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Prayagraj News: पानी कम...आफत जस की तस

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 05 Sep 2026 02:15 AM IST
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Less water...the problem remains the same
गंगा के जलस्तर में कमी के बावजूद सलोरी के निचले इलाकेमें रहने वाले लोगों की चिंता अभी - फोटो : shiv tripathi
गंगा और यमुना के जलस्तर में शुक्रवार को गिरावट तो आई लेकिन अब भी 22 गांव बाढ़ के पानी की जद में हैं। फाफामऊ, नैनी और छतनाग तीनों बिंदुओं पर शाम तक जलस्तर कम दिखा। बावजूद इसके राहत शिविरों में शरणार्थियों की संख्या लगातार बढ़ रही है। जिले के तीन राहत शिविरों में 52 परिवारों के 220 लोग शरण ले चुके हैं। प्रशासन ने अपील की है कि जिन लोगों के घरों में खतरा है, वे सुरक्षित स्थानों पर चले जाएं।
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जिले के जो 22 गांव बाढ़ की जद में हैं। उनमें सदर तहसील का डाही, मेजा के पांच गांव (इसौटा, कोना, अमिलिया, झरियारी, बरसौता), कोरांव के दो गांव (देवघाट और भोगन), फूलपुर के दो गांव (बदरा सोनौटी, धोकरी उपरहार), करछना के छह गांव (पनासा, कचरी, कटका, लक्षीपुर, खपटिया, हथरसा) व बारा के छह गांव (सिंहपुर, बसदेवा, लोनीपार देवरा, खौरिया, जरखोरी, पटिवार) शामिल हैं।
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एडीएम वित्त एवं राजस्व विनीता सिंह ने बताया कि सदर तहसील के ऋषिकुल उच्चतर माध्यमिक विद्यालय राहत शिविर में 25 परिवार के 90 सदस्य, करछना के खपटिया प्राथमिक विद्यालय में 12 परिवार के 30 लोग और मेजा के कोना प्राथमिक विद्यालय में 15 परिवार के 100 लोग शरण ले चुके हैं।
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बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में चल रहीं 23 नाव और पांच मोटरबोट
- बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में 23 नाव और पांच मोटरबोट का संचालन किया जा रहा है। शाम चार बजे फाफामऊ में गंगा का जलस्तर 82.92 मीटर दर्ज किया गया, जो दोपहर 12 बजे के मुकाबले आठ सेंटीमीटर कम था। छतनाग में गंगा का जलस्तर 81.88 मीटर रहा, जो 16 सेंटीमीटर कम था। नैनी में यमुना का जलस्तर 82.25 मीटर रिकॉर्ड किया गया, जहां पिछले आठ घंटों में 17 सेमी की गिरावट आई।

दूसरी ओर जलस्तर कम होने के साथ ही अब बीमारियों का खतरा बढ़ा है। शुक्रवार को 89 लोगों का इलाज हुआ। राहत शिविरों में 13,827 ओआरएस के पैकेट भी बांटे जा चुके हैं। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में अधिकांश लोगों को त्वचा और पेट से जुड़ी समस्याएं आ रही हैं।
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