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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   Magh Mela: With Trijata bathing, farewell of saints and Kalpavas from the sand of Sangam

माघ मेला : त्रिजटा स्नान के साथ संगम की रेती से संतों-कल्पवासियों की विदाई

Sat, 19 Feb 2022 12:34 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sat, 19 Feb 2022 12:34 AM IST
सार

संगम पर शुक्रवार की भोर में ही त्रिजटा स्नान की डुबकी लगने लगी। स्नान के साथ ही बड़ी तादाद में श्रद्धालुओं ने अन्न, वस्त्र का दान किया। कहीं रेती पर समूहबद्ध महिलाओं के गीत गूंजते रहे, तो कहीं दीपदान होता रहा। सुबह से ही आरपार की मालाएं भी चढ़ाई जाने लगीं।

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Magh Mela: With Trijata bathing, farewell of saints and Kalpavas from the sand of Sangam
Prayagraj News : माघी पूर्णिमा पर संगम तट उमड़ी भीड़। - फोटो : प्रयागराज

विस्तार

फाल्गुन कृष्ण पक्ष की तृतीया पर शुक्रवार को संगम की रेती पर त्रिजटा स्नान के साथ संतों-कल्पवासियों ने माघ मेले से विदा ले ली। माघी पूर्णिमा के तीसरे दिन संगम के अलावा गंगा के अन्य तटों पर त्रिजटा स्नान के लिए संतों-भक्तों की भीड़ लगी रही। शिविरों में संतों-कल्पवासियों की विदाई दिन भर होती रही। इसी के साथ तंबुओं का नगर खाली होने लगा है। महाशिवरात्रि स्नान के साथ माघ मेले का समापन होगा।

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संगम पर शुक्रवार की भोर में ही त्रिजटा स्नान की डुबकी लगने लगी। स्नान के साथ ही बड़ी तादाद में श्रद्धालुओं ने अन्न, वस्त्र का दान किया। कहीं रेती पर समूहबद्ध महिलाओं के गीत गूंजते रहे, तो कहीं दीपदान होता रहा। सुबह से ही आरपार की मालाएं भी चढ़ाई जाने लगीं। मां गंगा की पूजा करने के बाद दीपदान और फिर पांटून पुलों पर आरपार की माला चढ़ाई जाती रही।  
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इसके साथ ही शिविरों को खाली किया जाने लगा। कई शिविर समेट लिए गए। हालांकि अभी कुछ संतों के शिविर शिवरात्रि तक रहेंगे। इस वजह से मेला क्षेत्र के सेक्टर एक व दो में चहल-पहल बनी रहेगी।

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Magh Mela: With Trijata bathing, farewell of saints and Kalpavas from the sand of Sangam
Prayagraj News : स्नान के बाद भगवान सूर्य को जल चढ़ाया गया। - फोटो : प्रयागराज

त्रिजटा स्नान का है विशेष महात्म्य
मान्यता है कि माघ मेला में प्रवास करने वालों के लिए त्रिजटा स्नान विशेष फलदायी होता है। प्रयागवाल सभा के अध्यक्ष डॉ. प्रकाश चंद्र मिश्र के मुताबिक जो लोग महीने भर संगम में माघ की डुबकी नहीं लगा पाते, वो इस तिथि पर स्नान कर पूरे महीने भर के कल्पवास का फल एक दिन में ही अर्जित कर लेते हैं।



इसी मान्यता को ध्यान में रखकर लोगों ने त्रिजटा स्नान किया। संगम क्षेत्र में रुके संत-महात्मा त्रिजटा स्नान के साथ ही अपने आश्रम की ओर रवाना हो गए। हालांकि मेले का औपचारिक समापन शिवरात्रि के आखिरी स्नान पर्व के बाद होगा। त्रिजटा स्नान के साथ ही महीने भर के कल्पवास और स्नान, ध्यान का आस्थावानों ने दिन भर पुण्य बटोरा।

Magh Mela: With Trijata bathing, farewell of saints and Kalpavas from the sand of Sangam
Prayagraj News : माघ मेला। - फोटो : प्रयागराज

साधु-संतों ने लगाई त्रिजटा स्नान पर्व की डुबकी
संगम पर त्रिजटा स्नान के साथ ही माघ मेले में आए संत-कल्पवासी शुक्रवार को विदा हो गए। इसमें स्वामी रामतीर्थ दास महराज, स्वामी हरिचैतन्य ब्रह्मचारी, स्वामी प्रभाकर महराज, स्वामी विद्या चैतन्य, स्वामी रामेश्वर दास,  मणिराम छावनी,  स्वामी विधिभूषण दास, राधा आध्यात्मिक सत्संग की डॉ. राधाचार्या, कथावाचक साध्वी राधिका वैष्णव, स्वामी मधुसूदन, आचार्य हर्ष चैतन्य, मार्कंडेय सिंह मुन्ना सहित अन्य प्रमुख संतों ने  शिष्यों के साथ संगम पर स्नान किया।  महावीर मार्ग के रामानंद अ मार्ग पर लगे बालानंदाचार्य नगर में कथावाचिका साध्वी राधिका वैष्णव ने शिष्यों को विदा देते हुए सत्संग करने के लिए प्रेरित किया।

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