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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   Loksabha Chunav: The mood of Yamuna crossed the good governance of Modi-Yogi in Allahabad, all strategies fai

Loksabha Chunav : इलाहाबाद में मोदी-योगी के सुशासन पर भारी पड़ा यमुनापार का मिजाज, सारी रणनीति हुई फेल

Wed, 05 Jun 2024 12:25 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Wed, 05 Jun 2024 12:25 PM IST
सार

देश के दूसरे पीएम लालबहादुर शास्त्री, वीपी सिंह, जनेश्वर मिश्र, अमिताभ बच्चन जैसी हस्तियों को देने वाली इलाहाबाद सीट पर हैट्रिक लगाने के लिए इस बार भाजपा ने हर जतन किए। मोदी की जहां परेड मैदान में रैली हुई, वहीं मेजा में गृहमंत्री अमित शाह ने इलाहाबाद सीट को जिताने के लिए जनता से कई बार हामी भरवाई थी। योगी ने करछना में सभा कर हुंकार भरी थी।

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Loksabha Chunav: The mood of Yamuna crossed the good governance of Modi-Yogi in Allahabad, all strategies fai
इलाहाबाद लोकसभा सीट से नवनिर्वाचित सांसद उज्ज्वल रमण सिंह। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

इलाहाबाद सीट पर भाजपा के चुनावी रण में इस बार पीएम नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह और सीएम योगी का करिश्मा काम नहीं आया। योगी-मोदी के सुशासन और कानून-व्यवस्था पर यमुनापार की जनता का मिजाज भारी पड़ गया। यही वजह थी कि 2014 और 2019 की तरह मोदी मैजिक नहीं चल सका। शहर दक्षिणी को छोड़ यमुनापार के चार विधानसभा क्षेत्रों में भाजपा का विजय रथ रुक गया। सात राज्यों के सियासी रणनीतिकारों का पखवाड़ेभर से अधिक समय तक विधानसभावार कैंप करना, दिन रात गांव-गांव दस्तक देने की रणनीति जातीय समीकरणों के आगे ध्वस्त हो गई।

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देश के दूसरे पीएम लालबहादुर शास्त्री, वीपी सिंह, जनेश्वर मिश्र, अमिताभ बच्चन जैसी हस्तियों को देने वाली इलाहाबाद सीट पर हैट्रिक लगाने के लिए इस बार भाजपा ने हर जतन किए। मोदी की जहां परेड मैदान में रैली हुई, वहीं मेजा में गृहमंत्री अमित शाह ने इलाहाबाद सीट को जिताने के लिए जनता से कई बार हामी भरवाई थी। योगी ने करछना में सभा कर हुंकार भरी थी।
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पश्चिम बंगाल समेत चार राज्यों के राज्यपाल रहे पं.केशरीनाथ त्रिपाठी के पुत्र नीरज त्रिपाठी को पहली बार सियासीरण में उतारने के बाद भाजपा ने जीत के लिए संगठनात्मक स्तर पर घेरेबंदी में कोई कसर नहीं छोड़ी। इसके लिए सात राज्यों के 25 से अधिक संगठन और सरकार के रणनीतिकारों को जिम्मेदारी दी गई। इसमें सबसे अधिक 12 नेता गुजरात के यहां भेजे गए।

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बड़े नेताओं ने डाले रखा डेरा

इलाहाबाद सीट पर अंतरविरोध की रिपोर्ट को देखते हुए राष्ट्रीय महामंत्री राधामोहन अग्रवाल को भी कैंप करने के लिए भेजा गया। इन नेताओं को विधानसभावार सामाजिक संपर्क टोलियों के साथ जनता के द्वार जाने की जिम्मेदारी निभाई। गुजरात के विधायक हार्दिक पटेल, गुजरात युवा मोर्चा के अध्यक्ष के साथ 10 अन्य युवा मोर्चा नेताओं की टोली को यमुनापार में विधानसभावार जिम्मेदारी दी गई।

मध्यप्रदेश राष्ट्रीय अनुसूचित मोर्चा के अध्यक्ष लाल सिंह मौर्या, आंध्र प्रदेश से राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग मोर्चा के अध्यक्ष एमएलसी केएस लक्ष्मण, हरियाणा के सांसद संजय भाटिया, छत्तीसगढ़ के सांसद विजय सिंह बघेल, कर्नाटक से आए भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय महासचिव सीटी रवि, अलीगढ़ के विधायक अनिल पराशर, अलीगढ़ के ही किसान नेता हरिश्चंद्र चौधरी, पिछड़ा वर्ग मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष नरेंद्र कश्यप, वन राज्यमंत्री अरुण सक्सेना और कैबिनेट मंत्री अनिल राजभर ने लगातार सभाएं और सम्मेलन किए। बावजूद इसके यमुनापार में जातीय समीकरण हावी रहे।

-पीएम,सीएम को लेकर केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल और डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य को लेकर कुल 260 जनसभाएं हुई थीं।
-इलाहाबाद में 392 नुक्कड़ सभाएं हुईं।
-इसी तरह पिछड़ा वर्ग मोर्चा, महिला मोर्चा, युवा मोर्चा और अनुसूचित मोर्चा की ओर से दोनों संसदीय सीटों पर 12 सम्मेलन किए गए थे।

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