महाकुंभ : तीन बार निकला पांटून पुल का विज्ञापन, 30 में से 11 के हुए टेंडर, पिछड़ सकती है मेले की तैयारी
4,000 हेक्टेयर में मेला बसाने के लिए 30 पांटून पुल बनाने की योजना है। इन पुलों के निर्माण पर 17.31 करोड़ रुपये का खर्च होगा। इसकी टेंडर प्रक्रिया 20 जून से शुरू हो गई थी। नाै अगस्त को इसकी तकनीकी निविदा खोली गई तो किसी भी पुल के लिए आवेदन नहीं आए थे। एक भी टेंडर न आने के कारण 12 से 17 अगस्त तक फिर से टेंडर निकाला गया।
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महाकुंभ मेले के लिए सबसे पहले पांटून पुलों का निर्माण होता है। उसके बाद अन्य कार्य शुरू होते हैं। लेकिन, अब तक सभी पांटून पुलों की टेंडर प्रक्रिया ही पूरी नहीं हो पाई है। तीन बार विज्ञापन निकालने के बाद 11 पुलों के लिए एक-एक टेंडर आए हैं। अब उन्हीं को टेंडर देकर लोक निर्माण विभाग का सीडी-4 डिवीजन काम शुरू करवाने की तैयारी में है। पुलों का काम अगले महीने पूरा नहीं हुआ तो मेला की तैयारी पिछड़ जाएगी।
4,000 हेक्टेयर में मेला बसाने के लिए 30 पांटून पुल बनाने की योजना है। इन पुलों के निर्माण पर 17.31 करोड़ रुपये का खर्च होगा। इसकी टेंडर प्रक्रिया 20 जून से शुरू हो गई थी। नाै अगस्त को इसकी तकनीकी निविदा खोली गई तो किसी भी पुल के लिए आवेदन नहीं आए थे। एक भी टेंडर न आने के कारण 12 से 17 अगस्त तक फिर से टेंडर निकाला गया। उसमें भी किसी ने आवेदन नहीं किया तो तत्काल तीसरी बार टेंडर के लिए आवेदन मांगे गए। पूर्व में जो ठेकेदार इस काम को करते थे, वह ठेका लेने को तैयार नहीं हो रहे हैं।
तीसरी बार भी यह टेंडर खाली न चला जाए। इसलिए अफसरों ने दूसरों जिलों से ठेकेदार बुलवाए। बड़ी मशक्कत के बाद 30 में से 11 पुलों के लिए एक-एक टेंडर पड़े। सात सितंबर को टेंडर खुला तो आवेदन करने वाले तीन प्रयागराज और आठ दूसरे जिलों के हैं। अन्य पुलों के निर्माण के लिए ठेकेदार तैयार नहीं हो रहे हैं। पीडब्ल्यूडी के अधिशासी अभियंता सुरेंद सिंह ने बताया कि टेंडर प्रक्रिया जल्द पूरी करवाने के लिए प्रयासरत हैं।
पिछले कुंभ में 18 अक्तूबर तक बन गए थे दो पुल
कुंभ 2019 में 22 पांटून पुलों का निर्माण हुआ था। टेंडर की प्रक्रिया अगस्त में पूरी हो गई थी। इसलिए 18 अक्तूबर तक दो पुल तैयार हो गए थे। पुल बनने के बाद अन्य कार्यों के लिए सामग्री उस पार जाने लगती है। इस बार अब तक टेंडर प्रक्रिया ही पूरी नहीं हुई है। ऐसे में मेला बसावट में देरी होगी।
30 दिन में होगा एक पुल का निर्माण
एक पुल के निर्माण 30 दिन का समय लगता है। निर्माण के बाद पुलों का रख-रखाव साढ़े तीन महीने तक करना होगा। अब तक टेंडर प्रक्रिया पूरी हो जाती तो अन्य कार्य शुरू हो जाते। माघ मेलों में दिसंबर तक पुल बनाते रहते हैं लेकिन महाकुंभ में पुल निर्माण अक्तूबर या नवंबर तक पूरा करना होगा।
इन स्थलों पर बनने हैं पुल
अक्षयवट दक्षिणी पांटून 57 लाख रुपये में और उत्तरी 39 लाख रुपये में बनेगा। महावीर दक्षिण 61 लाख में और उत्तरी 42 लाख में, जगदीश रैंप 57 लाख में, त्रिवेणी दक्षिणी 41 लाख, मध्य 68 और उत्तरी 39 लाख में बनेगा। काली दक्षिणी 44 लाख, मध्य 68 लाख और दक्षिणी 46 लाख में, मोरी 55 लाख, गंगोली शिवाला 49 लाख, ओल्ड जीटी दक्षिणी 28 लाख, उत्तरी 53 लाख, हरिश्चंद्र 62 लाख में बनेगा। सबसे महंगा नागवासुकी पुल 1.13 करोड़ रुपये में बनेगा।
भरद्वाज पुल 88 लाख, अनंत माधव (गंगेश्वर) 89 लाख, फाफामऊ दक्षिणी 62 लाख, उत्तरी 37 लाख, चक्रमाधव 73 लाख में बनेगा। अरैली से झूंसी के लिए दो पुल बनेंगे। इन पर 59 लाख और 53 लाख रुपये खर्च आएगा। इसके अलावा 64 लाख, 54 लाख, 54 लाख, 62 लाख, 62 लाख और 55 लाख रुपये के पांच अतिरिक्त पुल बनेंगे। इनकी जगह अब तक निर्धारित नहीं हुई है।