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love jihad act : धर्मांतरण विरोधी कानून के खिलाफ याचिकाओं पर सुनवाई टली
Mon, 18 Jan 2021 07:15 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Mon, 18 Jan 2021 07:15 PM IST
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इलाहाबाद हाईकोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
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प्रदेश सरकार द्वारा लाए गए धर्मांतरण विरोधी कानून को चुनौती देने वाली जनहित याचिकाओं की सुनवाई अब 25 जनवरी को होगी। सोमवार को यह मामला मुख्य न्यायमूर्ति गोविंद माथुर और न्यायमूर्ति एसएस शमशेरी की पीठ के समक्ष पेश किया गया। कोर्ट को बताया गया कि धर्मांतरण विरोधी कानून को लेकर दाखिल सभी याचिकाओं की सुनवाई सुप्रीमकोर्ट द्वारा किए जाने को लेकर अर्जी दाखिल की गई है। इस पर शीघ्र सुनवाई होगी। अर्जी तय होने तक हाईकोर्ट से सुनवाई स्थगित करने की मांग की गई।
पीठ का कहना था कि सुप्रीम कोर्ट ने नोटिस जारी किया है। कोई अंतरिम आदेश नहीं दिया है और न ही हाईकोर्ट में सुनवाई पर रोक लगाई है। कोर्ट को बताया गया कि अर्जी की सुप्रीम कोर्ट में शीघ्र सुनवाई होगी। इसके बाद पीठ ने याचिकाओं को सुनवाई के लिए 25 जनवरी को पेश करने का निर्देश दिया है। इससे पहले राज्य सरकार की तरफ से याचिका पर जवाब दाखिल किया जा चुका है। सरकार की ओर से बताया गया कि सुप्रीम कोर्ट ने भी कानून के क्रियान्वयन पर अंतरिम आदेश जारी नहीं किया है।
याचिकाओं में धर्मांतरण विरोधी कानून को संविधान के खिलाफ और गैर जरूरी बताते हुए चुनौती दी गई है। याची का कहना है कि यह कानून व्यक्ति के अपनी पसंद व शर्तों पर किसी भी व्यक्ति के साथ रहने व धर्म/पंथ अपनाने के मूल अधिकारों का उल्लंघन करता है। इसे रद्द किया जाए, क्योंकि इस कानून का दुरूपयोग किया जा सकता है।
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राज्य सरकार का कहना है कि शादी के लिए धर्म परिवर्तन से कानून व्यवस्था व सामाजिक स्थिति खराब न हो इसके लिए कानून लाया गया है, जो पूरी तरह से संविधान सम्मत है। इससे किसी के मूल अधिकारों का हनन नहीं होता। वरन नागरिक अधिकारों को संरक्षण प्रदान किया गया है। इससे छल-छद्म के जरिए धर्मांतरण पर रोक लगाने की व्यवस्था की गई है। जनहित याचिकाओं की सुनवाई 25 जनवरी को होगी।
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पीठ का कहना था कि सुप्रीम कोर्ट ने नोटिस जारी किया है। कोई अंतरिम आदेश नहीं दिया है और न ही हाईकोर्ट में सुनवाई पर रोक लगाई है। कोर्ट को बताया गया कि अर्जी की सुप्रीम कोर्ट में शीघ्र सुनवाई होगी। इसके बाद पीठ ने याचिकाओं को सुनवाई के लिए 25 जनवरी को पेश करने का निर्देश दिया है। इससे पहले राज्य सरकार की तरफ से याचिका पर जवाब दाखिल किया जा चुका है। सरकार की ओर से बताया गया कि सुप्रीम कोर्ट ने भी कानून के क्रियान्वयन पर अंतरिम आदेश जारी नहीं किया है।
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याचिकाओं में धर्मांतरण विरोधी कानून को संविधान के खिलाफ और गैर जरूरी बताते हुए चुनौती दी गई है। याची का कहना है कि यह कानून व्यक्ति के अपनी पसंद व शर्तों पर किसी भी व्यक्ति के साथ रहने व धर्म/पंथ अपनाने के मूल अधिकारों का उल्लंघन करता है। इसे रद्द किया जाए, क्योंकि इस कानून का दुरूपयोग किया जा सकता है।
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राज्य सरकार का कहना है कि शादी के लिए धर्म परिवर्तन से कानून व्यवस्था व सामाजिक स्थिति खराब न हो इसके लिए कानून लाया गया है, जो पूरी तरह से संविधान सम्मत है। इससे किसी के मूल अधिकारों का हनन नहीं होता। वरन नागरिक अधिकारों को संरक्षण प्रदान किया गया है। इससे छल-छद्म के जरिए धर्मांतरण पर रोक लगाने की व्यवस्था की गई है। जनहित याचिकाओं की सुनवाई 25 जनवरी को होगी।