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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   Long-term stones in the gallbladder can cause cancer

Research : गालब्लैडर में लंबे समय तक स्टोन रहने से कैंसर की हो सकती है समस्या

Mon, 07 Nov 2022 11:37 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Mon, 07 Nov 2022 11:37 PM IST
सार

कमला नेहरू मेमोरियल अस्पताल की कैंसर रोग विशेषज्ञ डॉ. राधा रानी घोष के मुताबिक पिछले पांच सालों में जिले में गालब्लैडर कैंसर के मरीजों की संख्या करीब दो गुनी हो गई है। पांच साल पहले तक जिले में कैंसर के इलाज के लिए आने वाले मरीजों में 4 से 6 फीसदी मरीज ही गालब्लैडर कैंसर के होते थे,लेकिन अब यह आंकड़ा 8 से 10 फीसदी तक पहुंच गया है।

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Long-term stones in the gallbladder can cause cancer
Prayagraj News : डॉ.राधारानी घोष, कमला नेहरू मेमोरियल हॉस्पिटल। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

गालब्लैडर में स्टोन होने पर जब तक कोई दिक्कत नहीं होती है, लोग अक्सर उसको नजर अंदाज करते रहते हैं,लेकिन यह लापरवाही कई बार भारी पड़ सकती है। रिसर्च में पता चला है कि लंबे समय तक गालब्लैडर में अगर स्टोन है, तो वह कैंसर का रूप ले सकता है। 
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कमला नेहरू मेमोरियल अस्पताल की कैंसर रोग विशेषज्ञ डॉ. राधा रानी घोष के मुताबिक पिछले पांच सालों में जिले में गालब्लैडर कैंसर के मरीजों की संख्या करीब दो गुनी हो गई है। पांच साल पहले तक जिले में कैंसर के इलाज के लिए आने वाले मरीजों में 4 से 6 फीसदी मरीज ही गालब्लैडर कैंसर के होते थे,लेकिन अब यह आंकड़ा 8 से 10 फीसदी तक पहुंच गया है।
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कमला नेहरू अस्पताल, बीएचयू और दिल्ली एम्स में हुए रिसर्च के मुताबिक प्रयागराज व गंगा-यमुना के किनारे बसे शहरों और इलाकों में गाल ब्लैडर कैंसर के मरीजों की संख्या में तेजी से इजाफा हुआ है। इसके पीछे बड़ा कारण गंगा -यमुना में फैल रहा प्रदूषण है। इसके कारण लोगों के गाल ब्लैडर में स्टोन बनने लगता है। कई बार यह स्टोन किसी भी प्रकार की दिक्कत नहीं देता है और लोग लापरवाही करने लगते है।


इसी स्टोन के कारण आगे चलकर गाल ब्लैडर कैंसर का कारण बनता है। इसके अलावा आज के समय में लोगों का खानपान, सब्जियों में प्रयोग होने वाले पेस्टिसाइड और सरसों का जले हुए तेल का बार-बार उपयोग करने से भी गाल ब्लैडर का कैंसर होने की संभावना बढ़ जाती है। 

पूरे विश्व में हर साल कैंसर से पीड़ित होने वाले मरीजों में कुल संख्या के हिसाब से गाल ब्लैडर कैंसर मरीजों की संख्या दो फीसदी ही है। दक्षिण भारत में भी यही आंकड़ा है, लेकिन उत्तर भारत और खासतौर पर गंगा-यमुना के तटीय इलाकों के आस-पास बसे शहरों और क्षेत्रों में गाल ब्लैडर कैंसर से पीड़ित मरीजों की संख्या करीब 10 फीसदी है।


डॉ. राधारानी घोष के मुताबिक गाल ब्लैडर में प्रदूषण के कारण स्टोन होने का खतरा सबसे अधिक होता है, समय रहते इसका इलाज नहीं कराने पर यह शरीर के अंदर ही इरिटेट करता है और घाव कर देता है, जो बाद में कैंसर का रूप ले लेता है। ऐसे में गाल ब्लैडर में स्टोन होने की स्थिति में लोगों को लापरवाही से बचना चाहिए, और समय से इसका इलाज कराना चाहिए।

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सही समय पर पहचान हो तो स्तन कैंसर लाइलाज नहीं 

सही समय पर पहचान हो जाए तो स्तन कैंसर का इलाज संभव है। लेकिन, अक्सर हम शुरुआती लक्षणों पर ध्यान नहीं देते हैं, जिसकी वजह से बीमारी बढ़ती जाती है। जब दिक्कत काफी बढ़ जाती है, तब डॉक्टर के पास पहुंचते हैं। ज्यादातर मामलों में काफी देर हो चुकी होती है। प्रारंभिक अवस्था में बीमारी की पहचान होने पर केवल संक्रमित अंग को हटाकर इसे ठीक किया जा सकता है। 


राष्ट्रीय कैंसर जागरूकता दिवस पर अमर उजाला अपराजिता की पहल के तहत सोमवार को श्री नारायण आश्रम बालिका इंटर कॉलेज में छात्राओं को जागरुक करते हुए कैंसर रोग विशेषज्ञ डॉ.राधारानी घोष ने कहा, सोलह वर्ष के बाद हर लड़की को स्वयं से इसकी जांच करनी चाहिए। त्वचा में किसी तरह का बदलाव या गांठ महसूस होने पर घबराएं नहीं, घरवालों को बताएं। हर गांठ कैंसर नहीं है। जंकफूड का बिल्कुल सेवन न करें। पौष्टिक आहार लें और धूम्रपान से बचें।  

बताया, आज हर तरह के कैंसर का इलाज संभव है। लेकिन, शुरुआती लक्षणों के दिखने पर तुरंत डॉक्टर के पास जाएं। देर करने पर बीमारी गंभीर अवस्था में पहुंच जाती है। ऐसे में डॉक्टरों को इलाज में मुश्किल, वहीं रोगी को भी परेशानी होती है। प्रधानाचार्य विभा मिश्रा ने अतिथि डॉ.राधारानी घोष का स्वागत करते हुए उनके प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया। छात्राओं से कहा, यह आपकी नैतिक जिम्मेदारी है कि मिली जानकारी सहेलियों से साझा कर उन्हें भी जागरू करें। 


प्रमुख बिंद
कैंसर से मौत के मामले में भारत का विश्व में पांचवा स्थान।
देश में हर 22 लड़की में से एक को स्तन कैंसर की बीमारी। 
स्तनकैंसर की एक वजह समय से विवाह का न होना भी है।
स्तनपान न कराने से इस कैंसर का खतरा बढ़ जाता है। 

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