‘हे प्रभु’ चूहों से दिलाओ निजात
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सरकार की पहल पर उत्तर मध्य रेलवे (एनसीआर) में लंबे समय से स्वच्छता अभियान जारी है लेकिन एनसीआर के तमाम स्टेशनों पर चूहों की वजह से रेलवे का स्वच्छता अभियान गति नहीं पकड़ पा रहा है। इलाहाबाद की बात करें तो यहां एनसीआर के महाप्रबंधक और मंडल के डीआरएम का कार्यालय है। आए दिन रेलवे के इन दोनों वरिष्ठ अफसरों की जंक्शन पर आवाजाही होती है। बावजूद इसके जंक्शन एवं जोन केअन्य स्टेशनों पर रेल प्रशासन चूहों की रोकथाम के लिए कोई कदम नहीं उठा सका है।
इलाहाबाद जंक्शन के प्लेटफार्म नंबर एक पर स्थित वीआईपी रूम भी चूहों से सुरक्षित नहीं है। आए दिन तमाम वीआईपी एवं रेलवे अफसर ट्रेनों के इंतजार में यहां रुकते हैं। यहां लगी फ्लोर टाइल्स भी पिछले वर्ष चूहों की वजह से काफी खराब हो गई थी। आनन-फानन में रेलवे अफसरों ने पूरी की पूरी नई टाइल्स लगवा दी। इतना ही नहीं यहां लगे पर्दे भी चूहों ने कुतर दिए। वीआईपी रूम में बिछे सोफों का काफी हिस्सा भी चूहों ने कुतर दिया। बाद में यहां पर्दे बदले जाने केसाथ सोफे की मरम्मत कराई गई। वीआईपी रूम के बगल में ही रेलवे के भोजनालय में भी चूहों के आंतक से कर्मचारी खासा परेशान है। यहां खाना बनाने के दौरान चूहों की धमाचौकड़ी देखी जा सकती है। अगर कर्मचारी एलर्ट न हो तो वे भोजन ही खराब कर दें।
इलाहाबाद जंक्शन से चूहों को भगाने के लिए छह वर्ष पहले नैनी स्थित सेंट्रल वेयर हाउसिंग कारपोरेशन (सीडब्ल्यूसी) नाम की एक कंपनी को ठेका दिया गया था। यह ठेका तत्कालीन सीनियर डीसीएम बिजय कुमार ने दिया था जो फिलहाल एनसीआर जोन के सीपीआरओ है। इस कंपनी की ओर से इलाहाबाद जंक्शन पर वर्ष 2010 से लेकर 2012 तक अभियान चलाकर चूहों का खात्मा किया गया लेकिन ठेका खत्म होने के बाद धीमे-धीमे जंक्शन पर एक बार फिर से चूहों का आतंक बढ़ गया। रेलवे द्वारा इस दौरान तकरीबन 15 लाख रुपये खर्च किए गए थे। चूहों की वजह से जंक्शन के वेंडर भी खासे परेशान है। बिस्कुट, केक आदि के पैकेट चूहे पल भर में ही कुतर देते हैं। इससे वेंडरों को हर माह हजारों रुपये का नुकसान झेलना पड़ जाता है।
एनसीआर प्रशासन का दावा है कि जोन की कई ट्रेनों के एसी कोच में पीली रंग की स्टिक लगाई गई है। इसकी खास बात है कि इसमें चूहे चिपक जाते हैं। इसकी मदद से हर माह कई चूहे पकड़ में आ जाते हैं हालांकि स्टेशनों के विश्रामालय, प्रतीक्षालय और प्लेटफार्म पर चूहों की धरपकड़ या मारने का इंतजाम न होने से आए दिन यात्रियों की खासी फजीहत होती है। चूहे, यात्रियों के बैग को भी कुतर कर उसमें रखे खाने पीने के सामान आसानी से चट कर जाते हैं। कई बार चूहों की वजह से छोटे बच्चे भी प्लेटफार्म पर डर के मारे इधर-उधर भागते नजर आए हैं।
‘जोन के सभी बड़े स्टेशनों के कोचिंग डिपो और वॉशिंग लाइन में ही फिलहाल चूहा हटाने का ठेका दिया गया है। स्टेशन और प्लेटफार्म पर नहीं है लेकिन इसकी तैयारी की जा रही है।’
बिजय कुमार, सीपीआरओ, एनसीआर।