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कलयुग में नाम स्मरण महिमा अपरंपार, प्रभु प्रेमी संघ शिविर में स्वामी अवधेशानंद ने सुनाई भागवत कथा 

Mon, 28 Jan 2019 11:38 AM IST
vivek shukla न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज Published by: vivek shukla Updated Mon, 28 Jan 2019 11:38 AM IST
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kumbh 2019 Swami Avdheshanand Bhagwat katha in kumbh mela prayagraj
जूना पीठाधीश्वर आचार्य महामंलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि
प्रभु प्रेमी संघ सिविर में जूना पीठाधीश्वर आचार्य महामंलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि ने रविवार को कलयुग में नाम स्मरण की महिमा बताई। उन्होंने सत्संग को मोक्ष का मूल बताते हुए कहा कि प्रसाद बांटने की वस्तु है, सहेजने की नहीं।
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श्रीमद् भागवत कथा के तीसरे दिन स्वामी अवधेशानंद गिरि ने सृष्टि की रचना और मां के माहत्म्य को सारगर्भित तरीके से बताया। उन्होंने कहाकि सृष्टि के क्रम में कन्या पहले आई। वह कीट से ब्रह्म तक की जननी है, इसलिए जब गुरु की गणना की गई तो शास्त्रों ने मां को प्रथम गुरु माना है। उन्होंने मनु, शतरूपा के साथ मां अनुसुइया सहित नौ कन्याओं के जन्म से जुड़ी कथा को विस्तार दिया। 
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कथा में आचार्य महामंडलेश्वर ने गर्भाधान संस्कार उसमें दिन, तिथि, मूहर्त, आदि काल गणनाओं का वैज्ञानिक निरूपण करते हुए मां अनुसूइया की कथा का श्रवण कराया। उन्होंने कहाकि अपने सतित्व और तपश्चर्या के प्रभाव से अनुसूइया ने त्रिदेवों को दुधमुंहा बच्चा बना लिया था। उन्होंने कहाकि जिस दिन स्त्री अपने स्वरूप में लौटेगी, वह अनुसूइया बन जाएंगी।
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कर्दम ऋषि की नौ पुत्रियों के जन्म, भगवान नारायण का कपिल मुनि के रूप में प्रकट होना और देवहूति को अष्टांग योग की शिक्षा देकर उद्धार करने के प्रसंगों को तार्किक ढंग से समझाया। उन्होंने कहा कि कपिल मुनि ने देवहूति को जो भी उपदेश दिए उन सबका मूल यह है कि वीतराग पुरुषों का संग ही जीवन सिद्धी का सोपान है, सत्संग ही मोक्ष का मूल है।


स्वामी अवधेशानंद गिरि ने कहा कि कलियुग में नाम स्मरण की बड़ी महिमा है। सत्संग तभी फलीभूत होगा जब आपको पदार्थ प्रसाद दिखने लगेंगे। प्रसाद बांटने की वस्तु है, सहेजने की नहीं। प्रासादिक गुण उत्पन्न होने से वस्तु दिव्य हो जाती है और दिव्यता का अनुभव प्रभु को सर्वस्व समर्पित करने से ही प्राप्त होता है। कथा में केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. सत्यपाल सिंह, सांसद रेवती रमण सिंह, स्वामी नैसर्गिका गिरि, स्वामी अपूर्वानंद, विवेक ठाकुर, स्वामी कैलाशानंद गिरि, महेंद्र लाहौरिया, अलका सिंगलास, सुरेंद्र सराफ, सांवरमल तुलस्यान सहित बड़ी संख्या में प्रभु प्रेमीजन उपस्थित रहे।


 
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