माघ मेला : माघी पूर्णिमा पर दुर्लभ नक्षत्र में लगेगी पुण्य की डुबकी, जानें कब तक है शुभ मुहुर्त
बुधवार की सुबह 9:42 बजे से रात 10:55 बजे तक माघ पूर्णिमा स्नान, दान का मुहूर्त है। ज्योतिषाचार्य पं. ब्रजेंद्र मिश्र के अनुसार माघ पूर्णिमा पर कर्क राशि में चंद्रमा और आश्लेषा नक्षत्र की युति से शोभन योग बन रहा है।
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माघी पूर्णिमा बुधवार को आश्लेषा नक्षत्र में शुभ फलदायी होगी। इस बार पूर्णिमा पर सूर्य जहां कुंभ राशि में होंगे, वहीं चंद्रमा कर्क राशि में गोचर करेंगे। आश्लेषा नक्षत्र में सूर्य और चंद्रमा की युति से शोभन योग बनेगा। ऐसे में संगम में स्नान का फल तो कई गुना अधिक होगा ही, इस डुबकी और दान से महालक्ष्मी को भी प्रसन्न किया जा सकेगा। इससे सुख-समृद्धि की प्राप्ति हो सकेगी। माघी पूर्णिमा पर इस बार सुख-समृद्धि का प्रदाता शोभन योग श्रद्धालुओं के लिए विशेष फलदायी होगा।
बुधवार की सुबह 9:42 बजे से रात 10:55 बजे तक माघ पूर्णिमा स्नान, दान का मुहूर्त है। ज्योतिषाचार्य पं. ब्रजेंद्र मिश्र के अनुसार माघ पूर्णिमा पर कर्क राशि में चंद्रमा और आश्लेषा नक्षत्र की युति से शोभन योग बन रहा है। यह योग किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत के लिए सर्वोत्तम माना होगा। हालांकि इस दिन दोपहर 12 :35 बजे से 1:59 बजे तक राहुकाल होने की वजह से इस अवधि में शुभ कार्य करने से बचा जाना चाहिए।
माघी पूर्णिमा पर संगम पर वास करते हैं भगवान विष्णु
पौराणिक मान्यता के अनुसार माघ पूर्णिमा पर भगवान वेणी माधव यानी विष्णु संगम पर वास करते हैं। इसलिए इस दिन सगम स्नान का महत्व और भी बढ़ जाता है। इस दिन रेती पर महीने भर चलने वाले कल्पवास का भी समापन होगा। ऐसे में शिविरों में माघ पूर्णिमा के दिन कथाओं के अलावा यज्ञ और आहुतियों से मंगल की कामना की जाएगी। कल्पवासी माघ पूर्णिमा पर मां गंगा की पूजा, आरती कर साधु- संतों को अन्न-वस्त्र का दान भी करेंगे।