखवाई जाए तो कुछ राहत मिल सकती है। इस काम की कंसल्टेंसी के लिए आईआईटी गुवाहाटी की टीम भी लगाई गई है।

छोटे-छोटे चैनलों में पाटी जाएगी खोदी गई बालू

दाहिनी तरफ कटान रोकने और धारा को संतुलित तरीके से संगम तल ले जाने के लिए ड्रेजिंग कराई जा रही है। जो बालू निकाली गई है उसे अब दूसरे कटान वाले हिस्सों या फिर छोटी-छोटी धाराओं में पाट दिया जाएगा। सिंचाई विभाग के सहायक अभियंता दिनेश त्रिपाठी के मुताबिक इससे दूसरे चैनल बंद भी हो जाएंगे और बालू वहां से हट जाएगी।

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