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लैब टेक्निशयन भर्ती परिणाम को चुनौती
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Lab challenging recruitment result challenge
लैब टेक्नीशियन भर्ती परिणाम को चुनौती
0 अपात्रों को चयन देने का आरोप, जवाब तलब
अमर उजाला ब्यूरो
प्रयागराज। उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग लखनऊ द्वारा आयोजित लैब टेक्नीशियन भर्ती के परिणाम को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। कहा गया है कि ऐसे अभ्यर्थियों को चयनित कर लिया गया है, जो आवेदन के समय निर्धारित योग्यता नहीं रखते थे और कुछ ऐसे अभ्यर्थी भी चयनित किए गए हैं, जो लिखित परीक्षा में सफल ही नहीं हुए थे। नमित कुमार पांडेय और अन्य की याचिकाओं पर न्यायमूर्ति अश्विनी कुमार मिश्र सुनवाई कर रहे हैं।
याची के अधिवक्ता सीमांत सिंह का कहना था कि 921 प्रयोगशाला सहायकों के पदों का विज्ञापन निकाला गया, जिसके आवेदन की अंतिम तिथि पांच अक्तूबर 2016 थी। आवेदकों के लिए उत्तर प्रदेश राज्य मेडिकल फैकल्टी द्वारा प्रदत्त लैब टेक्नीशियन का डिप्लोमा होना अनिवार्य था। 20 नवंबर 2016 को लिखित परीक्षा हुई और साक्षात्कार के बाद अंतिम परिणाम 15 जून 2019 को जारी किया गया। याचीगण भी साक्षात्कार में शामिल हुए, मगर असफल रहे।
जारी परिणाम को यह कहते हुए चुनौती दी गई कई ऐसे अभ्यर्थियों का चयन किया गया है, जिनके पास आवेदन के समय डिप्लोमा नहीं था। उनके डिप्लोमा का रिजल्ट 30 नवंबर 2016 को जारी हुआ, जबकि आवेदन की अंतिम तिथि पांच अक्तूबर 2016 थी। विज्ञापन में यह स्पष्ट शर्त थी कि आवेदन की तिथि पर अर्हता रखने वाले ही पात्र होंगे। इसके बावजूद ऐसे लोगों का न सिर्फ आवेदन स्वीकार किया गया, बल्कि उनको सफल भी घोषित कर दिया गया। इसी प्रकार से लिखित परीक्षा में असफल रहे लोगों को भी अंतिम रूप से चयनित किया गया है। चयन में गलत तरीके से क्षैतिज आरक्षण लागू करने तथा अंतिम परिणाम में सिर्फ रोल नंबर जारी करने का भी आरोप है। कोर्ट ने इस मामले मेें 25 जुलाई तक जवाब मांगा है।
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0 अपात्रों को चयन देने का आरोप, जवाब तलब
अमर उजाला ब्यूरो
प्रयागराज। उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग लखनऊ द्वारा आयोजित लैब टेक्नीशियन भर्ती के परिणाम को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। कहा गया है कि ऐसे अभ्यर्थियों को चयनित कर लिया गया है, जो आवेदन के समय निर्धारित योग्यता नहीं रखते थे और कुछ ऐसे अभ्यर्थी भी चयनित किए गए हैं, जो लिखित परीक्षा में सफल ही नहीं हुए थे। नमित कुमार पांडेय और अन्य की याचिकाओं पर न्यायमूर्ति अश्विनी कुमार मिश्र सुनवाई कर रहे हैं।
याची के अधिवक्ता सीमांत सिंह का कहना था कि 921 प्रयोगशाला सहायकों के पदों का विज्ञापन निकाला गया, जिसके आवेदन की अंतिम तिथि पांच अक्तूबर 2016 थी। आवेदकों के लिए उत्तर प्रदेश राज्य मेडिकल फैकल्टी द्वारा प्रदत्त लैब टेक्नीशियन का डिप्लोमा होना अनिवार्य था। 20 नवंबर 2016 को लिखित परीक्षा हुई और साक्षात्कार के बाद अंतिम परिणाम 15 जून 2019 को जारी किया गया। याचीगण भी साक्षात्कार में शामिल हुए, मगर असफल रहे।
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जारी परिणाम को यह कहते हुए चुनौती दी गई कई ऐसे अभ्यर्थियों का चयन किया गया है, जिनके पास आवेदन के समय डिप्लोमा नहीं था। उनके डिप्लोमा का रिजल्ट 30 नवंबर 2016 को जारी हुआ, जबकि आवेदन की अंतिम तिथि पांच अक्तूबर 2016 थी। विज्ञापन में यह स्पष्ट शर्त थी कि आवेदन की तिथि पर अर्हता रखने वाले ही पात्र होंगे। इसके बावजूद ऐसे लोगों का न सिर्फ आवेदन स्वीकार किया गया, बल्कि उनको सफल भी घोषित कर दिया गया। इसी प्रकार से लिखित परीक्षा में असफल रहे लोगों को भी अंतिम रूप से चयनित किया गया है। चयन में गलत तरीके से क्षैतिज आरक्षण लागू करने तथा अंतिम परिणाम में सिर्फ रोल नंबर जारी करने का भी आरोप है। कोर्ट ने इस मामले मेें 25 जुलाई तक जवाब मांगा है।
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