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कुंभ 2019: कभी जुर्म से रंगे थे हाथ, अब हुनर दिखा कर रहे हैरान

Sat, 26 Jan 2019 03:22 PM IST
vivek shukla न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज Published by: vivek shukla Updated Sat, 26 Jan 2019 03:22 PM IST
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Prisoners handmade accessories are being sold at Maha Kumbh Mela 2019
kumbh

इनके हाथ कभी जुर्म से रंगे थे। लेकिन अब इनके हुनर को देखकर हर कोई हैरान है। इनकी बनाई पेंटिंग, फर्नीचर पर की गई कारीगरी ऐसी है कि बड़े-बड़े कारीगर मात खा जाएं। हम बात कर रहे हैं उन बंदियों की, जिनके बनाए उत्पादों को देखने व खरीदने के लिए मेला क्षेत्र में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है। मेला क्षेत्र में त्रिवेणी मार्ग के पास लगी इस प्रदर्शनी में सुबह से लेकर शाम तक श्रद्धालुओं का जमावड़ा होता है। यहां विभिन्न जेलों में बनाई गई 60 से ज्यादा सामग्रियों व उत्पादों की प्रदर्शनी लगाई गई है। यह सभी चीजें जेलों में निरुद्ध बंदियों ने बनाई हैं।

Prisoners handmade accessories are being sold at Maha Kumbh Mela 2019
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जिनमें नैनी के साथ ही आगरा, लखनऊ, वाराणसी, बरेली, फतेहगढ़, नोएडा व गाजियाबाद जेल में बनी वस्तुएं शामिल हैं। यहां पेंटिंग से लेकर फर्नीचर तक उपलब्ध है। कीमत की बात करें तो यहां 10 रुपये से लेकर 25 हजार तक का सामान उपलब्ध है। सबसे खास बात यह है कि हर सामान को इतनी खूबसूरती से बनाया गया है कि इसे देखकर बड़े-बड़े कारीगर हैरत में पड़ जाएं।
Prisoners handmade accessories are being sold at Maha Kumbh Mela 2019
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प्रदर्शनी के प्रभारी व नैनी जेल में इंस्ट्रक्टर के पद पर तैनात दिनेश शर्मा ने बताया कि जेल में आने वाले बंदियों को उनकी अभिरुचि व कौशल के आधार पर विभिन्न तरह के कामों में लगाया जाता है। इसके लिए उन्हें पहले उस कार्य के विशेषज्ञ से प्रशिक्षण भी दिलाया जाता है। इसका उद्देश्य यह होता है कि बंदी गलत रास्ता छोड़कर सकारात्मकता से जीवन जीने की ओर अग्रसर हों।
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Prisoners handmade accessories are being sold at Maha Kumbh Mela 2019
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85 फीसदी पारिश्रमिक का होता है भुगतान
जेल प्रशासन का कहना है कि जेल में निरुद्ध रहने के दौरान जो कार्य बंदियों से कराए जाते हैं, उसके लिए उन्हें पारिश्रमिक दिया जाता है। इसके लिए उनका खाता खुलवाया जाता है और इसी खाते में रकम डाल दी जाती है। पारिश्रमिक की 85 फीसदी रकम बंदी के खाते में जाती है जबकि 15 फीसदी रकम वादी के खाते में भेज दी जाती है। खाते में जमा रकम जरूरत पड़ने पर बंदी के परिवार को दे दी जाती है अथवा उसके रिहा होने पर उसे सौंप दी जाती है।

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गाजियाबाद की पेंटिंग, नैनी से आया फर्नीचर
प्रदर्शनी में सबसे पहले लोगों की नजर बंदियों की बनाई हुुई पेंटिंग पर ही जाकर टिक जाती है। यह इतनी खूबसूरती से बनाई गई हैं कि इन्हें देखने से यही लगता है कि इन्हें किसी प्रोफेशनल पेंटर ने बनाया हो। इसके अलावा लकड़ी के बने रेडीमेड मंदिर भी लोगों को बरबस अपनी ओर खींच लेते ह्रै। उधर बंदियों के बनाए हुए फर्नीचर भी लोगों के आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। उधर डेकोरेटिव इलेक्ट्रॉनिक लाइटों के स्टाल पर भी भीड़ उमड़ रही है।

कौन-कौन से हैं उत्पाद
फर्नीचर, रेडीमेट मंदिर, सरसों का तेल, सेनेटरी पैड, गार्डन अंब्रेला, साबुन, आचार, मुरब्बा, थैले, दरियां, लकड़ी का बना किचन का सामान, बैग, लेडीज पर्स,  पेंटिंग, डकोरेटिव इलेक्ट्रानिक लाइटें, लैंप आदि।
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