कुंभ 2019ः मौनी से पहले संगम पर लाखों श्रद्धालुओं का डेरा, पांटून पुलों पर लंबी कतारें
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चार फरवरी को होने वाले प्रयागराज कुंभ के सबसे बड़े स्नान पर्व मौनी अमावस्या पर डुबकी के लिए शनिवार की शाम तक बड़ी संख्या में श्रद्धालु संगम पहुंच गए। फाफामऊ से अरैल के बीच सभी 22 पांटून पुलों पर लंबी कतारें सुबह से देर रात तक लगी रहीं। वहीं सोमवार को पर्व पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ आने के मद्देनजर इस बार सुरक्षा के अभूतपूर्व इंतजाम किए गए हैं।
मौनी पर गंगा, यमुना, अदृश्य सरस्वती के पवित्र संगम में स्नान के लिए आस्था का सागर हिलोरें मारने लगा है। करीब 32 सौ हेक्टेयर क्षेत्रफल में बसे मेला क्षेत्र का नजारा शनिवार की शाम को बदल गया। हर तरफ सिर पर गठरी और हाथों में अपनों का हाथ थामे बढ़ते श्रद्धालुओं का रेला दिखने लगा। फाफामऊ, शिवकुटी, नागवासुकी, बख्शी बांध, दारानगर, बेनी बांध के अलावा नैनी ब्रिज से कुंभ मेला क्षेत्र में पहुंचने वाले रास्तों पर लोग पैदल आगे बढ़ने की जद्दोजहद कर रहे थे।
कुछ श्रद्धालु बच्चों को कंधे पर बैठाए थे तो कुछ बुजुर्ग लाठी लेकर संगम तट की ओर बढ़ते जा रहे थे। स्नान घाटों के अलावा संगम क्षेत्र में की रेती पर जगह-जगह समूहों में लोगों ने अपना ठिकाना बना लिया। हालत यह थी कि न शिविरों में जगह बची न मठों, धर्मशालाओं में। टेंट सिटी भी हाउसफुल है। मेला क्षेत्र में 17 कंपनी पैरा मिलिट्री फोर्स लगाई गई है। इसके अलावा होमगार्डों समेत 14 हजार पुलिस कर्मी तैनात किए गए हैं।
मौनी अमावस्या पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम
1. 10 जोन में मेला क्षेत्र को बांट तक तैनात किए गए सुरक्षा कर्मी
2. 440 सीसीटीवी कैमरों से चप्पे-चप्पे की निगरानी
3. 96 फायर वाच टावर आईसीसीसी से जोड़े गए
4. 37 कंपनीआरएएफ, बीएसएफ, सीआरपीएफ, एसएसबी, आईटीबीपी समेत अन्य अर्धसैनिक बलों की तैनाती
5 .10 कंपनी एनडीआरएफ लगाई गई
6. सुगम स्नान की व्यवस्था
7. 41 घाटों पर संगम के दोनों किनारों पर लगेगी डुबकी
8. 40 सब फायर स्टेशन आग से बचाव के लिए चौबीस घंटे सक्रिय
9. 111 घुड़सवार पुलिस घाटों से लेकर संगम तक निगरानी में जुटी
कल लगेगी डुबकी मिलेगा अक्षय पुण्य
प्रयागराज के कुंभपर्व के दूसरे शाही, मौनी अमावस्या स्नानपर्व पर सोमवार को बड़ी संख्या में श्रद्धालु डुबकी लगाएंगे। अमावस्या तिथि का संचरण रविवार को दिन में 11.12 बजे से प्रारंभ होकर चार फरवरी को दिन में 1.12 बजे तक रहेगा। लेकिन, उदयातिथि के कारण मौनी अमावस्या स्नानपर्व सोमवार को ही होगा। इसी दिन स्नान, दान एवं श्राद्ध की अमावस्या है। मान्यता के मुताबिक मौन रहकर स्नान, दान करना विशेष पुण्यदायी है।
उत्थान ज्योतिष संस्थान के निदेशक ज्योतिर्विद पं.दिवाकर त्रिपाठी 'पूर्वांचली' के मुताबिक मौनी अमावस्या स्नानपर्व, सोमवार को पड़ने से सोमवती अमावस्या का अक्षय पुण्य प्राप्त होगा। ब्रह्म मुहुर्त्त से ही मौनी अमावस्या का स्नान आरंभ हो जाएगा। श्रवण नक्षत्र रविवार की रात में 2.27 बजे से 4.57 बजे तक है। मौनी, सोमवती अमावस्या पर श्रवण नक्षत्र के साथ ही बन रहा सर्वार्थ अमृत सिद्धि योग सर्वप्रकार से अमृततुल्य है।