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वर्ष का अंतिम सूर्यग्रहण आज, बंद ही रहेंगे मंदिरों के कपाट
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Last solar eclipse of the year today, temples will remain closed
वर्ष का अंतिम सूर्यग्रहण आज, बंद ही रहेंगे मंदिरों के कपाट
प्रयागराज। बृहस्पतिवार को वर्ष का आखिरी सूर्य ग्रहण लगेगा। अबकी यह सूर्य ग्रहण भारत में भी दिखेगा। पूर्ण सूर्य ग्रहण सुबह आठ से दोपहर 1.36 बजे तक है। भारत में यह 8.04 से 11.39 बजे तक रहेगा लेकिन प्रयागराज में ग्रहण सुबह 8.19 से आरंभ होकर 11.10 बजे रहेगा।
मान्यता के अनुसार सूतक काल में अन्न जल नहीं ग्रहण करना चाहिए और न ही देव मूर्तियों को स्पर्श ही करना चाहिए। हालांकि बालक, वृद्ध और रोगी के लिए यह निषेध नहीं है। ग्रहण के आरंभ से पूर्व और मोक्ष के बाद गंगा, संगम स्नान करके दान देने का विधान है। त्रिवेणी बांध स्थित बड़े हनुमान मंदिर के महंत नरेंद्र गिरि के मुताबिक ग्रहण काल में मंदिर के कपाट बंद रहेंगे। दोपहर बारह बजे पूजा अर्चना के बाद मंदिर श्रद्धालुओं के लिए खोला जाएगा।
फलदायी होती है ग्रहण काल में किया अनुष्ठान
शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के प्रतिनिधि शिष्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती का क हना है कि ग्रहण काल में किया गया अनुष्ठान अत्यंत फलदायी होता है। ग्रहण काल को पुण्यकाल माना जाता है। ग्रहण के आरंभ से मोक्ष तक किया गया मंत्र जाप पूरे चरण का फल देता है। ग्रहण में गंगा, संगम स्नान करने से महान पुण्य प्राप्त होता है। ग्रहण के आरंभ और ग्रहण पूर्ण होने पर भी स्नान करना चाहिए। शास्त्रों के मुताबिक जो व्यक्ति अंतिम स्नान नहीं करता है, उस पर तब सूतक लगा रहता है, जब तक दूसरा ग्रहण नहीं आ जाता।
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प्रयागराज। बृहस्पतिवार को वर्ष का आखिरी सूर्य ग्रहण लगेगा। अबकी यह सूर्य ग्रहण भारत में भी दिखेगा। पूर्ण सूर्य ग्रहण सुबह आठ से दोपहर 1.36 बजे तक है। भारत में यह 8.04 से 11.39 बजे तक रहेगा लेकिन प्रयागराज में ग्रहण सुबह 8.19 से आरंभ होकर 11.10 बजे रहेगा।
मान्यता के अनुसार सूतक काल में अन्न जल नहीं ग्रहण करना चाहिए और न ही देव मूर्तियों को स्पर्श ही करना चाहिए। हालांकि बालक, वृद्ध और रोगी के लिए यह निषेध नहीं है। ग्रहण के आरंभ से पूर्व और मोक्ष के बाद गंगा, संगम स्नान करके दान देने का विधान है। त्रिवेणी बांध स्थित बड़े हनुमान मंदिर के महंत नरेंद्र गिरि के मुताबिक ग्रहण काल में मंदिर के कपाट बंद रहेंगे। दोपहर बारह बजे पूजा अर्चना के बाद मंदिर श्रद्धालुओं के लिए खोला जाएगा।
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फलदायी होती है ग्रहण काल में किया अनुष्ठान
शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के प्रतिनिधि शिष्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती का क हना है कि ग्रहण काल में किया गया अनुष्ठान अत्यंत फलदायी होता है। ग्रहण काल को पुण्यकाल माना जाता है। ग्रहण के आरंभ से मोक्ष तक किया गया मंत्र जाप पूरे चरण का फल देता है। ग्रहण में गंगा, संगम स्नान करने से महान पुण्य प्राप्त होता है। ग्रहण के आरंभ और ग्रहण पूर्ण होने पर भी स्नान करना चाहिए। शास्त्रों के मुताबिक जो व्यक्ति अंतिम स्नान नहीं करता है, उस पर तब सूतक लगा रहता है, जब तक दूसरा ग्रहण नहीं आ जाता।
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