{"_id":"69e9293bd9d57b872e0a351b","slug":"laborer-dies-after-falling-into-ditch-body-recovered-from-ganga-after-six-hours-allahabad-news-c-407-1-mn11001-13988-2026-04-23","type":"story","status":"publish","title_hn":"Prayagraj News: खाई में गिरकर मजदूर की मौत, छह घंटे बाद गंगा से शव बरामद","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Prayagraj News: खाई में गिरकर मजदूर की मौत, छह घंटे बाद गंगा से शव बरामद
Thu, 23 Apr 2026 01:32 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, प्रयागराज
संवाद न्यूज एजेंसी, प्रयागराज
Updated Thu, 23 Apr 2026 01:32 AM IST
विज्ञापन
फोटो कैप्शन: मांडा मृतक अवधराम की फाइल फोटो।
- फोटो : Archive
मांडा। थाना क्षेत्र के डेंगुरपुर गंगा घाट पर बाढ़ कटान रोकने के लिए चल रहे निर्माण कार्य के दौरान बुधवार सुबह एक मजदूर 40 फीट गहरी खाई में गिरकर गंगा में समा गया। करीब छह घंटे के बाद मछुआरों की मदद से शव को निकाला जा सका।
बाढ़ प्रखंड के अधिकृत ठेकेदार भंवर इंटरप्राइजेज द्वारा बीते करीब एक माह से जियोटेक्सटाइल ट्यूब और पत्थर पिचिंग का कार्य कराया जा रहा है। बुधवार सुबह लखीमपुर खीरी जिले के थाना धौरहरा क्षेत्र के जंगलवासी मजरा पहाड़ियापुर गांव से नौ मजदूर अमित कुमार, अच्छेलाल, भैयालाल, रिंकू, सरोज, रामलखन, सुरेश, सोहन और अवधराम के साथ पड़ोस के रमवापुर गांव से सतीश, विनय और जुगुनपुर गांव के कुलदीप कार्यदायी संस्था के बुलाने पर डेंगुरपुर गंगा घाट पहुंचे थे।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, पहाड़ियापुर निवासी अवधराम (35) पुत्र तेजी खाई के पास खड़े होकर मोबाइल फोन पर बात करने लगा। तभी उसका पैर फिसल गया और वह चट्टानों से टकराकर गंगा में समा गया।
विज्ञापन
शोर सुनकर मछुआरे नाव लेकर मौके पर पहुंचे लेकिन सफलता नहीं मिली। सूचना पर कार्यदायी संस्था के सत्य प्रताप सिंह और अंकुर सिंह मौके पर पहुंचे लेकिन कुछ देर रुकने के बाद लौट गए। साथी मजदूर अच्छेलाल ने बताया कि सभी 12 लोग बुधवार सुबह डेंगुरपुर गंगा घाट पहुंचे थे।
घटना के करीब चार घंटे बाद पुलिसकर्मियों ने मौके पर पहुंचकर स्थानीय मछुआरों को दोबारा युवक की तलाश करने को कहा। दोपहर एक बजे मछुआरों ने गंगा से शव को बाहर निकाला। अवधराम तीन भाइयों में दूसरे नंबर पर था। परिवार में पत्नी गीता, पुत्र अर्जुन तथा पुत्रियां कामिनी और नीतू हैं। पुलिस ने शव को पोस्मार्टम के लिए भेज दिया है।
कार्यदायी संस्था व विभागीय लापरवाही पर उठे सवाल
मजदूरों का आरोप है कि एक माह से कार्य चलने के बावजूद खाई के पास न तो बैरिकेडिंग कराई गई और न ही किसी प्रकार के सुरक्षा इंतजाम किए गए थे। उनका कहना है कि यदि सुरक्षा व्यवस्था होती तो यह हादसा टल सकता था। आरोप है कि बाढ़ प्रखंड के अधिकारी बुधवार सुबह करीब 11 बजे कार्यस्थल पर पहुंचे। उन्होंने दुर्घटना स्थल तक जाना उचित नहीं समझा और निर्माण कार्य की प्रगति देखकर ही लौट गए।
विज्ञापन
बाढ़ प्रखंड के अधिकृत ठेकेदार भंवर इंटरप्राइजेज द्वारा बीते करीब एक माह से जियोटेक्सटाइल ट्यूब और पत्थर पिचिंग का कार्य कराया जा रहा है। बुधवार सुबह लखीमपुर खीरी जिले के थाना धौरहरा क्षेत्र के जंगलवासी मजरा पहाड़ियापुर गांव से नौ मजदूर अमित कुमार, अच्छेलाल, भैयालाल, रिंकू, सरोज, रामलखन, सुरेश, सोहन और अवधराम के साथ पड़ोस के रमवापुर गांव से सतीश, विनय और जुगुनपुर गांव के कुलदीप कार्यदायी संस्था के बुलाने पर डेंगुरपुर गंगा घाट पहुंचे थे।
विज्ञापन
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, पहाड़ियापुर निवासी अवधराम (35) पुत्र तेजी खाई के पास खड़े होकर मोबाइल फोन पर बात करने लगा। तभी उसका पैर फिसल गया और वह चट्टानों से टकराकर गंगा में समा गया।
विज्ञापन
शोर सुनकर मछुआरे नाव लेकर मौके पर पहुंचे लेकिन सफलता नहीं मिली। सूचना पर कार्यदायी संस्था के सत्य प्रताप सिंह और अंकुर सिंह मौके पर पहुंचे लेकिन कुछ देर रुकने के बाद लौट गए। साथी मजदूर अच्छेलाल ने बताया कि सभी 12 लोग बुधवार सुबह डेंगुरपुर गंगा घाट पहुंचे थे।
घटना के करीब चार घंटे बाद पुलिसकर्मियों ने मौके पर पहुंचकर स्थानीय मछुआरों को दोबारा युवक की तलाश करने को कहा। दोपहर एक बजे मछुआरों ने गंगा से शव को बाहर निकाला। अवधराम तीन भाइयों में दूसरे नंबर पर था। परिवार में पत्नी गीता, पुत्र अर्जुन तथा पुत्रियां कामिनी और नीतू हैं। पुलिस ने शव को पोस्मार्टम के लिए भेज दिया है।
कार्यदायी संस्था व विभागीय लापरवाही पर उठे सवाल
मजदूरों का आरोप है कि एक माह से कार्य चलने के बावजूद खाई के पास न तो बैरिकेडिंग कराई गई और न ही किसी प्रकार के सुरक्षा इंतजाम किए गए थे। उनका कहना है कि यदि सुरक्षा व्यवस्था होती तो यह हादसा टल सकता था। आरोप है कि बाढ़ प्रखंड के अधिकारी बुधवार सुबह करीब 11 बजे कार्यस्थल पर पहुंचे। उन्होंने दुर्घटना स्थल तक जाना उचित नहीं समझा और निर्माण कार्य की प्रगति देखकर ही लौट गए।