सात समंदर पार से आईं विदेशी संन्यासिनियों, स्टाइलिश नागाओं के बीच कुंभ में अद्भुत बाबा को देखते रह जाएंगे। इनका नाम ही है अद्भुत बाबा। नख से शिख तक उनके निराले रूप-शृंगार के सब दीवाने हैं। कोई उनके साथ सेल्फी के लिए बेताब है तो कोई कुछ पल बिताने के लिए। एमए पास अद्भुत बाबा भगवान कृष्ण के रूप में संगम की रेती प्रेम, करुणा और मानवता का संदेश दे रहे हैं।
बाइक से अखाड़ों के शिविरों से संगम तक जब वह फर्राटा भरते हैं,तब उनकी झलक पाने के लिए भीड़ लग जाती है।
उज्जैन से आए अद्भुत बाबा की भक्ति साधना की कहानी खासा दिलचस्प है। एमए पास करने के बाद महाकालेश्वर की नगरी में उन्हें सांसारिक मायामोह से विरक्ति हो गई। 31 जनवरी की शाम प्रयागराज कुंभ में पहुंचे अद्भुत बाबा सेक्टर-15 में शाश्वतानंद महाराज के शिविर में ठहरे हैं। वह बताते हैं कि 13 वर्ष पहले उन्होंने भगवान कृष्ण की भक्ति शुरू की। फिर,वह कृष्ण-कन्हैया ही बन गए।
उनकी दिनचर्या शृंगार से शुरू होती है। अद्भुत बाबा के मुताबिक वह नियमित सात घंटे तक शृंगार करते हैं। कृष्ण रूप में सजने के लिए घंटों जतन उनकी आदत बन गई है। दिन भर रूप सजाना और शाम को दर्शन देने के लिए भक्तों के बीच निकल पडऩा ही उनका काम है।
सिर पर मोर मुकुट वाली शाही पगड़ी, काला चश्मा और हाथ में बांसुरी लेकर वह रोज कुंभ में अपने आगे-पीछे भीड़ बटोर रहे हैं। गले में मोती-मूंगा, स्फटिक और रत्नों के जड़ाऊ हार। कानों में कर्णफूल, हाथों में कंगन, कड़ा, पैरों में पैजनियां, उंगलियों में छल्लेदार अंगूठियां उनके रूप की शोभा हैं। वह बताते हैं कि कृष्ण के साथ ही वह राधा का भी शृंगार करते हैं। इसलिए कि राधा के बिना कृष्ण अधूरे हैं।
हालांकि अद्भुत बाबा ने सांसारिक जीवन से अलग होने के बाद शादी नहीं की। इसलिए कि उन्हें राधा की चाह नहीं है। अद्भुत बाबा को स्पर्श करना मना है। वह सजने-संवरने के बाद दूर से दर्शन देते हैं। शनिवार की रात नौ बजे वह निरंजनी अखाड़े के पास बाइक लेकर पहुंचे तो भीड़ लग गई। अद्भुत बाबा वसंत पंचमी पर शाही स्नान में पुण्य की डुबकी लगाएंगे।