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Prayagraj News: मिलावटी तेल बेचने के आरोप में कानूनी जंग, 29 साल बाद आरोपी बरी
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खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता पर मुहर लगाने वाले अधिकारियों की लचर कार्यशैली से मिलावटखोरी के आरोप में एक तेल व्यापारी को 29 साल कानूनी जंग लड़नी पड़ी। हालांकि, अभियोजन की विफलता के चलते जिला अदालत ने उसे बरी कर दिया।
यह आदेश अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट दीक्षा श्री की अदालत ने दिया। 1996 में प्रयागराज के नैनी थाना क्षेत्र के मामा-भांजा तालाब निवासी केशव लाल कुशवाहा के खिलाफ खाद्य निरीक्षक केपी गुप्ता ने मिलावटखोरी का मुकदमा दर्ज कराया। आरोप लगाया कि वह मिलावटी तेल बेचता है। छापे के दौरान खाद्य विभाग की टीम ने नमूना लिया।
1997 में मामला जिला अदालत में पहुंचा और ट्रायल शुरू हुआ। करीब 29 साल चले ट्रायल के दौरान जिरह में वादी मुकदमा खाद्य निरीक्षक केपी गुप्ता ने स्वीकार किया कि नमूना उन्होंने खुद नहीं लिया था। वहीं, स्वतंत्र गवाह अनिल कुमार को अभियाेजन के पेश नहीं कर सका। अदालत में आरोपी ने खुद को अनपढ़ बता अगूंठा लगाया, जबकि अभियोजन की ओर से पेश तेल खरीद की रसीदों में आरोपी का हस्ताक्षर था।
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दस्तावेजी साक्ष्याें और बयानों में इतने विरोधाभाष मिले कि अभियोजन अपनी ही कहानी को सिद्ध नहीं कर सका। वहीं, आरोपी के वकील ने कहा कि आरोपी तेल का व्यापार ही नहीं करता। वह अनपढ़ है। अदालत में पेश दस्तावेजों पर सवाल भी उठाया। कहा कि खाद्य विभाग के अधिकारियों ने जांच का नमूना लेने में निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किया। आरोपी की दलीलों और अभियाेजन की विफल कहानी के आधार पर अदालत ने आरोपी को बरी कर दिया।
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यह आदेश अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट दीक्षा श्री की अदालत ने दिया। 1996 में प्रयागराज के नैनी थाना क्षेत्र के मामा-भांजा तालाब निवासी केशव लाल कुशवाहा के खिलाफ खाद्य निरीक्षक केपी गुप्ता ने मिलावटखोरी का मुकदमा दर्ज कराया। आरोप लगाया कि वह मिलावटी तेल बेचता है। छापे के दौरान खाद्य विभाग की टीम ने नमूना लिया।
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1997 में मामला जिला अदालत में पहुंचा और ट्रायल शुरू हुआ। करीब 29 साल चले ट्रायल के दौरान जिरह में वादी मुकदमा खाद्य निरीक्षक केपी गुप्ता ने स्वीकार किया कि नमूना उन्होंने खुद नहीं लिया था। वहीं, स्वतंत्र गवाह अनिल कुमार को अभियाेजन के पेश नहीं कर सका। अदालत में आरोपी ने खुद को अनपढ़ बता अगूंठा लगाया, जबकि अभियोजन की ओर से पेश तेल खरीद की रसीदों में आरोपी का हस्ताक्षर था।
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दस्तावेजी साक्ष्याें और बयानों में इतने विरोधाभाष मिले कि अभियोजन अपनी ही कहानी को सिद्ध नहीं कर सका। वहीं, आरोपी के वकील ने कहा कि आरोपी तेल का व्यापार ही नहीं करता। वह अनपढ़ है। अदालत में पेश दस्तावेजों पर सवाल भी उठाया। कहा कि खाद्य विभाग के अधिकारियों ने जांच का नमूना लेने में निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किया। आरोपी की दलीलों और अभियाेजन की विफल कहानी के आधार पर अदालत ने आरोपी को बरी कर दिया।