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ललित वर्मा हत्याकांड : सही साबित हुई पुलिस की ही थ्योरी, घर में ही छिपे थे कातिल

Fri, 13 Aug 2021 08:10 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Fri, 13 Aug 2021 08:10 AM IST
सार

तीन फरवरी 2016 की रात नौ बजे के करीब सिविल लाइंस में बीएसएनएल ऑफिस के बगल स्थित गली में इस हत्याकांड को अंजाम दिया गया था। मामले में तत्कालीन विधायक पूजा पाल समेत सात लोगों को नामजद कराया गया था।

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lalit verma murder case : the murderer was hiding in the house
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : Social Media

विस्तार

धूमनगंज के जयंतीपुर निवासी सर्राफ ललित वर्मा (26) की हत्या में आखिरकार पुलिस की ही थ्योरी सही साबित हुई। दरअसल बृहस्पतिवार को सीबीआई ने जिस विक्रम को हत्या में शामिल आरोपियों में से एक बताते हुए मामले का खुलासा किया, पुलिस उसे पहले ही जेल भेज चुकी थी। हत्या के छह दिनों बाद ही मामले का खुलासा करते हुए जिला पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया था।

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तीन फरवरी 2016 की रात नौ बजे के करीब सिविल लाइंस में बीएसएनएल ऑफिस के बगल स्थित गली में इस हत्याकांड को अंजाम दिया गया था। मामले में तत्कालीन विधायक पूजा पाल समेत सात लोगों को नामजद कराया गया था। पिता का आरोप था कि पूजा पाल व दिलीप पाल से उसकी जमीन को लेकर रंजिश चल रही थी। इसी रंजिश केचलते उसकी हत्या हुई। हत्या के छह दिन बाद ही पुलिस ने इस मामले का खुलासा कर दिया था। खास बात यह है कि बृहस्पतिवार को सीबीआई ने भी चचेरे भाइयों को ही गिरफ्तार करते हुए मामले का खुलासा किया।

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lalit verma murder case : the murderer was hiding in the house
cbi - फोटो : PTI

बहाने से साथ लाकर मार दिया
नौ फरवरी 2016 को पुलिस ने इस मामले का खुलासा करते हुए बताया था कि ललित की हत्या उसके ही चचेरे भाई विक्रम व संतोष ने एक अन्य केसाथ मिलकर की थी। खुलासे के मुताबिक, घटना वाली रात विक्रम ललित को उसकेचकिया स्थित किराये के मकान से अधिवक्ता से मिलाने केबहाने बाइक पर साथ लेकर आया था। बीएसएएन ऑफिस के बगल स्थित गली में पहुंचते ही पीछे से बाइक पर विक्रम का चचेरा भाई संतोष सोनी व उसका दोस्त आ गए। इसकेबाद विक्रम ने ललित को बाइक से उतारा और तभी संतोष ने उसे गोली मार दी जिससे वह वहीं ढेर हो गया। इसकेबाद संतोष ने ही विक्रम के कंधे को छूते हुए गोली चलाई। ऐसा इसलिए किया क्योंकि घायल होने पर पुलिस को उस पर संदेह न हो। संतोष व उसकेदोस्त केभागने के बाद कुछ दूर जाकर विक्रम ने ही 100 नंबर पर फोन कर पुलिस को सूचना दी। 

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Crime Scene
पुलिस की थ्योरी के पीछे क्या थे तर्क
- वादी मुकदमा मृतक के पिता की ओर से दर्ज कराई गई एफआईआर में बताया गया था कि हमलावर सफारी में सवार थे। लेकिन घटनास्थल केपास लगे सीसीटीवी फुटेज में सफारी नहीं नजर आई।
- घटनास्थल पर सफारी की मौजूदगी की बात घटनास्थल से कुछ दूर पर मौजूद प्रत्यक्षदर्शी संजय सिंह ने भी नकारी थी। घटना केदौरान बिशप जॉनसन स्कूल के पास मौजूद संजय ने पुलिस को बयान दिया था कि विक्रम, संतोष व एक अन्य व्यक्ति घटनास्थल से आते दिखे थे।
- मृतक के पिता ने यह भी कहा था कि घटना केदौरान वह अपने एक अन्य बेटे वीरेंद्र केसाथ मौकेपर मौजूद था। लेकिन दोनों के मोबाइल की सीडीआर खंगालने पर दोनों की लोकेशन घटना केवक्त घटनास्थल पर नहीं मिली थी। सीबीआई ने भी अपने खुलासे में इस बात पर मुहर लगाई है।

फिलहाल किसी को क्लीन चिट नहीं
सीबीआई ने भले ही चचेरे भाइयों को कत्ल केआरोप में गिरफ्तार कर मामले का खुलासा कर दिया है। लेकिन अभी उसकी ओर से मुकदमे में नामजद कराए गए आरोपियों को क्लीन चिट नहीं दी गई है। खुलासे के दौरान पूर्व में नामजद कराए गए आरोपियों केसंबंध में फिलहाल कोई जानकारी नहीं दी गई है। खास बात यह है कि उसकी ओर से यह भी बताया गया है कि मुकदमे की विवेचना अभी जारी है।

पिता की ओर से क्यों जताई गई थी आपत्ति
- सीसीटीवी फुटेज में सफारी का न दिखना उसकेआरोपों को खारिज किए जाने का आधार नहीं हो सकता। क्योंकि सीसीटीवी यह तय नहीं कि सीसीटीवी कैमरा घटनास्थल को पूरी तरह से कवर करता है या नहीं।
- फुटेज धुंधला था, ऐसे में बाइकसवारों की पहचान करना भी संभव नहीं था।
- पुलिस की ओर से गवाह बनाए गए संजय सिंह की घटनास्थल के पास उपस्थिति भी संदेहजनक है।
- विवेचनाधिकारी ने गवाह के मोबाइल की सीडीआर प्राप्त करने की भी कोशिश नहीं की, जिससे कि उसकी उपस्थिति स्थापित की जा सकती।
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