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स्वास्थ्य : बच्चों में भोजन की आदत न डालना बन रहा एनीमिया का कारण, शरीर में हो रही विटीमिन डी की कमी

Wed, 22 Nov 2023 01:41 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Wed, 22 Nov 2023 01:41 PM IST
सार

दौड़भाग भरी जिंदगी में लोग हर काम जल्दी व आसानी से चाहते हैं। ऐसे में अधिकतर लोग अपने बच्चे को बैठाकर खाना खिलाने का समय नहीं निकाल पाते हैं। इसकी वजह से कई बच्चे छह माह के होने बाद भी फ्रूट पाउडर या फिर दूध के भरोसे रहते हैं।

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Lack of eating habit in children is becoming the cause of anemia, deficiency of Vitamin D in the body.
एनीमिया। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

बच्चों में अक्सर यह शिकायत देखने को मिलती है कि वह कुछ खाते नहीं। इसकी वजह से उनका सही से शारीरिक विकास नहीं हो पाता है। अलग-अलग उम्र में इसके अलग-अलग कारण होते हैं। वहीं, बाल रोग विशेषज्ञों की मानें तो छह माह बाद बच्चे को भोजन कराना जरूरी होता है। ऐसा नहीं करने पर वह एनीमिया का शिकार हो जाते हैं। सिर्फ सरोजनी नायडू बाल रोग चिकित्सालय (चिल्ड्रेन हॉस्पिटल) और जिला महिला चिकित्सालय (डफरिन) के पीडियाट्रिक वार्ड में एक साल में 10 हजार से अधिक ऐसे मामले आ चुके हैं।

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दौड़भाग भरी जिंदगी में लोग हर काम जल्दी व आसानी से चाहते हैं। ऐसे में अधिकतर लोग अपने बच्चे को बैठाकर खाना खिलाने का समय नहीं निकाल पाते हैं। इसकी वजह से कई बच्चे छह माह के होने बाद भी फ्रूट पाउडर या फिर दूध के भरोसे रहते हैं। इस कारण बच्चों में विटामिन डी व आयरन की कमी होने लगती है। सालभर बाद समस्या सामने आने लगती है। जांच में पता चलता है कि खून में हीमोग्लोबिन की कमी है, जिसके कारण वह एनीमिया का शिकार हो गया है। चिल्ड्रेन हॉस्पिटल में रोजाना 150 से 200 बच्चों की ओपीडी होती है। इसमें लगभग 20 बच्चे एनीमिया के शिकार होते हैं।

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दलिया, खीर, हलवा व दाल से करें शुरुआत

चिकित्सकों के मुताबिक बच्च्चों को छह माह पूरे होने के बाद धीरे-धीरे ठोस आहार देना शुरू करना चाहिए। दलिया, खीर, हलवा, दाल आदि से इसकी शुरुआत करनी चाहिए। बच्चे को कभी भी खाना जोर-जबरदस्ती से या मार-पीटकर नहीं खिलाना चाहिए। ऐसा करने से आपका लाडला खाने से और दूर भागेगा।

एनीमिया के लक्षण

1-बच्चों की त्वचा पीला पड़ना।
2-सुस्ती और कमजोरी होना।

3-भूख कम लगना या खाने में आनाकानी करना।
4-बच्चे का चिड़चिड़ा होना।

6-सांस लेने में परेशानी होना।
7-दिल की धड़कन तेज होना।

8-शरीर में सूजन।
9-सिर, लंबाई और वजन सामान्य रूप से न बढ़ना

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फ्रूट पाउडर में केमिकल मिला होता है, इसलिए उसे कभी नहीं देना चाहिए। दाल के पानी की जगह बच्चे को दाल दें, अगर हो सके तो उसमें सब्जी जरूरी डालें। इसके अलावा दूध देने से बेहतर है कि उसे खीर दें। - डॉ.संतोष गुप्ता, बाल रोग विशेषज्ञ, डफरिन

बच्चों में एनीमिया के मामले तेजी से बढ़े हैं। इसके पीछे सबसे बड़ा कारण उन्हें छह माह के बाद भी दूध पर निर्भर रखना या फिर फ्रूट पाउडर देना है। ऐसा करने पर बच्चे को स्वाद की समझ नहीं हो पाती है और वह दो से तीन साल तक दूध पर ही निर्भर रहता है। - डॉ.डी कुमार, सर्जन, चिल्ड्रेन हॉस्पिटल

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