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कुंभ 2019: सिर पर गठरी, कांधे पर झोरा, शटल से आया श्रद्धालुओं का रेला

Sun, 03 Feb 2019 08:04 PM IST
देव कश्यप न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज Published by: देव कश्यप Updated Sun, 03 Feb 2019 08:04 PM IST
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kumbh 2019: Devotees excited for mauni amavasya snan in sangam prayagraj
mauni amavasya
कुछ ही घंटे बाद प्रयागराज का कुंभ अविस्मरणीय जन जमावड़े का साक्षी बनेगा। इसकी कड़ी दो दिन से भीड़ के सैलाब के रूप में सामने है। कहीं लोग सिर पर गठरी, कांधे पर झोरा लिए तो कहीं ट्राली बैग खींच रहे श्रद्धालु पग-पग चलते संगम तीरे पहुंचने को आतुर रहे। मौनी अमावस्या स्नान के लिए लिए चारों दिशाओं से आने वाली सड़कों पर आस्था का रेला ही दिखा मतलब चहुं ओर मूडय़-मूडय़।
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बड़का कुंभ हय, इंह बरै आएन हैं...
खेती किसानी करने वाले 73 वर्षीय शिव नारायण यादव ज्यादा दूर नहीं पड़ोसी जनपद प्रतापगढ़ के अंतू निवासी हैं। मेला क्षेत्र की काली सड़क पार कर संगम नोज जाने की जद्दोजहत में फंसे थे। वह बोले, गांव जवार में सुनल कि अबकी बड़का कुंभ लगा है। बड़के कुंभ में संगम मा डुबकी लगावय बरै इयां पहुंचेन।
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फाफामऊ के काफी पहले से पैदल सफर कर संगम तट पहुंचे बुजुर्ग शिव नारायण उत्साह से लबरेज थे। कहीं शिकन नहीं, चेहरे पर पुण्य अर्जन की कामना से वह रास्ता रोक रहे सिपाहियों के हाथ जोड़ते रहे। 
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शिवनारायण ने बताया परिवार और काम (खेती-किसानी) से फुर्सतय नय मिलत। इ..बार मन में चाह रही कि हमहू संगम नहाय आई...ई बरै..इहां आए हईयय...। शिवनारायण के मुताबिक आज शााम तक गंगा नहाएंगे, भोर में संगम स्नान कर घर वापस जाएंगे।

 

मां की इच्छा पूरा करने गोंडा से आए बेचन

बेटा हो तो ऐसा, चार दिन पहले मां ने कुंभ देखने और संगम स्नान की इच्छा जताई और वह सहर्ष तैयार हो गया। मां को ठीक से दिखता भी नहीं, खुद भी शारीरिक रूप से कुछ कमजोर लेकिन हौसला बुलंद दिखा। साथ चलने के लिए चाची को तैयार किया और पहुंच गए प्रयागराज। 

रेलवे स्टेशन पर दो घंटे इंतजार के बाद भी बस, ई रिक्शा नहीं मिला तो पैदल ही चल दिए कुंंभ क्षेत्र की ओर, धीरे-धीरे चलते-चलते पहुंचे मेला तो भीड़ में चाल धीमी होने से डगर मगर होते रहे। पुण्य की आस से मां-बेटे और चाची का हाथ कहीं नहीं छूटा। 

गोंडा के गौरा चौकी की रहने वाली 77 वर्षीय गिरिजा देवी ने बताया कि अब मोक्ष की कामना है, सगरौ पाप धुई के बेटवा के गंगा मइया आशीर्वाद देइहंय.... बेटे बेचन गुप्ता ने बताया कि वह खेती किसानी करता है। पहली बार मां ने कोई इच्छा जाहिर की तो उसे पूरा करने चला आया। बेचन के मुताबिक मां को अकेले संभालना कठिन था इसलिए चाची 65 वर्षीय सावित्री देवी को भी लाए हैं। मौनी की डुबकी लगाकर सोमवार को वापस जाएंगे लेकिन इससे पहले मां को कहीं भागवत कथा जरूर सुनवाएंगे। 


 

 

शटल बस से लाए गए पांच लाख से अधिक श्रद्धालु

कुंंभ स्नान के लिए स्टेशनों तथा पार्किंग स्थलों से शटल बसों की व्यवस्था की गई है। कुल 500 बसें चलाई जा रही हैं। हालांकि, शटल बसें निर्धारित स्थान तक ही चलाई जा रही हैं। चंकि झूंसी, फाफामऊ, नैनी पुल पर आवागमन प्रतिबंधित कर दिया गया है। इसकी वजह से लोगों को 10 से 15 किमी पैदल चलना पड़ा। रविवार को पांच लाख से अधिक लोगों को शटल बसों से लाया गय। मंडलायुक्त  डॉ. आशीष कुमार गोयल ने बताया कि दिन में ११ बजे तक ही ढाई लाख लोगों को लाया जा चुका था।।

अक्षयवट, सरस्वती कूप का दर्शन छह से
संगम स्नान के लिए आने वाले मंगलवार तक अक्षयवट सरस्वती कूप का दर्शन नहीं कर पाएंगे। मौनी स्नान के लिए स्नानार्थियों की भारी भीड़ आ रही है। इसे देखते हुए पांच फरवरी तक दर्शन पर रोक लगा दी गई है। अब छह फरवरी से दर्शन हो पाएगा।

ई-रिक्शा भी प्रतिबंधित
कुंभ क्षेत्र में रविवार शाम से ई-रिक्शा की सुविधा प्रतिबंधित कर दी गई। सोमवार को भी ई-रिक्शा नहीं चलेंगे। मौनी अमावस्या पर बढ़ती भीड़ को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है। मेला से बाहर झूंसी में कटका से आगे कोई ई-रिक्शा नहीं चलेगा। 

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