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:::गोरखपुर के ध्यानार्थ...एलएलबी के टॉपर को मिलेगा प्रो.केके भट्टाचार्य पदक
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इलाहाबाद विश्वविद्यालय (इविवि) के तीन वर्षीय एलएलबी पाठ्यक्रम में सर्वाधिक अंक अर्जित करने वाले विद्यार्थी को अब प्रो.केके भट्टाचार्य पदक से सम्मानित किया जाएगा। प्रत्येक वर्ष मिलने वाले पदक को प्रदान करने के लिए दीन दयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के पूर्व प्रो.उदय राज राय और उनके पुत्र इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति सलिल राय ने इविवि को दो लाख रुपये दिए हैं।
प्रो.उदय राज राय ने अपने शिक्षक रहे प्रो.केके भट्टाचार्य के सम्मान में प्रतिवर्ष एलएलबी में प्रथम स्थान अर्जित करने वाले विद्यार्थी को मेडल प्रदान करने के लिए यह अनूठी पहल की है। इविवि में अध्ययन के दौरान प्रो.केके भट्टाचार्य ने प्रो.उदय राज राय को पढ़ाया था। अपने शिक्षक की याद में प्रो.उदय राज ने मेडल को प्रायोजित करने की इच्छा जताई थी।
इसके बाद विश्वविद्यालय प्रशासन की स्वीकृति पर प्रो.उदय राज राय एवं न्यायमूर्ति सलिल राय ने विश्वविद्यालय को मेडल के लिए आवश्यक धनराशि प्रदान कर दी है। विवि के कुलसचिव प्रो.एनके शुक्ल की ओर से प्रो.केके भट्टाचार्य पदक प्रदान किए जाने के लिए आदेश जारी कर दिए गए हैं।
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विधि विभाग के पहले पूर्णकालिक प्रोफेसर थे प्रो.भट्टाचार्य
भारतीय विश्वविद्यालय अधिनियम 1904 के तहत विश्वविद्यालय के लिए प्रोफेसर, रीडर और लेक्चरर के पदों को मान्यता दी गई। हालांकि, 1921 तक विधि विभाग तीनों संवर्गों के अंशकालिक शिक्षकों के रूप में अधिवक्ताओं के साथ कार्य करता रहा। 1921 में जब ब्रिटिश भारत के संयुक्त प्रांत के एक अधिनियम द्वारा विश्वविद्यालय को एक आवासीय विश्वविद्यालय के रूप में पुनर्गठित किया गया, तब एक प्रतिष्ठित न्यायविद प्रोफेसर वियर कानून विभाग के पहले प्रमुख बने।
इविवि के विधि विभाग में 1936 में रीडर के दो पूर्णकालिक पद सृजित किए गए, जिन पर प्रो.केके भट्टाचार्य, एलएलएम (लंदन) और प्रो.केआरआर शास्त्री, एमएल (मद्रास) को नियुक्त किया गया। प्रो.केके भट्टाचार्य 1949 में विधि विभाग में पहले पूर्णकालिक प्रोफेसर बने।
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प्रो.उदय राज राय ने अपने शिक्षक रहे प्रो.केके भट्टाचार्य के सम्मान में प्रतिवर्ष एलएलबी में प्रथम स्थान अर्जित करने वाले विद्यार्थी को मेडल प्रदान करने के लिए यह अनूठी पहल की है। इविवि में अध्ययन के दौरान प्रो.केके भट्टाचार्य ने प्रो.उदय राज राय को पढ़ाया था। अपने शिक्षक की याद में प्रो.उदय राज ने मेडल को प्रायोजित करने की इच्छा जताई थी।
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इसके बाद विश्वविद्यालय प्रशासन की स्वीकृति पर प्रो.उदय राज राय एवं न्यायमूर्ति सलिल राय ने विश्वविद्यालय को मेडल के लिए आवश्यक धनराशि प्रदान कर दी है। विवि के कुलसचिव प्रो.एनके शुक्ल की ओर से प्रो.केके भट्टाचार्य पदक प्रदान किए जाने के लिए आदेश जारी कर दिए गए हैं।
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विधि विभाग के पहले पूर्णकालिक प्रोफेसर थे प्रो.भट्टाचार्य
भारतीय विश्वविद्यालय अधिनियम 1904 के तहत विश्वविद्यालय के लिए प्रोफेसर, रीडर और लेक्चरर के पदों को मान्यता दी गई। हालांकि, 1921 तक विधि विभाग तीनों संवर्गों के अंशकालिक शिक्षकों के रूप में अधिवक्ताओं के साथ कार्य करता रहा। 1921 में जब ब्रिटिश भारत के संयुक्त प्रांत के एक अधिनियम द्वारा विश्वविद्यालय को एक आवासीय विश्वविद्यालय के रूप में पुनर्गठित किया गया, तब एक प्रतिष्ठित न्यायविद प्रोफेसर वियर कानून विभाग के पहले प्रमुख बने।
इविवि के विधि विभाग में 1936 में रीडर के दो पूर्णकालिक पद सृजित किए गए, जिन पर प्रो.केके भट्टाचार्य, एलएलएम (लंदन) और प्रो.केआरआर शास्त्री, एमएल (मद्रास) को नियुक्त किया गया। प्रो.केके भट्टाचार्य 1949 में विधि विभाग में पहले पूर्णकालिक प्रोफेसर बने।