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धर्म संसद के बाद संतों के शिविरों में शुरू हुई घेराबंदी, मोदी के धुर विरोधी भी हुए सक्रिय

Sat, 02 Feb 2019 08:00 PM IST
vivek shukla पंकज प्रसून, अमर उजाला, प्रयागराज
पंकज प्रसून, अमर उजाला, प्रयागराज Published by: vivek shukla Updated Sat, 02 Feb 2019 08:00 PM IST
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Kumbh 2019: kumbh 2019: saints talk about ram mandir in kumbh mela prayagraj

धर्म संसद में मंदिर निर्माण का प्रस्ताव और शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती के 21 फरवरी को अयोध्या में रामलला के स्थल पर शिलान्यास की घोषणा से कुंभ क्षेत्र में धर्म और राजनीति को लेकर अलग हवा बहने लगी है। संतों और कल्पवासियों के शिविरों में पक्ष-विपक्ष के समर्थन में घेराबंदी बनाने का काम शुरू हो गया है।

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भाजपा के प्रमुख नेताओं में शामिल रहे पूर्व संगठन मंत्री संजय जोशी और उनकी टीम शनिवार को  कुंभ क्षेत्र में सक्रिय दिखाई दी। वह शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती के परमशिष्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के शिविर पहुंचे और कई मुद्दों उनसे लंबी चर्चा की। संजय जोशी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का छत्तीस का आंकड़ा लंबे समय से है। ऐसे में स्वरूपानंद के शिविर में उनके पहुंचने को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हैं। 
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इसी तरह अखाड़ा परिषद से जुड़े पदाधिकारियों के धर्म संसद में नहीं आने की वजह से अब बड़े संतों के माध्यम से परिषद की घेरेबंदी शुरू हो गई है। अखाड़ा परिषद के अंदर भी इस बात को लेकर हलचल है कि कुंभ के बाद वह मंदिर निर्माण और केंद्र में नई सरकार चुनने को लेकर किस दिशा में जाएंगे।

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सबसे ज्यादा हलचल रामानंदाचार्य हंसदेवाचार्य के शिविर में देखी गई। विहिप पदाधिकारियों के अलावा अखाड़ों से जुड़े तमाम संतों ने उनसे संपर्क कर आगे क्या करना है, इसे लेकर उनकी राय पूछी है। पता चला है कि हंसदेवाचार्य ने अखाड़ों के कई संतों पर नाराजगी जाहिर की है, जिन्होंने विहिप की धर्म संसद का बहिष्कार किया है।

इस संबंध में जब हंसदेवाचार्य से पूछा गया तो उन्होंने बताया कि कुछ लोगों की दिशा भ्रमित हो गई है। बोले कि ऐसे लोगों को समझना होगा कि सिर्फ राम मंदिर निर्माण ही नहीं चीन और पाकिस्तान को जवाब देने के लिए भी केंद्र में मोदी सरकार की वापसी जरूरी है। सपा-बसपा के गठबंधन को उन्होंने ठगबंधन की संज्ञा देते हुए कहा कि ऐसे लोगों के भरोसे देश को नहीं छोड़ा जा सकता है। जो इनके पीछे लगे हैं, उन्हें देश और राम की चिंता नहीं है।

इसी तरह शंकराचार्य अधोक्षजानंद के शिविर में भी भाजपा के कई प्रमुख नेताओं का आना जाना शुरू हो गया है। केंद्रीय अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष राम शंकर कठेरिया के बाद गुवाहाटी की भाजपा सांसद विजया चक्रवर्ती, अरुणाचल सरकार के मंत्री जापूडेरा ने अलग-अलग समय पर आकर आगामी सरकार को लेकर मंथन किया। अधोक्षजानंद ने कहा कि पहली बार कुंभ में एक सार्थक पहल हो रही है।

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