येे घर बर्बाद करके इस तरह क्यों आबाद रहते हो/कोई कह रहा था तुम इलाहाबाद रहते हो...। जाने माने कवि कुमार विश्वास ने जब इस गीत को पढ़ा तो युवा झूम उठे। तालियों की बौछार और उत्साह से भरे युवाओं कई बार मंच की ओर बढ़ने की कोशिश की, उन्हें समझा-बुझा कर दीर्घा में बैठाया जाता रहा। एक के बाद एक कई शेर और गीत सुनाकर कुमार विश्वास ने हर किसी के जेहनोदिल में अपनी छाप छोड़ी। इस दौरान कुमार को सुनने के लिए उत्साहित भीड़ ने कोरोना प्रोटोकाल के सारे नियमों को दर किनार कर दिया। प्रबल एकेडमी की ओर से यह काव्य संगम एनसीजेडसीसी परिसर में किया गया था।
कोई कह रहा था तुम इलाहाबाद रहते हो...कवि कुमार विश्वास के गीतों पर झूमे युवा
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भव्य मुक्ताकाशीय मंच पर सबसे पहले दीप जलाकर कार्यक्रम की शुरूआत की गई। इसके बाद गणेश वंदना की सुजाता ने। इसके बाद फनकार ग्रुप के कलाकारों ने भोजपुरी लोक गीतों पर मोहक नृत्य की प्रस्तुतियों से लोगों का दिल जीता। रात 8:20 बजे कुमार विश्वास जब मंच पर आए तो इलाहाबाद विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राओं के अलावा युवाओं की खचाखच उमड़ी भीड़ ने तालियों की गड़गड़ाहट के साथ खड़े होकर उनका स्वागत किया। एक बारगी कविता के प्रति नई पीढ़ी की दीवानगी देखते बनी।
कवि नीलोत्पल उस समय कटरा केप्रतियोगी छात्रों से लेकर बलिया , आजमगढ़, देवरिया समेत देश के अन्य हिस्सों से यहां प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए आने वाले छात्रों के संघर्ष पर आधारित गीत पढ़ रहे थे, लेकिन हर तरफ से कुमार विश्वास को बुलाने का शोर मच रहा था। अंतत: कुमार विश्वास ने माइक संभाला।
उन्होंने कैफी आजमी और अकबर इलाहाबादी के शेर के जरिए प्रयागराज की मिट्टी को पहले नमन किया। उनकी एक-एक पंक्तियों पर लोग तालियां पीटते और दाद देते रहे। इनसे पहले युवा कवि श्लेष गौतम ने अपनी कविताओं से वाहवाही बटोरी। उनकी पंक्तियां थीं कि- बाहर भीतर के अंधियारों से अब लड़ना होगा/ नई रोशनी हवा नई संग आगे बढ़ना होगा...। संचालन ओजश्वी शर्मा ने किया। एकेडमी के निदेशक योगेश मौर्या ने आबार जताया।