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mahakumbh 2025: टैटूनुमा चिप मेले में श्रद्धालुओं और साधु-संतों की सेहत का रखेगी ध्यान, पहली बार होगा इस्तेमाल
Sat, 11 Jan 2025 06:27 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Sat, 11 Jan 2025 06:27 AM IST
सार
इसके माध्यम से लोगों के बीपी, हृदय गति और ऑक्सीजन के स्तर को परखा जाएगा। इसके लिए लोगों को अस्पताल जाने की आवश्यकता नहीं है, बल्कि वह जहां भी होंगे उनके स्वास्थ्य पर आसानी से नजर रखी जा सकेगी।
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- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
मेले में आने वाले श्रद्धालुओं और साधु-संतों की सेहत का ख्याल एक छोटी सी टैटू नुमा चिप रखेगी। इसके माध्यम से लोगों के बीपी, हृदय गति और ऑक्सीजन के स्तर को परखा जाएगा। इसके लिए लोगों को अस्पताल जाने की आवश्यकता नहीं है, बल्कि वह जहां भी होंगे उनके स्वास्थ्य पर आसानी से नजर रखी जा सकेगी। इस अमेरिकी तकनीक का रायबरेली एम्स की टीम मेले में इस्तेमाल करेगी। यह सुविधा श्रद्धालुओं और साधु-संतों के लिए निशुल्क रखी गई है।
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सेक्टर-20 स्थित 25 बेड के उप केंद्रीय अस्पताल में रायबरेली एम्स के चिकित्सकों की टीम 10 बेड के आईसीयू वार्ड की निगरानी कर रही है। एम्स के चिकित्सकों ने मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य लाभ देने के लिए इस तकनीक का इस्तेमाल किया है। इस पद्धति को टेलीमेडिसिन कहा जाता है।
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इसमें एक टैटू के अंदर माइक्रोचिप होती है। चिप को मरीज के हृदय के ऊपर चिपका दिया जाता है। इसे इंटरनेट के माध्यम से अस्पताल के एआई सिस्टम से जोड़ दिया जाता है। ऐसे में मरीज के पास इंटरनेट की सुविधा को होना जरूरी है। इसके जरिये डॉक्टरों के पास चिप के माध्यम से मरीज की हृदय गति, बीपी व ऑक्सीजन लेवल की रिपोर्ट लगातार आती रहती है। ऐसे में चिकित्सक जब चाहे मरीज की वर्तमान स्थिति का आंकलन कर सकते हैं।
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यह अमेरिकी पद्धति है, जिसमें मरीज के शरीर में टैटू की तरह चिप लगा दी जाती है। इसके माध्यम से मरीज की ईसीजी, बीपी की जांच व ऑक्सीजन स्तर किसी भी समय देख सकते हैं। इसके अलावा इमरजेंसी में चिप की तरफ से अलर्ट सिग्नल भी सिस्टम पर भेजा जाता है।
- डॉ. सुयस, सुपरिटेंडेंट, रायबरेली एम्स
इतना ही नहीं, अगर मरीज की हालत जरा भी गड़बड़ाती है, तो चिप के माध्यम से चिकित्सकों के सिस्टम पर अलार्म बजने लगता है। जिससे पता चल जाता है, कि मरीज की हालात ठीक नहीं है। ऐसे में डॉक्टरों का एक दल मौके पर मरीज का हाल जानने पहुंचेगा और जरूरत पड़ने पर उसे अस्पताल में भर्ती किया जाएगा। रायबरेली एम्स के सुपरिटेंडेंट डॉ. सुयस का कहना है कि रायबरेली में लगभग 100 मरीजों को स्वास्थ्य लाभ दिया जा चुका है। प्रयागराज में इस विधि का इस्तेमाल पहली बार हो रहा है।