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पुण्य की डुबकी, आस्था का राग, गौरवान्वित हुआ प्रयाग
ब्यूरो/अमर उजाला, इलाहाबाद
Updated Wed, 14 Jan 2015 11:27 PM IST
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माघ मेले के दूसरे स्नानपर्व मकर संक्राति पर बुधवार को ठंड और कोहरे के बावजूद आस्था भारी रही और लाखों श्रद्धालुओं ने संगम सहित गंगा और यमुना के विभिन्न घाटों पर डुबकी लगाई। सुबह जबर्दस्त ठंड और कोहरे से ढके संगम क्षेत्र में ज्यादातर कल्पवासी ही डुबकी लगाने के लिए पहुंचते रहे। कोहरे से सुबह नावों का संचालन भी बाधित रहा लेकिन तकरीबन नौ बजे के बाद जैसे-जैसे मौसम साफ होता गया, स्नानार्थियों की संख्या भी बढ़ती गई। स्नान का क्रम देर शाम तक जारी रहा। प्रशासन ने 25 लाख श्रद्धालुओं के स्नान करने का दावा किया है।
संगम सहित गंगा और यमुना पट्टी में स्नानार्थियों का तांता लगा, वहीं गंगा-यमुना के दोनों किनारों पर कल्पवासियों ने अलग-अलग स्नानघाटों पर डुबकी लगाई। स्नान के बाद पहले जल में ही खड़े होकर सूर्य को अर्घ्य दिया, नदी किनारे पूजा अर्चना की। गंगापुत्र घाटियों के यहां तिलक-चंदन लगवाया और फिर घाटियों, तीर्थपुरोहितों के यहां खिचड़ी, तिल, गुड़ आदि का यथाशक्ति दान दिया। गोदान के लिए भी श्रद्धालुओं ने आस्था जताई।
संगम क्षेत्र में ही कतार से तीर्थपुरोहितों के तख्त लगे, जहां लोगों ने स्नान के बाद अन्य कर्मकांड भी पूरे किए। घाट की सुरक्षा की जिम्मेदारी पुलिस के अतिरिक्त आरएएफ और एटीएस के हवाले रही। संगम क्षेत्र सहित गंगा और यमुना पट्टी में बैरीकेडिंग की गई थी। जल पुलिस के जवान भी श्रद्धालुओं को गहरे पानी में न आने देने के लिए चेतावनी देते रहे। महिलाओं के कपड़े बदलने को संगम क्षेत्र में चेंजिंग रूम बने थे। कल्पवासियों और बाहर से आई टोलियों ने समूह में स्नान किया और फिर मंगलगीत गाते हुए अपने शिविरों, ठिकानों की ओर लौटीं। जाते समय श्रद्धालु संगम की रेती का प्रसाद ले जाना नहीं भूले।
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ज्योतिर्विदों के मुताबिक सूर्य का मकर राशि में प्रवेश 14 जनवरी को रात 1.20 बजे हुआ। संक्रांति का पुण्यकाल बृहस्पतिवार को सूर्योदय से लेकर शाम 4.03 बजे तक रहेगा। इसी काल में शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद, स्वामी वासुदेवानंद, स्वामी नरेंद्रानंद, स्वामी अधोक्षजानंद सहित अनेक संत, श्रद्धालु डुबकी लगाएंगे।
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संगम सहित गंगा और यमुना पट्टी में स्नानार्थियों का तांता लगा, वहीं गंगा-यमुना के दोनों किनारों पर कल्पवासियों ने अलग-अलग स्नानघाटों पर डुबकी लगाई। स्नान के बाद पहले जल में ही खड़े होकर सूर्य को अर्घ्य दिया, नदी किनारे पूजा अर्चना की। गंगापुत्र घाटियों के यहां तिलक-चंदन लगवाया और फिर घाटियों, तीर्थपुरोहितों के यहां खिचड़ी, तिल, गुड़ आदि का यथाशक्ति दान दिया। गोदान के लिए भी श्रद्धालुओं ने आस्था जताई।
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संगम क्षेत्र में ही कतार से तीर्थपुरोहितों के तख्त लगे, जहां लोगों ने स्नान के बाद अन्य कर्मकांड भी पूरे किए। घाट की सुरक्षा की जिम्मेदारी पुलिस के अतिरिक्त आरएएफ और एटीएस के हवाले रही। संगम क्षेत्र सहित गंगा और यमुना पट्टी में बैरीकेडिंग की गई थी। जल पुलिस के जवान भी श्रद्धालुओं को गहरे पानी में न आने देने के लिए चेतावनी देते रहे। महिलाओं के कपड़े बदलने को संगम क्षेत्र में चेंजिंग रूम बने थे। कल्पवासियों और बाहर से आई टोलियों ने समूह में स्नान किया और फिर मंगलगीत गाते हुए अपने शिविरों, ठिकानों की ओर लौटीं। जाते समय श्रद्धालु संगम की रेती का प्रसाद ले जाना नहीं भूले।
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ज्योतिर्विदों के मुताबिक सूर्य का मकर राशि में प्रवेश 14 जनवरी को रात 1.20 बजे हुआ। संक्रांति का पुण्यकाल बृहस्पतिवार को सूर्योदय से लेकर शाम 4.03 बजे तक रहेगा। इसी काल में शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद, स्वामी वासुदेवानंद, स्वामी नरेंद्रानंद, स्वामी अधोक्षजानंद सहित अनेक संत, श्रद्धालु डुबकी लगाएंगे।