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अपने मुवक्किल के खिलाफ याचिका दाखिल नहीं कर सकते वकील
Fri, 24 Jan 2020 10:41 PM IST
इलाहाबाद ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
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Published by: इलाहाबाद ब्यूरो
Updated Fri, 24 Jan 2020 10:41 PM IST
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Lawyers cannot file a petition against their client
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि वकील अपने ही मुवक्किल के खिलाफ याचिका नहीं दाखिल कर सकता है। कोर्ट ने केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (सीएटी) प्रयागराज में केंद्र सरकार के वकीलों को मुकदमों का वितरण करने में अनियमितता के खिलाफ दाखिल अपील खारिज कर दी है। वकीलों ने अपने इंचार्ज द्वारा केंद्र सरकार के मुकदमों के आवंटन में अनियमितता के आरोप में याचिका दाखिल की थी।
कोर्ट ने कहा है कि दोनों याचीगण केंद्र सरकार के अधिवक्ता हैं, उन्हें अपने मुवक्किल (भारत सरकार) के खिलाफ मुकदमा दायर करने का अधिकार नहीं है। यह कदाचार है। दूसरे अधिवक्ताओं के बीच मुकदमों के आवंटन का विवेकाधिकार केंद्र सरकार या उसके द्वारा अधिकृत वरिष्ठ स्थायी अधिवक्ता को है। अधिवक्ताओं को कोई निहित अधिकार नहीं है।
यह आदेश न्यायमूर्ति पंकज मित्तल तथा न्यायमूर्ति वीसी दीक्षित की खंडपीठ ने आचार्य राजेश त्रिपाठी व अन्य की याचिका पर दिया है। याचिका में न्यायाधिकरण के उस आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसमें कहा गया कि न्यायाधिकरण में मुकदमा दाखिल करने से पूर्व केंद्र सरकार के वरिष्ठ स्थाई अधिवक्ता को नोटिस दिया जाए।
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कोर्ट ने कहा कि जिस आदेश को चुनौती दी गई है, उसमें याचीगण पीड़ित पक्ष नहीं है। इससे याचीगण के किसी अधिकार का उल्लंघन नहीं होता। कोर्ट ने याचिका दाखिल करने वाले केंद्र सरकार के वकीलों के खिलाफ कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि अपने ही मुवक्किल के खिलाफ याचिका दाखिल करने का कदाचार करने वालों पर कार्रवाई की जानी चाहिए।
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कोर्ट ने कहा है कि दोनों याचीगण केंद्र सरकार के अधिवक्ता हैं, उन्हें अपने मुवक्किल (भारत सरकार) के खिलाफ मुकदमा दायर करने का अधिकार नहीं है। यह कदाचार है। दूसरे अधिवक्ताओं के बीच मुकदमों के आवंटन का विवेकाधिकार केंद्र सरकार या उसके द्वारा अधिकृत वरिष्ठ स्थायी अधिवक्ता को है। अधिवक्ताओं को कोई निहित अधिकार नहीं है।
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यह आदेश न्यायमूर्ति पंकज मित्तल तथा न्यायमूर्ति वीसी दीक्षित की खंडपीठ ने आचार्य राजेश त्रिपाठी व अन्य की याचिका पर दिया है। याचिका में न्यायाधिकरण के उस आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसमें कहा गया कि न्यायाधिकरण में मुकदमा दाखिल करने से पूर्व केंद्र सरकार के वरिष्ठ स्थाई अधिवक्ता को नोटिस दिया जाए।
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कोर्ट ने कहा कि जिस आदेश को चुनौती दी गई है, उसमें याचीगण पीड़ित पक्ष नहीं है। इससे याचीगण के किसी अधिकार का उल्लंघन नहीं होता। कोर्ट ने याचिका दाखिल करने वाले केंद्र सरकार के वकीलों के खिलाफ कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि अपने ही मुवक्किल के खिलाफ याचिका दाखिल करने का कदाचार करने वालों पर कार्रवाई की जानी चाहिए।