माघ मेला : किन्नर अखाड़े के शिविर में देर रात लगी आग, छह टेंट जलकर राख, तीन लोग झुलसे
किन्नर अखाड़े के शिविर में देर रात आग लगने से आधा दर्जन टेंट जल गए और तीन लोग झुलस गए हैं। घायलों का उपचार एसआरएन में चल रहा है। आग लगने के कारणों का पता नहीं चल सका है।
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मौनी अमावस्या का स्नान शुरू होने से ठीक पहले बृहस्पतिवार रात माघ मेला क्षेत्र में बड़ा हादसा हो गया। प्रयागवाल क्षेत्र में स्थित किन्नर अखाड़ा के शिविर में भीषण आग लग गई। पांच टेंट जलकर राख हो गए जबकि तीन लोग झुलस गए। इनमें से दो की हालत गंभीर है। हादसे में जर्मनी से आई महिला का सामान भी जल गया। घटना का कारण शॉर्ट सर्किट माना जा रहा है।
थाना प्रयागवाल क्षेत्र में ओल्ड जीटी रोड व संगम लोअर मार्ग चौराहे के पास ही किन्नर अखाड़े का शिविर स्थित है। रोज की तरह ही रात में सभी खाना खाने के बाद सो गए। रात 2:20 मिनट पर अचानक शिविर में बने एक टेंट में आग लग गई। इस टेंट में दिल्ली के बदरपुर से आए सतवीर (60) व उनकी पत्नी रमेश (57) थीं। दोनों चीखते हुए बाहर भागे तो आसपास के टेंटों में सो रहे श्रद्धालु भी नींद से जग गए। वहां मौजूद लाेगाें ने आग बुझाने की कोशिशें की, लेकिन वह नाकाम रहे। तब तक आग ने तेजी से फैलते हुए अगल-बगल के चार और टेंटों को भी चपेट में ले लिया। इससे चारों तरफ आग की लपटें उठने लगीं।
सूचना मिली तो पुलिस और फायर ब्रिगेड पहुंच गई। करीब आधे घंटे की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया जा सका। हालांकि तब तक खाने, कपड़े समेत कई अन्य सामान जलकर राख हो गए। मुख्य अग्निशमन अधिकारी माघ मेला सुभाष कुमार ने बताया कि आग की चपेट में आने से कुल तीन लोग जख्मी हुए हैं। इनमें दिल्ली से आए दंपती सतवीर व रमेश और करेंहदा निवासी बेचन (55) साल शामिल हैं। तीनाें को एसआरएन अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इनमें रमेश व बेचन ज्यादा झुलसे हैं। इनका इलाज कराया जा रहा है। कुल पांच टेंट जले हैं।
अफसर शॉर्ट सर्किट बता रहे कारण
अग्निशमन विभाग आग लगने का कारण शॉर्ट सर्किट को मान रहा है। मुख्य अग्निशमन अधिकारी सुभाष कुमार का कहना है कि घटना ढाई बजे के आसपास की है। उस वक्त लगभग सभी लोग सो रहे थे। खाना बनाने या पूजा का दीपक जलाने जैसी बात भी सामने नहीं आई है। ऐसे में आशंका यही है कि शॉर्ट सर्किट की वजह से आग लगी और फिर इसने देखते ही देखते आसपास के टेंटों को भी चपेट में ले लिया।
छह फायर टेंडर मंगवाए गए, दो से आग पर काबू पाया
आग जिस तेजी से फैल रही थी, उसे देखते हुए मौके पर कुल छह फायर टेंडर मंगवाए गए। हालांकि दो फायर टेंडर की मदद से ही आग पर काबू पा लिया गया। शिविर में स्थित टेंटों में बहुत से श्रद्धालु व अखाड़े के सदस्य सो रहे थे, ऐसे में उन्हें बाहर निकलना भी बड़ी चुनौती थी। फायर ब्रिगेड के जवानों ने तत्परता दिखाते हुए ऐसे लोगों को शिविर से बाहर निकाला।
जर्मन एंबेसी से लगाई गुहार
किन्नर अखाड़ा में जिस वक्त आग लगी, वहां जर्मनी से आई मार्टिना डावो भी मौजूद रहीं। उन्होंने बताया कि शिविर में सभी लोग सो रहे थे। तभी अचानक लोगाें के चीखने की आवाजें आने लगीं। वह टेंट से बाहर निकलीं तो देखा कि बगल के टेंटों में आग लगी है। इस पर शिविर से बाहर भागकर उन्होंने अपनी जान बचाई। हालांकि इस दौरान उनका सामान, जिनमें जर्मन मुद्रा व अन्य चीजें शामिल थीं, टेंट में ही रह गया और आग की चपेट में आ गया। मार्टिना ने बताया कि उनके पैसे, कपड़े समेत अन्य सभी सामान जल गए।
साजिश की आशंका
महामंडलेश्वर भवानी मां के टेंट में ओढ़ने,बिछाने और पहनने के कपड़े के साथ मोबाइल तक जल गया। भवानी मां ने बताया कि नौ बजे तक पूजा पाठ चला। 10.30 बजे तक नाचगाने के कार्यक्रम और खाना खाने के बाद सभी सो गए। दो बजे के करीब अचानक आग लग गई। शोर मचा तो जानकारी हुई। यह नहीं पता कि आग लगी या लगाई गई। आग महिला टेंटों में लगी, इसलिए भी सवाल खड़े हो रहे हैं। बताया कि हादसे में झुलसने वाले सतवीर व रमेश उनके भाई व भाभी हैं। दोनों को दोपहर बाद परिजन दिल्ली लेकर चले गए।
अभी तक कोई घटना शॉर्ट सर्किट के कारण नहीं हुई है। किन्नर अखाड़ा ने खुद इस बात का खंडन किया है। पिछली बार बैकुंठ धाम शिविर में लगी आग भी सिलिंडर से गैस लीकेज के कारण हुई थी।
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