Prayagraj : नया स्टेशन बनने के बाद भी जंक्शन पर रहेगी भूलभुलैया, 950 करोड़ से होना है पुनर्विकास
प्रयागराज जंक्शन पर वर्तमान समय कुल दस प्लेटफार्म हैं। दो अन्य का निर्माण महाकुंभ मेले के पूर्व रेलवे को करना है। यहां आने वाले तमाम यात्रियों की यही शिकायत रहती है कि स्टेशन पर प्लेटफार्म एक क्रम में नहीं है। इस वजह से जाने अनजाने में यात्री दूसरे प्लेटफार्म पर पहुंच जाते हैं।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
प्रयागराज जंक्शन के पुनर्विकास का कार्य रेलवे ने शुरू कर दिया है। करोड़ों की लागत से प्रयागराज जंक्शन के पुनर्विकास का कार्य महाकुंभ 2025 के पूर्व सिविल लाइंस साइड में हो जाना है। जंक्शन को नए भारत का नया स्टेशन की तर्ज पर विकसित किया जाना है, लेकिन नया स्टेशन बनने के बाद भी यहां यात्रियों को सभी 12 प्लेटफार्म एक क्रम में नहीं मिलेंगे।
दरअसल प्रयागराज जंक्शन पर वर्तमान समय कुल दस प्लेटफार्म हैं। दो अन्य का निर्माण महाकुंभ मेले के पूर्व रेलवे को करना है। यहां आने वाले तमाम यात्रियों की यही शिकायत रहती है कि स्टेशन पर प्लेटफार्म एक क्रम में नहीं है। इस वजह से जाने अनजाने में यात्री दूसरे प्लेटफार्म पर पहुंच जाते हैं।
कानपुर सेंट्रल, लखनऊ, नई दिल्ली, आगरा कैंट आदि प्रमुख रेलवे स्टेशनों की बात करें तो वहां सभी प्लेटफार्म एक क्रम में होने के साथ ही एक दूसरे के समानांतर है। वहीं प्रयागराज जंक्शन में ऐसा नहीं है। प्लेटफार्म नंबर एक से तीन को छोड़ दिया जाए तो शेष अन्य प्लेटफार्म न ही एक दूसरे के समानांतर है और न ही उनकी क्रम संख्या ठीक है।
एक से दस नंबर जाने के लिए तकरीबन एक किमी का तय करना पड़ता है सफर
किसी यात्री को अगर सिटी साइड के प्लेटफार्म नंबर एक से नौ-दस पर जाना है तो पहले उसे तकरीबन एक किमी का सफर तय करना होता है। सिटी साइड से पहले प्लेटफार्म नंबर एक के हावड़ा छोर पर जाना होगा। उसके बाद वहां से एफओबी पर चढ़कर सिविल लाइंस साइड छोर पर जाना होगा। वहीं अगर संबंधित यात्री की ट्रेन का कोच हावड़ा छोर पर है तो उसे फिर तकरीबन आधा किमी का सफर तय करना होता है।
पांच नंबर के बाद सीधे सात नंबर प्लेटफार्म
इसी तरह यहां प्लेटफार्म के नंबर एक से पांच तक सही है, लेकिन उसके बाद छह की जगह सात नंबर आ जाता है। इस वजह यात्री छह नंबर की बजाय अमूमन सात नंबर पर पहुंच जाते हैं, जबकि छह नंबर प्लेटफार्म सिविल लाइंस साइड में दिल्ली छोर पर है। यह असमजंस की स्थिति आगे भी रह सकती है। क्योंकि जंक्शन के पुनर्विकास में करोड़ों रुपये खर्च करने के बाद भी यहां सभी प्लेटफार्म एक दूसरे के समानांतर नहीं रहेंगे।
मंडल रेलवे उपयोगकर्ता परामर्शदात्री समिति डीआरयूसीसी सदस्य पवन श्रीवास्तव का कहना है अभी सिविल लाइंस साइड में जगह काफी है। रेलवे प्रशासन को चाहिए कि वह सभी प्लेटफार्म एक दूसरे के समानांतर बनाए। वैसे भी प्रयागराज जंक्शन के पुनर्विकास का बजट तकरीबन 950 करोड़ रुपये है। इतनी भारी भरकम रकम में यह काम आसानी से हो सकता है।