Prayagraj : माफिया अतीक अहमद की पत्नी शाइस्ता परवीन ने थामा बसपा का हाथ, कहा- परिवार का उत्पीड़न कर रही सरकार
अलोपीबाग स्थित सरदार पटेल संस्थान में बृहस्पतिवार को बहुजन समाज पार्टी के एक दिवसीय कार्यकर्ता सम्मेलन में शाइस्ता परवीन अपने पूरे दलबल के साथ पहुंची। मंच पर मौजूद लोगों ने उनका स्वागत किया। सदस्या ग्रहण करने के बाद शाइस्ता परवीन ने कहा कि सरकार उनके पति, देवर के साथ मेरे पूरे परिवार व मिलने जुलने वालों को फर्जी केसों में मुकदमा दर्ज करके उत्पीड़न कर रही है।
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माफिया अतीक अहमद और बसपा के बीच सालों से चल रही अदावत आखिरकार बृहस्पतिवार को समाप्त हो गई। अतीक अहमद की पत्नी शाइस्ता परवीन ने बेटे के साथ बहुजन समाज पार्टी की सदस्यता ग्रहण कर ली। साथ ही पार्टी की तरफ से महापौर पद की प्रत्याशी के रूप में उनके नाम की घोषणा भी हो गई।
अलोपीबाग स्थित सरदार पटेल संस्थान में बृहस्पतिवार को बहुजन समाज पार्टी के एक दिवसीय कार्यकर्ता सम्मेलन में शाइस्ता परवीन अपने पूरे दलबल के साथ पहुंची। मंच पर मौजूद लोगों ने उनका स्वागत किया।
सदस्या ग्रहण करने के बाद शाइस्ता परवीन ने कहा कि सरकार उनके पति, देवर के साथ मेरे पूरे परिवार व मिलने जुलने वालों को फर्जी केसों में मुकदमा दर्ज करके उत्पीड़न कर रही है। बुलडोजरों से घरों को जमींदोज किया जा रहा है। कहा कि मेरा परिवार व समाज हमेशा बसपा के साथ रहेगा।
सम्मेलन के मुख्य अतिथि पूर्व राज्यसभा सदस्य घनश्याम चंद्र खरवार ने कहा कि पार्टी प्रमुख पूर्व मुख्यमंत्री मायावती के निर्देश पर शाइस्ता परवीन को पार्टी की सदस्यता दिलाई गई है। साथ ही नगर निकाय चुनाव भी पार्टी इनके ही नेतृत्व में लड़ेगी। बसपा सरकार की खूबियों को बताते हुए कहा कि वर्तमान में देश और प्रदेश में भाजपा सरकार बड़े पैमाने पर दलित, मुसलमान, पिछड़ों और सर्वसमाज के कमजोर तबको के साथ जघन्य उत्पीड़न कर रही है।
विश्वविद्यालयों में सैकड़ों गुना फीस वृद्धि हो जाने से गरीब, असहाय व कमजोर समाज के बच्चों को दाखिला नहीं हो पा रहा है। दलित और अल्पसंख्यकों के घरों को सरकार चिन्हित करके बुलडोजर से जमींदोज करा रही है। पार्टी प्रमुख के चार बार के शासन काल में सभी समाज के साथ बराबरी से न्याय हुआ।
कार्यकर्ता सम्मेलन के दूसरे मुख्य अतिथि अमरेंद्र बहादुर भारतीया ने कहा कि प्रदेश की भाजपा सरकार को घेरते हुए कहा कि ऐसी निरंकुश सरकार को उखाड़ फेकने के लिए सर्वसमाज के पीड़ित लोगों को मंच पर आना होगा। मतलब बहुजन समाज पार्टी में आकर हम सबको एक होकर संघर्ष करना पड़ेगा।
गेस्टहाउस कांड के बाद से शुरू हुई थी अदावत
माफिया अतीक अहमद और मायावती के बीच 1995 में लखनऊ में हुए गेस्ट हाउस कांड के बाद से अदावत शुरू हुई थी। गेस्ट हाउस कांड के आरोपियों में अतीक अहमद का नाम आया था। इसके बाद से ही मायावती जब भी सत्ता में आयी, अतीक अहमद हमेशा उनके निशाने पर रहे। अतीक की संपत्तियों पर बुलडोजर चलाने से लेकर कई बड़ी कार्रवाई मायावती के शासन काल में हुई थी। बसपा विधायक राजू पाल की दिन दहाड़े हत्या के बाद अतीक के भाई अशरफ पर भी मायावती के शासनकाल में कार्रवाई हुई थी।
दलित और मुस्लिम गठजोड़ पर टिकी पार्टी की निगाह
2012 के विधान सभा चुनाव से ही बहुजन समाज पार्टी लगातार सत्ता से दूर रही। 2017 विधान सभा चुनाव में पार्टी को करारी हार का सामना करना पड़ा। इसके बाद 2019 लोक सभा चुनाव और फिर 2022 विधान सभा चुनाव में पार्टी चौथे स्थान पर रही। पिछले महापौर चुनाव में पार्टी को चौथे स्थान से ही संतोष करना पड़ा। ऐसे में पार्टी आगामी महापौर चुनाव में अपनी वापसी के लिए दलित और मुस्लिम गठजोड़ को मजबूत करने पर जोर दे रही है। ऐसे में यह गठजोड़ कितना सही साबित होगा और निकाय चुनाव में पार्टी की क्या स्थिति बनेगी। यह आने वाला समय ही बताएंगा।