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Prayagraj News: जन्म प्रमाणपत्र के अभाव में बच्चों का लटका दाखिला
Fri, 13 Mar 2026 01:38 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, प्रयागराज
संवाद न्यूज एजेंसी, प्रयागराज
Updated Fri, 13 Mar 2026 01:38 AM IST
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नगर के सैकड़ों बच्चों का भविष्य प्रशासनिक लेटलतीफी की भेंट चढ़ रहा है। नगर पंचायत कार्यालय और एसडीएम सोरांव के बीच तालमेल की कमी के कारण जन्म प्रमाणपत्र के करीब 500 आवेदन अधर में लटके हैं। सबसे अधिक परेशानी उन बच्चों के लिए है जिनकी आयु एक वर्ष से अधिक हो चुकी है। बिना जन्म प्रमाणपत्र के प्रतिष्ठित स्कूलों ने उनका का दाखिला लेने से मना कर दिया है। इसको लेकर अभिभावक खासा परेशान हैं।
नगर पंयायत कार्यालय में एक वर्ष से अधिक आयु के बच्चों के जन्म प्रमाण पत्र के लिए करीब 500 आवेदन आए हैं। स्थानीय स्तर पर जांच प्रक्रिया पूरी कर अगस्त माह में ही 180 आवेदनों की सूची एसडीएम सोरांव को भेजी गई थी। नियमानुसार इन पर अंतिम मुहर उपजिला मजिस्ट्रेट सोरांव को लगानी है, लेकिन आठ महीने बीत जाने के बाद भी वहां से कोई जवाब नहीं आया है। इस सुस्ती और पुराने आवेदनों का निस्तारण न होने के कारण नगर पंचायत स्तर पर भी 250 अन्य नए आवेदन लंबित पड़े हैं। नया शिक्षा सत्र शुरू होने को है, ऐसे में अभिभावकों की चिंता यह है कि यदि समय पर प्रमाण पत्र नहीं मिला, तो उनके बच्चों का एक साल बर्बाद हो जाएगा।
- नियमों के जाल में उलझे लोग
केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा जारी आदेश के अनुसार जन्म-मृत्यु पंजीकरण अधिनियम 1969 की धारा 13(3) व राज्य नियमावली 2002 की धारा 9(3) के तहत एक वर्ष से अधिक की देरी होने पर प्रक्रिया अत्यंत जटिल हो जाती है। स्थानीय प्रशासन आवेदन के साथ दो संभ्रांत व्यक्तियों की गवाही और उनके आधार कार्ड की जांच करता है। इसके बाद पूरी फाइल आर.सी.सी.एम.एस. पोर्टल के माध्यम से एसडीएम स्तर पर स्वीकृति दी जाती है।
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- क्या हैं नियम।
- 21 दिन के भीतर नगर पंचायत स्तर पर पंजीकरण और निर्गमन (निःशुल्क)।
- 22 दिन से 1 वर्ष के अंदर मुख्य चिकित्सा अधिकारी स्तर से अनुमति के बाद जारी।
- 1 वर्ष से अधिक होने पर उपजिला मजिस्ट्रेट की जांच एवं आर.सी.सी.एम.एस. पोर्टल के माध्यम से विशेष स्वीकृति के बाद जारी।
- क्या कहते हैं जनप्रतिनिधि।
- प्रशासनिक अधिकारियों की लापरवाही का खामियाजा आम आदमी को भुगतनाप पड़ रहा है। आठ महीने तक फाइलों को दबाए रखना जनता के अधिकारों का हनन है। - अमरेश पासी, सभासद वार्ड-3
- स्कूलों में दाखिले का समय चल रहा है। यदि अभिभावकों को उनके बच्चों का जन्म प्रमाण पत्र नहीं मिलता तो उनको प्रवेश नहीं मिलेगा, और उनका साल बर्बाद होगा। - अमर बहादुर यादव, सभासद वार्ड-4
- डिजिटल दौर में भी अगर प्रमाण पत्र के लिए साल भर इंतजार करना पड़े तो यह व्यवस्था की विफलता है। अधिकारियों को चाहिए कि पोर्टल की खामियों को दूर प्रमाण पत्र जारी किया जाए। - नफीस अहमद, सभासद वार्ड-15,
- नगर पंचायत स्तर से आवेदनों की जांच पूरी कर समय से तहसील भेज दी गई है। मामला एसडीएम स्तर पर लंबित है। जनता की परेशानी को देखते हुए मैं स्वयं एसडीएम सोरांव से मिलकर समस्या के निस्तारण कराएंगे।- पद्मजा मिश्रा, अधिशासी अधिकारी नगर पंचायत लालगोपालगंज।
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नगर पंयायत कार्यालय में एक वर्ष से अधिक आयु के बच्चों के जन्म प्रमाण पत्र के लिए करीब 500 आवेदन आए हैं। स्थानीय स्तर पर जांच प्रक्रिया पूरी कर अगस्त माह में ही 180 आवेदनों की सूची एसडीएम सोरांव को भेजी गई थी। नियमानुसार इन पर अंतिम मुहर उपजिला मजिस्ट्रेट सोरांव को लगानी है, लेकिन आठ महीने बीत जाने के बाद भी वहां से कोई जवाब नहीं आया है। इस सुस्ती और पुराने आवेदनों का निस्तारण न होने के कारण नगर पंचायत स्तर पर भी 250 अन्य नए आवेदन लंबित पड़े हैं। नया शिक्षा सत्र शुरू होने को है, ऐसे में अभिभावकों की चिंता यह है कि यदि समय पर प्रमाण पत्र नहीं मिला, तो उनके बच्चों का एक साल बर्बाद हो जाएगा।
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- नियमों के जाल में उलझे लोग
केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा जारी आदेश के अनुसार जन्म-मृत्यु पंजीकरण अधिनियम 1969 की धारा 13(3) व राज्य नियमावली 2002 की धारा 9(3) के तहत एक वर्ष से अधिक की देरी होने पर प्रक्रिया अत्यंत जटिल हो जाती है। स्थानीय प्रशासन आवेदन के साथ दो संभ्रांत व्यक्तियों की गवाही और उनके आधार कार्ड की जांच करता है। इसके बाद पूरी फाइल आर.सी.सी.एम.एस. पोर्टल के माध्यम से एसडीएम स्तर पर स्वीकृति दी जाती है।
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- क्या हैं नियम।
- 21 दिन के भीतर नगर पंचायत स्तर पर पंजीकरण और निर्गमन (निःशुल्क)।
- 22 दिन से 1 वर्ष के अंदर मुख्य चिकित्सा अधिकारी स्तर से अनुमति के बाद जारी।
- 1 वर्ष से अधिक होने पर उपजिला मजिस्ट्रेट की जांच एवं आर.सी.सी.एम.एस. पोर्टल के माध्यम से विशेष स्वीकृति के बाद जारी।
- क्या कहते हैं जनप्रतिनिधि।
- प्रशासनिक अधिकारियों की लापरवाही का खामियाजा आम आदमी को भुगतनाप पड़ रहा है। आठ महीने तक फाइलों को दबाए रखना जनता के अधिकारों का हनन है। - अमरेश पासी, सभासद वार्ड-3
- स्कूलों में दाखिले का समय चल रहा है। यदि अभिभावकों को उनके बच्चों का जन्म प्रमाण पत्र नहीं मिलता तो उनको प्रवेश नहीं मिलेगा, और उनका साल बर्बाद होगा। - अमर बहादुर यादव, सभासद वार्ड-4
- डिजिटल दौर में भी अगर प्रमाण पत्र के लिए साल भर इंतजार करना पड़े तो यह व्यवस्था की विफलता है। अधिकारियों को चाहिए कि पोर्टल की खामियों को दूर प्रमाण पत्र जारी किया जाए। - नफीस अहमद, सभासद वार्ड-15,
- नगर पंचायत स्तर से आवेदनों की जांच पूरी कर समय से तहसील भेज दी गई है। मामला एसडीएम स्तर पर लंबित है। जनता की परेशानी को देखते हुए मैं स्वयं एसडीएम सोरांव से मिलकर समस्या के निस्तारण कराएंगे।- पद्मजा मिश्रा, अधिशासी अधिकारी नगर पंचायत लालगोपालगंज।

लाडवा। सैन्य सामान व बंदूकों की सलामी देते सैना के जावान। संवाद- फोटो : दिन के साथ रातें भी होने लगीं गर्म

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